शारदीय नवरात्रि: इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा, जानें इसका देश-दुनिया पर क्या होगा असर और कैसे तय होती है माता की सवारी

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जहां मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आगमन करेंगी। देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य से जानिए कि देवी भागवत पुराण के नियमों के तहत माता की सवारी का चयन कैसे होता है और इसके क्या संकेत हैं।

सनातन धर्म में मां दुर्गा की उपासना का महापर्व नवरात्रि बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। वर्ष में कुल चार बार नवरात्रि का आयोजन होता है, जिसमें दो गुप्त नवरात्रि, एक चैत्र नवरात्रि और एक शारदीय नवरात्रि शामिल हैं। इन सभी में शारदीय नवरात्रि का स्थान अत्यंत विशेष माना जाता है। इस पावन अवसर पर देश के कोने-कोने में कलश स्थापना के साथ देवी के नौ स्वरूपों की आराधना शुरू हो जाती है। भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर माता रानी से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है।

शारदीय नवरात्रि के प्रारंभ होने के साथ ही इस बार देवी के आगमन की सवारी को लेकर भी श्रद्धालुओं और ज्योतिषविदों के बीच व्यापक चर्चा हो रही है। मान्यता है कि माता रानी जिस वाहन पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर पधारती हैं, उससे आने वाले समय के शुभ और अशुभ प्रभाव तय होते हैं।

ज्योतिषाचार्य से जानिए मां दुर्गा के वाहन की महिमा

झारखंड के देवघर के विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन का वाहन केवल एक प्रतीकात्मक परंपरा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध ज्योतिष और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। माता का वाहन इस बात पर निर्भर करता है कि नवरात्रि का पहला दिन सप्ताह के किस वार को पड़ रहा है।

पंडिट नंद किशोर मुदगल ने बताया कि इस विषय में देवी भागवत पुराण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण श्लोक का वर्णन मिलता है, जिसके जरिए सदियों से माता की सवारी का आकलन किया जाता रहा है। यह श्लोक इस प्रकार है:

“शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥”

इस श्लोक के अनुसार, मां दुर्गा के आगमन के लिए मुख्य रूप से चार वाहनों का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है, जिनमें हाथी, घोड़ा, नौका और पालकी शामिल हैं।

सप्ताह के दिनों से कैसे तय होती है माता की सवारी?

देवी भागवत पुराण के नियमों के मुताबिक, सप्ताह के अलग-अलग दिनों के आधार पर माता रानी की सवारी का निर्धारण कुछ इस प्रकार किया जाता है:

  • यदि नवरात्रि का शुभारंभ रविवार या सोमवार को हो रहा हो, तो माता रानी का वाहन हाथी (गज) होता है।
  • यदि नवरात्रि का पहला दिन शनिवार या मंगलवार हो, तो देवी मां घोड़े (तुरंग) पर सवार होकर पधारती हैं।
  • यदि यह पर्व बृहस्पतिवार या शुक्रवार से शुरू हो, तो मां दुर्गा पालकी (दोला) में बैठकर आती हैं।
  • यदि नवरात्रि का आरंभ बुधवार के दिन हो, तो देवी का वाहन नौका (नाव) होता है।

इस बार हाथी पर आगमन के क्या हैं संकेत?

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर को होने जा रही है। देवी भागवत पुराण के शास्त्रीय नियमों के अनुसार, इस बार मां जगदंबा हाथी पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर पधार रही हैं। धार्मिक मान्यताओं में हाथी को बेहद मंगलकारी, अत्यंत शुभ और वैभव का प्रतीक माना गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल बताते हैं कि हाथी पर माता का आगमन राष्ट्र और समाज के लिए सुखद संकेत लेकर आता है। हाथी को स्थिरता, सामर्थ्य और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। जब मां दुर्गा इस वाहन पर सवार होकर आती हैं, तो देश में धन-धान्य की प्रचुरता होती है। किसानों की फसलें अच्छी होती हैं, चारों ओर खुशहाली का माहौल बनता है और लोगों के जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है। इसे व्यापार और समृद्धि के दृष्टिकोण से भी एक अत्यंत अनुकूल समय माना जाता है।

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