संयुक्त राष्ट्र में बोले एस जयशंकर: युद्ध की मार पूरी दुनिया झेल रही, आतंकवाद को लेकर पड़ोसी देश को दो टूक

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में वैश्विक संघर्षों पर चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध के दूरगामी परिणाम उन देशों को भी भुगतने पड़ते हैं जो इसका हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने समुद्री व्यापार पर हमलों और आतंकवाद को पनाह देने वाली सोच पर भी सख्त रुख अपनाया।

वैश्विक अस्थिरता पर भारत की चिंता

न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष केवल संबंधित क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके नकारात्मक प्रभाव उन दूरदराज के देशों पर भी पड़ रहे हैं जो सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल नहीं हैं। एस. जयशंकर के अनुसार, ये युद्ध वैश्विक सुरक्षा को गंभीर रूप से कमजोर कर रहे हैं और विकास की गति में बड़ी बाधा बन रहे हैं।

व्यापारिक जहाजों पर हमले और नाविकों की सुरक्षा

विदेश मंत्री ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और वहां तैनात नाविकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर खींचा कि जिन लोगों पर इन संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, उनकी आवाज अक्सर अनसुनी कर दी जाती है। एस. जयशंकर ने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे संयम का परिचय दें, तनाव को कम करें और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने की अपील भी की।

शांति स्थापना के संकल्प की विफलता

अपने संबोधन में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के मूल उद्देश्यों को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि जब यह संस्था अपने नौवें दशक में प्रवेश कर रही है, तब भी हम दुनिया भर में टकराव और संघर्षों को ही देख रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य सामूहिक कार्रवाई के जरिए वैश्विक शांति और सुरक्षा को बनाए रखना था, लेकिन आज की वास्तविकता इससे काफी दूर है। एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आज की परस्पर जुड़ी हुई वैश्वीकृत दुनिया में किसी भी युद्ध का असर पूरी मानवता और प्रगति पर पड़ता है, जिससे विकास के रास्ते बंद हो रहे हैं।

आतंकवाद पर पड़ोसी मुल्क को चेतावनी

पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हाल ही में आतंकवाद को संरक्षण देने वाले एक देश ने महासभा के सामने तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा है। एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने या इसके बचाव में दिए गए तर्क कहीं भी टिकने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के पास अपने बचाव का पूरा अधिकार है और इस अधिकार का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद और सद्भावना कभी एक साथ नहीं चल सकते। ऐसी मानसिकता के साथ किए गए समझौतों पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है और अब यह पूरी तरह से आतंकवाद फैलाने वाले देश पर निर्भर है कि वह अपनी नीतियों और हरकतों में सुधार करे।

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