गर्भावस्था में पास की UPSC परीक्षा, बनीं देश की पहली शादीशुदा महिला IPS; जानें 'लेडी सिंघम' मंजिल सैनी की कहानी

गर्भावस्था के चुनौतीपूर्ण दिनों में पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IPS बनने वाली मंजिल सैनी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। मुरादाबाद में किडनी रैकेट का भंडाफोड़ करने से लेकर लखनऊ की पहली महिला SSP बनने तक, जानें उनके जीवन के उतार-चढ़ाव।

जब जीवन में सबसे कठिन परीक्षाएं सामने आती हैं, तो कुछ लोग हिम्मत हार जाते हैं, जबकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इतिहास रचने का हौसला रखते हैं। अक्सर लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों, शारीरिक समस्याओं या कठिन परिस्थितियों का हवाला देकर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के इतिहास में एक ऐसा नाम भी दर्ज है जिसने इन सभी बाधाओं को पार कर एक नई मिसाल पेश की। यह कहानी है देश की पहली शादीशुदा महिला IPS अधिकारी मंजिल सैनी की, जिन्होंने अपनी गर्भावस्था के सबसे नाजुक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण समय में देश की सबसे कठिन परीक्षा यानी UPSC को न केवल पास किया, बल्कि पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहराया।

'लेडी सिंघम' के नाम से मशहूर मंजिल सैनी की गिनती भारत की सबसे जांबाज और निडर महिला पुलिस अधिकारियों में होती है। उनके नाम से ही बड़े से बड़े अपराधी भी थर-थर कांपते हैं। दिल्ली की गलियों से शुरू होकर देश के सबसे संवेदनशील और बड़े जिलों की कानून-व्यवस्था को संभालने तक का उनका सफर हर उस इंसान के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है, जो मुश्किल हालातों के आगे घुटने टेक देता है। मंजिल सैनी का यह सफर केवल एक पुलिस अधिकारी बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी अटूट इच्छाशक्ति, जांबाजी और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी गाथा है जो आज के युवाओं को प्रेरित करती है।

दिल्ली से शुरू हुआ सफर: शिक्षा और कॉर्पोरेट करियर

मंजिल सैनी के असाधारण व्यक्तित्व और उनकी प्रतिभा की झलक उनके बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। उनका जन्म साल 1975 में देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था। वह बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बेहद होशियार थीं और हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन करती थीं। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के अत्यंत प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने फिजिक्स में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया।

इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए देश के जाने-माने संस्थान 'दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' का रुख किया। वहां उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि अपने बेहतरीन और शानदार शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए उन्हें गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मंजिल सैनी ने एक कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी शुरू की। उन्होंने लगभग 3 साल तक इस कॉर्पोरेट कंपनी में अपनी सेवाएं दीं।

इसी दौरान उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात अपने एक सहपाठी से हुई थी, जो बाद में उनके जीवनसाथी बने। दोनों ने प्रेम विवाह किया। शादी के बाद और कॉर्पोरेट जगत में एक सफल करियर होने के बावजूद, मंजिल के मन में देश की सेवा करने का एक नया सपना आकार ले रहा था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।

गर्भावस्था के नाजुक दौर में क्रैक की UPSC परीक्षा

साल 2005 मंजिल सैनी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ। इस साल वह गर्भवती थीं। यह एक ऐसा समय होता है जब महिलाओं का शरीर कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरता है। अत्यधिक थकान, कमजोरी और एक नए जीवन को दुनिया में लाने की जिम्मेदारी के बीच अधिकांश महिलाएं आराम करने और खुद का ख्याल रखने को प्राथमिकता देती हैं। लेकिन मंजिल सैनी ने इस चुनौतीपूर्ण दौर को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।

उन्होंने अपनी गर्भावस्था के दौरान ही UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पूरी लगन और मेहनत के साथ की। उनकी इस कड़ी मेहनत का नतीजा यह निकला कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को पास करके इतिहास रच दिया। वह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने वाली देश की पहली विवाहित महिला अधिकारी बनीं।

इस ऐतिहासिक सफलता के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया। उन्होंने अपनी पुलिस ट्रेनिंग पूरी की और उनकी पहली पोस्टिंग मुरादाबाद जिले में बतौर असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के पद पर हुई। यहीं से उनके प्रशासनिक और पुलिसिंग करियर की वास्तविक शुरुआत हुई, जहां उन्होंने अपनी कार्यशैली से जल्द ही अपनी एक अलग पहचान बना ली।

'लेडी सिंघम' का उदय: मुरादाबाद में खतरनाक किडनी रैकेट का भंडाफोड़

मंजिल सैनी को पुलिस महकमे और जनता के बीच 'लेडी सिंघम' का नाम उनकी जांबाजी और सख्त फैसलों की वजह से मिला। उनके करियर की सबसे बड़ी शुरुआती सफलताओं में से एक साल 2008 में सामने आई, जब वह मुरादाबाद में तैनात थीं। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश और गुरुग्राम की बेल्ट में सक्रिय एक बेहद खतरनाक और अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया।

यह कोई साधारण अपराध नहीं था, बल्कि इसके तार बहुत गहरे और दूर-दूर तक फैले हुए थे। इस रैकेट के संचालक गरीब, बेसहारा और लाचार मजदूरों को नौकरी दिलाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद उन मजदूरों को नशे के इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया जाता था और उनकी मर्जी के बिना उनके शरीर से किडनी निकाल ली जाती थी। इन किडनियों को अमीर मरीजों और विदेशी नागरिकों को बहुत मोटी रकम में बेचा जाता था।

मंजिल सैनी ने इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ते हुए इसका सनसनीखेज भंडाफोड़ किया। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे देश के पुलिस विभाग में उनकी बहादुरी की चर्चा होने लगी और उन्हें सम्मान से 'लेडी सिंघम' कहा जाने लगा। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील और कानून-व्यवस्था के लिहाज से चुनौतीपूर्ण जिलों जैसे मुजफ्फरनगर, मथुरा, बदायूं और इटावा में बतौर जिला प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दीं और वहां अपनी सख्त प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया।

लखनऊ की पहली महिला SSP और वीरता पदक का सम्मान

मंजिल सैनी के करियर में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर तब आया जब मई 2016 में उन्हें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) नियुक्त किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में यह पहली बार हुआ था जब लखनऊ जैसी वीआईपी, अति-सुरक्षित और बेहद संवेदनशील जगह की कमान किसी महिला पुलिस अधिकारी को सौंपी गई थी। इस पद पर रहते हुए उन्होंने शहर की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई कड़े कदम उठाए।

उनके अदम्य साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें साल 2024 में 'राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक' से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान साल 2017 में मेरठ में हुए एक बेहद खतरनाक एनकाउंटर के लिए दिया गया था। इस एनकाउंटर के दौरान मंजिल सैनी और उनकी टीम ने सूझबूझ और बहादुरी का परिचय देते हुए अपहृत डॉक्टर श्रीकांत को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सुरक्षित छुड़ाया था। इस सम्मान को हासिल करने वाली वह उत्तर प्रदेश कैडर की दूसरी महिला IPS अधिकारी बनीं।

करियर का सबसे बड़ा विवाद: श्रवण साहू हत्याकांड और प्रशासनिक चूक

हर बड़े अधिकारी के करियर में चुनौतियों के साथ-साथ कुछ ऐसे कठिन मोड़ भी आते हैं जो उनकी प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा लेते हैं। मंजिल सैनी के शानदार करियर में भी एक ऐसा ही चुनौतीपूर्ण मोड़ आया। फरवरी 2017 में, जब वह लखनऊ की SSP के रूप में कार्यरत थीं, तब शहर के एक बुजुर्ग व्यापारी श्रवण साहू की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

श्रवण साहू अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। वह इस मामले के इकलौते और सबसे मुख्य गवाह थे। अपनी जान को लगातार खतरा देखते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग की थी और गनर्स देने की गुहार लगाई थी। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें आवश्यक सुरक्षा नहीं मिल सकी, जिसका फायदा उठाकर अपराधियों ने उनकी हत्या कर दी।

इस घटना ने लखनऊ पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इस बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण माहौल में मंजिल सैनी ने एक सच्चे और ईमानदार अधिकारी का परिचय दिया। उन्होंने मीडिया के सामने आकर सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि श्रवण साहू को सुरक्षा न मिल पाना पुलिस प्रशासन की एक बहुत बड़ी विफलता थी।

बाद में इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। CBI ने अपनी जांच में इस बात की पुष्टि की कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हुई थी और इसके लिए मंजिल सैनी को जिम्मेदार ठहराया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई। एक तरफ जहां देश की रक्षा और अपराधियों के सफाए के लिए वीरता का पदक जीतना उनकी बहादुरी को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक विफलता की जिम्मेदारी खुद आगे आकर स्वीकार करना उनकी ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को प्रदर्शित करता है। यही गुण मंजिल सैनी को एक असाधारण और बेहद सम्मानित प्रशासनिक अधिकारी बनाते हैं।

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