पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में बीजेपी कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या, आपसी गुटीय संघर्ष में गई जान

पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर ग्रामीण इलाके में पार्टी के दो गुटों के बीच हुए हिंसक टकराव में एक 32 वर्षीय बीजेपी कार्यकर्ता शमशेर बिस्वास की मौत हो गई है।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और आपसी टकराव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला राज्य के मेदिनीपुर जिले से सामने आया है, जहां आपसी हिंसक झड़प के बाद एक 32 वर्षीय बीजेपी कार्यकर्ता की जान चली गई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल बना हुआ है। मृत बीजेपी कार्यकर्ता की पहचान शमशेर बिस्वास के रूप में हुई है।

शनिवार सुबह हुई वारदात

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी हिंसक घटना शनिवार सुबह मेदिनीपुर ग्रामीण इलाके के हाथीहालकर में घटित हुई। विवाद के दौरान शमशेर पर जानलेवा हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। उन्हें तुरंत घटनास्थल से रेस्क्यू करके मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद शमशेर बिस्वास को मृत घोषित कर दिया।

पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच आपसी झगड़ा

स्थानीय सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक, इस हत्या के पीछे बीजेपी के ही दो गुटों के बीच चल रहा अंदरूनी विवाद बताया जा रहा है। असल में यह विवाद पार्टी के पुराने सदस्यों और नए शामिल हुए सदस्यों के बीच वर्चस्व को लेकर था। इसी झड़प के दौरान शमशेर और उनके साथ मौजूद कुछ अन्य लोगों पर विरोधी गुट के लोगों ने अचानक हमला बोल दिया, जो शमशेर के लिए जानलेवा साबित हुआ।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला बीजेपी अध्यक्ष सौमेन तिवारी ने कहा है कि असल में वहां क्या घटना हुई थी और किस वजह से यह झड़प हुई, इसकी पूरी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस घटना को लेकर पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। दूसरी तरफ, स्थानीय पुलिस का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

न्यूटाउन में भी हुई थी ऐसी ही वारदात

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रंजिश और कार्यकर्ताओं पर हमले की यह कोई पहली वारदात नहीं है। इससे पहले इसी साल मई महीने में भी राज्य के न्यूटाउन इलाके में एक बीजेपी कार्यकर्ता को घेरकर मौत के घाट उतार दिया गया था। उस घटना के शिकार हुए कार्यकर्ता का नाम मधु मंडल था।

घटनाक्रम के मुताबिक, चुनाव परिणामों में बीजेपी की जीत मिलने के बाद मधु मंडल अपने घर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर पार्टी का झंडा लगा रहे थे। उसी दौरान वहां झंडा लगाने को लेकर ही टीएमसी कार्यकर्ता कमल के साथ उनका तीखा विवाद हो गया था। हालांकि, शुरुआत में दोनों के बीच हुई बहसबाजी के बाद मामला शांत हो गया था और वे वहां से चले गए थे।

पत्थरबाजी का शिकार हुए थे मधु मंडल

इसके बाद मधु मंडल को फोन करके दोबारा उसी विवादित स्थान पर बुलाया गया था। आरोप है कि जब वह वहां पहुंचे, तो टीएमसी से जुड़े कुछ स्थानीय बदमाशों ने मधु मंडल को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर अंधाधुंध पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थरों की चोट से वे बुरी तरह लहूलुहान हो गए।

उन्हें अत्यंत गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इस हिंसक वारदात के बाद इलाके का माहौल बेहद अशांत हो गया था और स्थानीय निवासियों व पड़ोसियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस बल के साथ CRPF की टीम को तैनात किया गया था, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया था।

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