बड़गाई जमीन घोटाला: हेमंत सोरेन की याचिका पर हाईकोर्ट में होगी अहम सुनवाई, PMLA कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़गाई जमीन मामले में निचली अदालत के आदेश के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की मेंटेनेबिलिटी पर अब 29 सितंबर को सुनवाई होनी है।

झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़गाई अंचल में कथित जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर कानूनी रास्ता अपनाया है। उन्होंने रांची स्थित PMLA कोर्ट के 21 सितंबर के एक आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में मुख्यमंत्री की ओर से क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका के सुनवाई योग्य होने यानी मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर हाईकोर्ट में आगामी 29 सितंबर को सुनवाई निर्धारित की गई है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला मुख्य रूप से बड़गाई अंचल की 8.86 एकड़ भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण और घोटाले से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इस पूरे मामले की गहन जांच के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत लगभग 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। निचली अदालत की प्रक्रिया में अब तक 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं। विवाद उस समय गहराया जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने PMLA कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसमें उन्होंने यह आग्रह किया था कि जब तक ED की ओर से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाए। हालांकि, निचली अदालत ने उनके इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और उनकी मांग को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट के सामने कानूनी सवाल

निचली अदालत के इसी आदेश के खिलाफ हेमंत सोरेन ने अब हाईकोर्ट का रुख किया है। दाखिल की गई क्रिमिनल रिट याचिका में उन्होंने निचली अदालत के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि वर्तमान में हाईकोर्ट का ध्यान सबसे पहले इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह याचिका सुनवाई के लिए पूरी तरह से वैध है। 29 सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान अदालत यह तय करेगी कि याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर क्या रुख अपनाया जाए। यदि अदालत याचिका को सुनवाई के योग्य मानती है, तभी इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।

आगे क्या होगा

इस पूरे घटनाक्रम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि हाईकोर्ट का आगामी रुख इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा। यदि हाईकोर्ट निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली इस याचिका को स्वीकार कर लेता है, तो आरोप तय करने की प्रक्रिया फिलहाल के लिए प्रभावित हो सकती है। इसके विपरीत, यदि मेंटेनेबिलिटी के बिंदु पर कोई नकारात्मक निर्णय आता है, तो निचली अदालत में कानूनी कार्रवाई पूर्ववत जारी रह सकती है। अभी सारा दारोमदार हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिका है, जो मुख्यमंत्री के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ साबित हो सकती है।

https://hindi.news18.com/news/jharkhand/ranchi-hemant-soren-challenges-pmla-court-order-bargaain-land-case-jharkhand-high-court-local18-ws-n-10870790.html