गणेश उत्सव की धूम: ऋषिकेश की गलियों में बिखरी भक्ति की अनूठी छटा और आस्था का सैलाब

ऋषिकेश में गणेश चतुर्थी से लेकर विसर्जन तक का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय बना हुआ है, जहां रंग-बिरंगी रोशनी और पंडालों में उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ एक अलग ही ऊर्जा का संचार कर रही है।

ऋषिकेश में गणेश उत्सव का भव्य माहौल

देवभूमि उत्तराखंड के ऋषिकेश में इन दिनों गणेश उत्सव की रौनक देखते ही बनती है। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व के साथ ही शहर के विभिन्न बाजारों और मोहल्लों का दृश्य पूरी तरह से बदल गया है। जैसे-जैसे शाम ढलती है, पूरा शहर रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी और मनमोहक सजावट से जगमगा उठता है। सड़कों के किनारे सजे भव्य पंडाल और उनमें स्थापित गणपति बप्पा की आकर्षक प्रतिमाएं राहगीरों और श्रद्धालुओं का सहज ही मन मोह रही हैं। यह उत्सव न केवल धार्मिक आयोजन बनकर रह गया है, बल्कि लोगों के लिए सामाजिक मिलन का एक बड़ा माध्यम भी बन गया है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और आरती का दृश्य

शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित पंडालों में सुबह और शाम की आरती का विशेष महत्व है। शाम के समय जब घंटियों की गूंज और भजनों का स्वर सुनाई देता है, तो पूरा वातावरण भक्ति के रंग में सराबोर हो जाता है। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहर से आए पर्यटक और श्रद्धालु भी गणपति के दर्शन के लिए इन पंडालों का रुख कर रहे हैं। इन जगहों पर केवल पूजा ही नहीं होती, बल्कि आसपास फूल, पूजा सामग्री और प्रसाद की दुकानें भी सज गई हैं, जो पूरे माहौल को एक मेले जैसा स्वरूप प्रदान कर रही हैं। पंडालों में कहीं फूलों का शानदार उपयोग किया गया है, तो कहीं लाइटिंग के जरिए अद्भुत कलाकृतियां बनाई गई हैं, जो हर उम्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।

स्थानीय लोगों का उत्साह और अनुभव

इस आयोजन को लेकर स्थानीय निवासियों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय निवासी शमशेर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गणेश उत्सव के दौरान ऋषिकेश का नजारा हर साल निराला होता है। उन्होंने कहा कि इन दिनों शाम होते ही पूरा परिवार घर से बाहर निकलता है और पंडालों में जाकर बप्पा के दर्शन करता है। विशेषकर बच्चों में गणपति की प्रतिमाओं को देखने और पंडालों की साज-सज्जा को निहारने को लेकर एक विशेष प्रकार का उत्साह बना रहता है। बाजार में चहल-पहल इतनी बढ़ जाती है कि हर ओर त्यौहार जैसी रौनक का अहसास होता है। आरती के दौरान आसपास के लोग एकजुट होकर भक्ति गीतों में लीन हो जाते हैं, जिससे मोहल्लों में भाईचारा और आपसी प्रेम बढ़ता है।

बच्चों और बड़ों के लिए विशेष महत्व

एक अन्य स्थानीय निवासी कमल का मानना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा वक्त निकालकर एक साथ आने का यह सबसे बेहतरीन अवसर है। कमल ने बताया कि शाम की आरती में मोहल्ले के लोगों का इकट्ठा होना आपसी संबंधों को और मजबूत बनाता है। छोटे बच्चों के लिए यह उत्सव केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े आयोजन का हिस्सा बनने का गौरव भी प्रदान करता है। पंडालों में होने वाले विभिन्न कार्यक्रम और आरती की प्रक्रिया बच्चों में संस्कार और धर्म के प्रति रुचि जगाने का काम कर रही है। लोगों का कहना है कि सामूहिक पूजा से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि सामाजिक जुड़ाव भी बेहतर होता है।

विसर्जन के दिन का इंतजार

गणेश उत्सव के अंतिम चरण यानी विसर्जन के दिन ऋषिकेश की सड़कों का नजारा और भी भव्य होने वाला है। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर गणपति को विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं। विसर्जन के दिन शहर की गलियां गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गुंजायमान हो उठेंगी। लोग गाते-बजाते और नाचते हुए बप्पा को अगले साल आने का वादा लेकर विदा करेंगे। पूरे उत्सव के दौरान जहां पंडाल और आरती लोगों को आस्था के धागे में बांधते हैं, वहीं विसर्जन का दिन विदाई के भाव के साथ-साथ एक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो हर किसी के मन में एक अमिट छाप छोड़ जाता है।

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