मुंबई में रहने वाली बेटी ने पाकिस्तान में ढूंढ निकाला पिता का पुश्तैनी घर, दशकों पुरानी तलाश हुई पूरी

मुंबई की रहने वाली रेहाना बीबी ने दशकों की कड़ी मशक्कत और सोशल मीडिया की मदद से पाकिस्तान के स्वात में अपने पिता के पैतृक घर और बिछड़े रिश्तेदारों को खोज निकाला है।

विभाजन की लकीर और अपनों से दूरी

साल 1947 का बंटवारा इतिहास के पन्नों में एक ऐसी त्रासदी के रूप में दर्ज है, जिसने न केवल भूगोल को बदला बल्कि लाखों परिवारों को अपनों से हमेशा के लिए दूर कर दिया। इस विभाजन ने सरहद के दोनों तरफ बसे लोगों की जिंदगी में एक खालीपन छोड़ दिया, जिसे भरने की कोशिशें आज भी जारी हैं। कुछ ऐसा ही अनुभव मुंबई में रहने वाली रेहाना बीबी के साथ भी रहा, जिन्होंने अपने पिता के खोए हुए अतीत को तलाशने का बीड़ा उठाया। उनके पिता दशकों पहले पाकिस्तान से भारत आए थे और मुंबई को ही अपना घर बना लिया था, लेकिन उनके दिल में अपने मूल स्थान की यादें हमेशा जिंदा थीं।

स्वात तक पहुंची मुंबई की तलाश

मुंबई में बसी रेहाना बीबी की यह खोज एक लंबी यात्रा की तरह रही, जो आखिरकार पाकिस्तान के स्वात जिले तक जाकर थमी। पाकिस्‍तानी मीडिया आउटलेट द न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रेहाना अपने पिता शैबर लाला के परिवार को खोजने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थीं। सोशल मीडिया पर उन्होंने अपने पिता की जड़ों के बारे में जानकारी साझा की और मदद की गुहार लगाई। उनकी यह अपील रंग लाई और स्वात के बहा गांव में रहने वाले लोगों तक पहुंची। ग्रामीणों ने पुष्टि की है कि रेहाना के पिता शैबर लाला वास्तव में बहा गांव से ही ताल्लुक रखते थे।

पिता की यादें और जड़ों की पहचान

रेहाना ने बताया कि उनके पिता शैबर लाला पश्तून समुदाय से थे और पाकिस्तान के गठन से काफी समय पहले ही वह मुंबई आ गए थे। पिता अक्सर अपनी स्मृतियों में अपने गांव बोर का जिक्र किया करते थे। परिवार की जानकारी के अनुसार, वे यूसुफजई जनजाति से संबंधित थे। रेहाना के पास अपने दादा का नाम मोहम्मद अली और दादी का नाम खान टोली होने की जानकारी थी। रेहाना ने यह भी साझा किया कि उनके दादा मोहम्मद अली ने कुल तीन शादियां की थीं और उनके पिता शैबर लाला दूसरी पत्नी की संतान थे। इन्हीं कुछ चुनिंदा जानकारियों के सहारे रेहाना ने अपने पूरे खानदान की तलाश शुरू की थी।

बिछड़े रिश्तेदारों से हुई ऑनलाइन मुलाकात

सोशल मीडिया पर वायरल हुई रेहाना की पोस्ट के बाद बहा गांव के स्थानीय निवासियों ने उनसे संपर्क साधा। जांच करने पर पता चला कि शैबर लाला का संबंध बहा गांव की यूसुफजई जनजाति की सिनाखेल शाखा से था। परिजनों ने बताया कि शैबर लाला के भाई आमिर खान, दौलत खान और दिलावर खान का देहांत हो चुका है, लेकिन उनकी अगली पीढ़ी यानी उनके बच्चे और वंशज अभी भी बहा में ही रह रहे हैं। यह जानकारी मिलते ही रेहाना की बरसों की मेहनत सफल हो गई।

पाकिस्तान आने का मिला न्योता

रेहाना की इस भावुक खोज ने केवल उनके और उनके रिश्तेदारों के बीच की दूरी को ही नहीं मिटाया, बल्कि उन्हें फिर से जोड़ने का रास्ता भी साफ किया है। परिवार के सदस्यों, जिनमें बख्त नवाज और बशीर खान जैसे लोग शामिल हैं, ने रेहाना को उनके पुश्तैनी गांव बहा आने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। रिश्तेदारों का कहना है कि इतने दशकों के बाद परिवार के किसी सदस्य का वापस आना उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं होगा। उन्होंने रेहाना को भरोसा दिलाया है कि यदि वह पाकिस्तान आती हैं, तो उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया जाएगा। यह मिलन न केवल एक परिवार के लिए बल्कि बंटवारे की त्रासदी को झेलने वाले हर उस व्यक्ति के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो आज भी अपनी जड़ों से जुड़ना चाहता है।

https://hindi.news18.com/world/pakistan-mumbai-resident-rehana-bibi-traces-father-family-in-swat-pakistan-extended-relatives-still-exist-10863312.html