रबी सीजन के मुहाने पर पाकिस्तान का संकट
पाकिस्तान में रबी सीजन की बुवाई की तैयारी के बीच एक बड़ा संकट सामने खड़ा हो गया है। देश में पानी की उपलब्धता पिछले चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर है कि 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले कृषि सत्र के लिए पानी की आपूर्ति में लगभग 25 फीसदी की भारी कमी दर्ज की जा सकती है। यह संकट न केवल किसानों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि पाकिस्तान की समग्र खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहा है।
खेती और फसलों पर असर
पानी की इस किल्लत का सबसे सीधा और घातक प्रहार गेहूं की फसल पर पड़ने की संभावना है। चूँकि रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुवाई मुख्य आधार होती है, सिंचाई के लिए पर्याप्त जल न मिलना पैदावार में बड़ी गिरावट का कारण बन सकता है। देश पहले ही आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रहा है और ऐसे में अनाज का उत्पादन कम होना महंगाई और भुखमरी की स्थितियों को और अधिक भयावह बना सकता है।
प्रांतीय तनाव में बढ़ोत्तरी
जल संसाधनों की इस कमी ने पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक समीकरणों को भी हिला दिया है। सिंधु जल को लेकर भारत के साथ पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है, लेकिन अब देश के भीतर भी पानी के बंटवारे को लेकर सिंध और पंजाब प्रांतों के बीच नए सिरे से तनाव बढ़ने के आसार हैं। खेतों की सिंचाई और पानी की हिस्सेदारी को लेकर दोनों प्रांतों के बीच बढ़ता विवाद आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए ऐसे समय में आई है जब उसे अपनी कृषि अर्थव्यवस्था को संवारने की सख्त जरूरत है।
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