आजमगढ़ पुलिस का मानवीय चेहरा
उत्तर प्रदेश पुलिस अक्सर अपने सख्त रुख और अपराधियों के खिलाफ की गई त्वरित कार्रवाई के लिए पहचानी जाती है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खाकी वर्दी का कठोर होना अनिवार्य है, लेकिन इसी सख्त वर्दी के भीतर धड़कता एक संवेदनशील दिल भी है। आजमगढ़ के एसएसपी और तेजतर्रार आईपीएस डॉ. अनिल कुमार इसी संवेदनशीलता का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आए हैं। हाल ही में शंभूपुर गांव में हुए हृदयविदारक गोलीबारी कांड के बाद जब दो नन्हीं बच्चियां दुनिया में अकेली रह गईं, तो डॉ. अनिल कुमार ने उनके सिर पर साया बनकर खड़े होने का साहसी निर्णय लिया है।
शंभूपुर हत्याकांड और बच्चियों का भविष्य
शंभूपुर गांव में हाल ही में एक ऐसी वारदात हुई जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। अरविंद सिंह नामक एक व्यक्ति ने खौफनाक कदम उठाते हुए अपनी पत्नी, अपने बेटे और घर पर पूजा-पाठ के लिए आए दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी के साथ हुई मुठभेड़ में उसे ढेर कर दिया। इस खूनी संघर्ष के बाद आरोपी की 11 महीने और 11 साल की दो बेटियां अनाथ हो गईं। इन बच्चियों के सिर से न केवल पिता का साया उठ गया, बल्कि मां भी इस दुनिया में नहीं रहीं। ऐसे में, अपराधियों के लिए काल बने आईपीएस डॉ. अनिल कुमार इन मासूमों के लिए देवदूत बनकर सामने आए और उन्होंने इन बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।
खाकी का अनोखा सहयोग
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार की इस दरियादिली ने पूरे पुलिस विभाग में एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने न केवल बच्चियों को गोद लेने का फैसला किया, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपनी 1 महीने की पूरी सैलरी फिक्स डिपॉजिट के रूप में जमा करने की घोषणा भी की है। एसएसपी की इस अनूठी पहल से प्रेरित होकर आजमगढ़ पुलिस महकमे के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी कदम आगे बढ़ाए हैं। विभाग के कर्मचारियों ने इन अनाथ बच्चियों की मदद के लिए अपनी 1 दिन की सैलरी देने का निर्णय लिया है। यह घटना साबित करती है कि खाकी वर्दी केवल कानून का डंडा चलाना ही नहीं जानती, बल्कि जरूरत पड़ने पर एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए बच्चों के लिए सुरक्षा कवच भी बन सकती है।
संघर्ष और शिक्षा का सफर
डॉ. अनिल कुमार की जीवन यात्रा किसी प्रेरणा से कम नहीं है। मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले अनिल कुमार का प्रारंभिक जीवन काफी चुनौतियों भरा था। उनके पिता श्री Sharwan एक सरकारी शिक्षक थे, जिन्होंने उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया। अनिल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में ही की, जहाँ उन्होंने जमीन पर बैठकर अक्षर ज्ञान सीखा। अपनी लगन और मेहनत के बल पर उन्होंने स्कूली शिक्षा में बेहतरीन अंक प्राप्त किए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने 12वीं की परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। अपने दादा की प्रबल इच्छा का मान रखने के लिए उन्होंने मेडिकल के क्षेत्र में जाने का निर्णय लिया और डॉक्टर संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के तौर पर मरीजों की सेवा भी की।
यूपीएससी का जुनून और आईपीएस बनने तक का सफर
एक डॉक्टर के रूप में कार्य करते हुए भी अनिल कुमार के भीतर समाज के लिए कुछ बड़ा करने की छटपटाहट बनी रही। उन्होंने स्वयं एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि जिस मेडिकल कॉलेज से उन्होंने एमबीबीएस किया, वहां के कई सीनियर छात्र यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी बन चुके थे। अपने सीनियर्स को प्रशासनिक सेवा में सफलता प्राप्त करते देखकर उनके भीतर भी सिविल सेवा परीक्षा पास करने का जज्बा पैदा हुआ। उनके परिवार में उनकी बहन ने भी प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। अंततः, उन्होंने मेडिकल के अपने सफेद कोट को छोड़ दिया और सिविल सेवा की चुनौतीपूर्ण राह चुनी।
डॉ. अनिल कुमार ने अपनी कठोर मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परचम लहराया और 613वीं रैंक प्राप्त की। वह 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका आधिकारिक आईडी नंबर 20161613 है। उन्होंने 19 दिसंबर 2016 को पुलिस सेवा में कार्यभार संभाला। अपनी बेहतरीन कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए 18 सितंबर 2025 को उन्हें आजमगढ़ के एसएसपी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई।
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की उपलब्धि
उत्तर प्रदेश पुलिस में डॉ. अनिल कुमार को एक खूंखार 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कई खौफनाक अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाए हैं। उनकी कार्यशैली और साहस के कारण उन्हें शासन और प्रशासन द्वारा कई प्रतिष्ठित पदकों से सम्मानित किया गया है। उन्हें 26 जनवरी 2021 को डीजीपी के सिल्वर डिस्क, 26 जनवरी 2023 को डीजीपी के गोल्ड डिस्क और 15 अगस्त 2025 को डीजीपी के प्लेटिनम डिस्क से नवाजा गया है। अपराधियों के लिए सख्त और बेगुनाहों के लिए मसीहा बने डॉ. अनिल कुमार आज पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बने हुए हैं।
https://hindi.news18.com/news/career/jobs-up-police-singham-dr-ips-anil-kumar-success-story-azamgarh-ssp-shambhupur-murder-case-story-10867139.html