किचन में इस्तेमाल होने वाले ये तेल सेहत के लिए हो सकते हैं घातक, दिल और दिमाग पर पड़ता है सीधा असर

खाना पकाने में उपयोग होने वाले रिफाइंड तेल और वनस्पति घी आपकी सेहत के लिए कितने हानिकारक हो सकते हैं, इस पर आयुर्वेदिक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है। जानिए कौन से तेल आपके अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं और इनका बेहतर विकल्प क्या है।

रसोई में मौजूद ये तेल बना सकते हैं आपको बीमार

आमतौर पर हम अपनी सेहत को लेकर चिंतित रहते हैं और शराब, चीनी या पैकेटबंद प्रोसेस्ड भोजन से परहेज करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी उस तेल पर ध्यान दिया है जिसमें आप रोजाना खाना पकाते हैं? आयुर्वेदिक डॉक्टर सलीम ज़ैदी के अनुसार, रिफाइंड ऑयल और वनस्पति घी का नियमित इस्तेमाल न केवल आपके दिल, बल्कि लिवर और मस्तिष्क के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। यह जानना बहुत जरूरी है कि कौन से तेल आपकी सेहत बिगाड़ रहे हैं और उनकी जगह आप किस तरह के तेल का चुनाव कर सकते हैं।

किन तेलों से दूरी बनाना है जरूरी

डॉक्टर सलीम ज़ैदी का स्पष्ट मानना है कि कुछ विशेष प्रकार के तेलों का उपयोग करने से बचना ही समझदारी है। इसमें प्रमुख रूप से सनफ्लॉवर ऑयल, सोयाबीन ऑयल, राइस ब्रेन ऑयल और कैनोला ऑयल शामिल हैं। इसके अलावा वनस्पति घी का उपयोग करना भी सेहत के लिए कतई उचित नहीं है। अक्सर इन तेलों के पैकेट पर 'हार्ट हेल्दी' जैसे दावे लिखे होते हैं, लेकिन डॉक्टर का कहना है कि किसी भी तेल की गुणवत्ता केवल उसके विज्ञापन पर नहीं, बल्कि उसकी प्रोसेसिंग और फैटी एसिड प्रोफ़ाइल पर निर्भर करती है।

रिफाइंड ऑयल की प्रोसेसिंग का सच

रिफाइंड तेल तैयार करने की प्रक्रिया बेहद जटिल और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह होती है। इन तेलों को बनाने के लिए बीजों को दो सौ डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है। इतनी अधिक गर्मी और रासायनिक प्रोसेसिंग के दौरान तेल के प्राकृतिक गुणों में गंभीर बदलाव आ जाते हैं। इस प्रक्रिया में तेल के सभी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और उसमें ऐसे तत्व पैदा हो जाते हैं जो शरीर में इन्फ्लेमेशन को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सूजन आगे चलकर हार्ट डिजीज, डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।

वनस्पति घी और ट्रांस फैट का खतरा

अगर आप खाना पकाने के लिए वनस्पति घी या डालडा का उपयोग करते हैं, तो आपको विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यह रिफाइंड तेल से भी कहीं अधिक हानिकारक है क्योंकि इसमें ट्रांस फैट की मात्रा अत्यधिक होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक, ट्रांस फैट का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए सिगरेट पीने जितना ही घातक हो सकता है। यह धमनियों को ब्लॉक करने के साथ-साथ हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण भी बन सकता है।

सुरक्षित विकल्प का चुनाव

डॉक्टर सलीम ज़ैदी सलाह देते हैं कि सेहत को दुरुस्त रखने के लिए आपको पारंपरिक तरीकों की ओर वापस लौटना चाहिए। खाना पकाने के लिए हमेशा शुद्ध देसी घी या फिर कच्ची घानी सरसों के तेल का ही उपयोग करना चाहिए। यदि आप अपने खानपान में केवल तेल के चुनाव को बदल देते हैं, तो यह छोटा सा बदलाव आपके दिल, लिवर और मस्तिष्क को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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