कोडरमा अदालत का ऐतिहासिक फैसला
झारखंड के कोडरमा जिले में नाबालिग के साथ हुए गैंगरेप के एक वीभत्स मामले में न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो अदालत ने इस गंभीर अपराध के लिए दो दोषियों को अंतिम सांस तक आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश भर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हो रहे अपराधों पर चिंता जताई जा रही है।
सजा और जुर्माने का विवरण
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश सचिंद्रनाथ सिन्हा ने 26 सितंबर को पॉक्सो केस नंबर 01/2025 में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने रोहित कुमार उर्फ रोहित राजवार (उम्र 19 वर्ष) और चंदन कुमार (उम्र 20 वर्ष) को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी करार दिया। सजा का ब्यौरा इस प्रकार है:
- आजीवन कारावास: दोनों दोषियों को अंतिम सांस तक सश्रम कारावास की सजा मिली है।
- आर्थिक जुर्माना: दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें छह-छह माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
- बीएनएस की धारा 76: इस धारा के तहत भी दोनों को पांच वर्ष का सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना दिया गया है। जुर्माना न देने पर दो माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
- अन्य धाराएं: इसके अतिरिक्त धारा 115(2) के तहत एक-एक वर्ष और धारा 126(2) के तहत एक माह की सजा सुनाई गई है।
अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही, अदालत ने पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को उचित मुआवजा राशि उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
क्या था पूरा मामला
यह घटना वर्ष 2024 की है, जिसके संबंध में कोडरमा थाना में कांड संख्या 240/2024 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी के अनुसार, पीड़िता अपने भाई के साथ पास की ही एक पहाड़ी पर ढिबरा चुनने के लिए गई थी। आरोप है कि वहां पहले से घात लगाए बैठे रोहित राजवार, चंदन राजवार और एक अन्य युवक ने पीड़िता और उसके भाई को घेर लिया।
दोषियों ने पहले पीड़िता के भाई के साथ मारपीट की और फिर उसे एक पेड़ से रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद, आरोपियों ने नाबालिग लड़की को जंगल की ओर खींच लिया। आरोप है कि दोपहर करीब 12 बजे से लेकर रात के 9 बजे तक आरोपियों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसके नाक, कान और गले के सोने-चांदी के जेवर, भाई का मोबाइल फोन और 1200 रुपये नकद भी लूट लिए। साथ ही, घटना के बारे में किसी को बताने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।
न्यायिक प्रक्रिया और गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने मजबूती से पैरवी की। अभियोजन ने कुल 10 गवाहों का परीक्षण कराया और अपराध की बर्बरता को देखते हुए दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार ने आरोपियों का पक्ष रखा। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद इन दोनों को दोषी पाया।
इस मामले में एक तीसरा आरोपी भी शामिल था, लेकिन घटना के समय वह नाबालिग था। इस कारण उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष चल रहा है और उसका ट्रायल अलग से किया जा रहा है। कोर्ट के इस फैसले ने इलाके में कड़ा संदेश दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वालों को कानून बख्शने वाला नहीं है।
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