अभिनय की दुनिया में तीन दशक का सफर
बॉलीवुड की बहुमुखी अभिनेत्री दिव्या दत्ता का आज यानी 25 सितंबर को जन्मदिन है। अपनी कलाकारी और दमदार संवाद अदायगी के लिए मशहूर दिव्या दत्ता ने न केवल हिंदी सिनेमा में, बल्कि पंजाबी, मलयालम और अंग्रेजी फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिछले तीन दशकों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहीं दिव्या ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी उनका जलवा बरकरार है और हाल ही में 'चिरइया' में उनके अभिनय को दर्शकों का काफी प्यार मिला है। हालांकि, चमक-धमक वाली इस फिल्मी दुनिया तक पहुंचने का उनका रास्ता बिल्कुल भी आसान नहीं था।
लुधियाना से मुंबई तक का संघर्ष
दिव्या दत्ता का जन्म 25 सितंबर 1977 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। उनके परिवार का बैकग्राउंड अभिनय से नहीं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा था। उनकी मां डॉ. नलिनी दत्ता एक डॉक्टर और सरकारी अधिकारी थीं। दिव्या के जीवन का सबसे कठिन दौर उनके बचपन में ही आया, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। पिता के साये के बिना दिव्या और उनके भाई की परवरिश उनकी मां ने अकेले ही की। दिव्या ने अपनी शुरुआती शिक्षा लुधियाना के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की और बाद में मनोविज्ञान यानी साइकोलॉजी में डिग्री हासिल की। बचपन से ही उन्हें अभिनय और नृत्य का गहरा शौक था और वह सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की बहुत बड़ी प्रशंसक रही हैं।
फिल्मों में शानदार शुरुआत और पहचान
दिव्या दत्ता ने साल 1994 में फिल्म 'इश्क में जीना इश्क में मरना' के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा था। फिल्मी गलियारों में अपनी जगह बनाने के लिए उन्होंने बेहद कड़ा संघर्ष किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी एक ऐसी पहचान बनाई जिसे केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं रखा जा सकता था। 'वीर-जारा' और 'बागबान' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों और आलोचकों का दिल जीत लिया। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने साबित किया कि वह किसी भी तरह के किरदार में पूरी तरह से ढलने में सक्षम हैं। अपने अब तक के लंबे करियर में उन्होंने 60 से ज्यादा फिल्मों में अपने अभिनय का प्रदर्शन किया है।
कई यादगार फिल्मों में निभाया दमदार रोल
दिव्या दत्ता की चुनिंदा फिल्मों की सूची काफी लंबी है। उन्होंने अपनी अदाकारी से जिन फिल्मों में जान फूंकी, उनमें 'भाग मिल्खा भाग', 'दिल्ली-6', 'वेलकम टू सज्जनपुर', 'बदलापुर', 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह', 'इरादा' और 'स्टैनली का डब्बा' प्रमुख हैं। फिल्म 'इरादा' में उनकी भूमिका को बहुत सराहा गया, जिसके चलते उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण है।
अभिनय से इतर लेखिका के तौर पर भी पहचान
दिव्या दत्ता केवल अभिनय की मोहताज नहीं हैं, बल्कि वह एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। उन्होंने अपने अनुभवों को कलमबद्ध करते हुए पहली किताब 'मी एंड मां' लिखी थी, जो उनकी दिवंगत मां को समर्पित थी। इसके बाद उन्होंने 'द स्टार्स इन माय स्काई' नाम से एक और पुस्तक लिखी। अपनी निजी जिंदगी को लेकर दिव्या का दृष्टिकोण काफी स्पष्ट है। उन्होंने अभी तक विवाह नहीं किया है। उनका मानना है कि खुशी से जीवन जीने के लिए शादी करना कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। वह अपनी जिंदगी और अपने करियर को अपनी शर्तों पर जीने में विश्वास रखती हैं। आज दिव्या दत्ता उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार हैं, जिन्होंने ग्लैमर के बजाय अपनी मजबूत अभिनय क्षमता के दम पर सिनेमा जगत में एक प्रतिष्ठित स्थान हासिल किया है। टीवी हो, फिल्में हों या फिर ओटीटी, उनका सफर आज भी उसी ऊर्जा के साथ जारी है।
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