आकाशवाणी छतरपुर: आधी सदी की ऐतिहासिक यात्रा
मध्य प्रदेश का छतरपुर आकाशवाणी केंद्र बीते 7 अगस्त 2026 को अपनी स्थापना के 50 साल पूरे कर चुका है। पिछले पांच दशकों से यह केंद्र बुंदेलखंड की भाषा, संस्कृति और लोक विधाओं को संरक्षण प्रदान करने के साथ ही उन्हें वैश्विक मंच तक पहुंचाने में जुटा है। यहां से निकले अनेक कलाकारों ने न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस केंद्र की नींव रखने की प्रक्रिया 16 मई 1970 को शुरू हुई थी, जब तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री इंदर कुमार गुजराल ने इसका शिलान्यास किया था। करीब 6 वर्षों के निर्माण कार्य के बाद, 7 अगस्त 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामचरण शुक्ल और केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल की उपस्थिति में इसे विधिवत रूप से समर्पित किया गया था।
13 जिलों तक फैला है प्रसारण का दायरा
छतरपुर आकाशवाणी केंद्र के कार्यक्रम प्रमुख नरेंद्र प्रजापति के अनुसार, यह केंद्र एक प्राइमरी चैनल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है। इसकी पहुंच अत्यंत व्यापक है और यह कुल 13 जिलों के श्रोताओं तक अपनी आवाज पहुंचाता है। इस कवरेज क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के 7 जिले—ललितपुर, झांसी, महोबा, जालौन, हमीरपुर और चित्रकूट शामिल हैं। वहीं, मध्य प्रदेश के 6 जिले—निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह और सागर भी इसके प्रसारण दायरे में आते हैं।
प्राइमरी केंद्र और तकनीक का अंतर
नरेंद्र प्रजापति ने स्पष्ट किया कि छतरपुर आकाशवाणी एक प्राइमरी केंद्र है, जो कि एम्पलीट्यूड मॉड्यूलेशन पर काम करता है। इसकी प्रसारण क्षमता लगभग 150 से 200 किलोमीटर की त्रिज्या तक होती है। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी के केंद्रों का वर्गीकरण अलग-अलग तरह से होता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और छतरपुर प्राइमरी केंद्र हैं, जबकि सागर, गुना और झांसी जैसे केंद्र एलआरएस यानी एफएम की श्रेणी में आते हैं। एफएम केंद्रों की रेंज आमतौर पर 50 किलोमीटर तक ही सीमित रहती है।
लोक संस्कृति और कला को बढ़ावा
छतरपुर आकाशवाणी केवल सूचनाओं का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बुंदेली अस्मिता का प्रतीक है। यहां बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक के लिए विविध कार्यक्रमों का संचालन होता है। इसमें कविता-कहानी, भक्ति-संगीत और बुंदेली लोकगीत प्रमुख हैं। विशेष रूप से बुंदेली ग्रामसभा, बुंदेली सुगंध, बुंदेली लोकधारा, और बुंदेली लोकरंग जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बुंदेली भाषा और लोक-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना है। युवाओं के लिए 'युगवाणी' जैसे कार्यक्रम विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं।
प्रतिभाओं की नर्सरी: पद्मश्री से राष्ट्रपति सम्मान तक
इस केंद्र की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसने गांव और कस्बों के आम कलाकारों को मंच देकर उन्हें खास बना दिया है। इस आकाशवाणी से जुड़ने वाले कलाकारों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। इनमें हरपालपुर के निवासी कवि और साहित्यकार अवध किशोर जड़िया शामिल हैं, जिन्हें पद्मश्री से नवाजा गया है। सागर के दिवंगत रामसहाय पांडे भी पद्मश्री से सम्मानित हुए हैं। इसके अलावा, ए-ग्रेड कलाकार और बुंदेली लोकगीत गायिका उर्मिला पांडे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया गया है। साथ ही छतरपुर के अधिवक्ता संजय शर्मा ने भी राष्ट्रपति से सम्मान प्राप्त किया है। देश भर में प्रसिद्ध उद्घोषक अभिराम पाठक और यूट्यूब पर लोकप्रिय अनामिका जैन का सफर भी यहीं से शुरू हुआ है। बुंदेली लोकगीत गायिका कविता शर्मा जैसी तमाम हस्तियां इस केंद्र के मंच की शोभा बढ़ा चुकी हैं।
डिजिटल युग में आकाशवाणी का विस्तार
बीते 50 वर्षों में छतरपुर आकाशवाणी ने खुद को आधुनिक तकनीक के साथ पूरी तरह से ढाल लिया है। आज के समय में यह केंद्र केवल रेडियो तक सीमित नहीं है। अब श्रोता और दर्शक इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी सुन और देख सकते हैं। नरेंद्र प्रजापति ने बताया कि अब आकाशवाणी के कार्यक्रमों का आनंद 'न्यूज ऑन एयर' मोबाइल ऐप पर लाइव लिया जा सकता है। इसके अलावा 'वेव्स' एप्लीकेशन के माध्यम से भी डिजिटल शिफ्ट का लाभ उठाया जा सकता है। यह तकनीकी बदलाव सुनिश्चित करता है कि बुंदेली संस्कृति की गूंज आने वाले समय में भी पूरी दुनिया तक पहुंचती रहे।
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