राजस्थान के तपते रेगिस्तान से औली की बर्फीली पहाड़ियों तक: भारत-अमेरिकी सेना के युद्धाभ्यास में M777 हॉवित्जर तोपों ने बरपाया कहर, पलक झपकते ही तबाह हुए दुश्मन के ठिकाने

भारत और अमेरिका के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास के 22वें संस्करण में M777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों ने राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सीधी फायरिंग कर अपने सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।

रेगिस्तान की तपती गर्मी और धूल के गुबार के बीच भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों ने अपनी मारक क्षमता का ऐसा प्रदर्शन किया है जिसे देखकर दुश्मन थर्रा उठे। राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान M777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों ने अपनी भयंकर गर्जना से आसमान गुंजा दिया। इस अभ्यास में इन तोपों ने डायरेक्ट फायरिंग मोड का इस्तेमाल करते हुए सामने दिख रहे सभी लक्ष्यों को पलक झपकते ही पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया। यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच गहरे तालमेल और आधुनिक युद्ध कौशल की एक बेजोड़ मिसाल बनकर उभरा है।

सैन्य पराक्रम और अचूक मारक क्षमता का प्रदर्शन

भारतीय सेना ने इस युद्धाभ्यास के जरिए एक बार फिर अपने मूल मंत्र 'हर पल सतर्क, हर समय तैयार' को साबित किया है। सेना वर्तमान में 'जय से विजय' के मिशन पर आगे बढ़ रही है। सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में तैनात M777 तोप की टुकड़ियों ने अपने लक्ष्यों पर बेहद सटीक निशाना लगाया। तोप से निकले गोलों ने सीधे और सटीक प्रहार से निर्धारित सभी लक्ष्यों को सफलता के साथ मटियामेट कर दिया।

इस गोलाबारी के दौरान दोनों देशों के सैन्य बलों ने अपनी उच्च स्तर की पेशेवर दक्षता, अचूक सटीकता और किसी भी युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहने की क्षमता का शानदार परिचय दिया। फायरिंग का यह दौर समाप्त होने के बाद, अमेरिकी सेना के प्रतिनिधिमंडल ने उन रणनीतिक स्थानों का दौरा किया जहां M777 तोपें तैनात की गई थीं। अमेरिकी सैनिकों ने वहां तैनात भारतीय तोपखाना टुकड़ी के अधिकारियों और जांबाज जवानों से मुलाकात की और उनके साथ काफी देर तक बातचीत की।

'शूट एंड स्कूट' रणनीति और सैन्य कौशल का आदान-प्रदान

इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच युद्ध के अनुभवों और सर्वोत्तम सैन्य प्रक्रियाओं को साझा करना है। यह युद्धाभ्यास सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करने का एक बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है। इसके जरिए दोनों देश न केवल अपनी सैन्य ताकत और सामरिक क्षमताओं को परख रहे हैं, बल्कि एक-दूसरे के अनुभवों से सीख भी ले रहे हैं।

यह महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास 16 सितंबर को राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में शुरू हुआ था। फायरिंग का मुख्य प्रदर्शन शुरू होने से पहले, सेनाओं ने M777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों के संचालन, रखरखाव और त्वरित तैनाती से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को बारीकी से समझा था। इसके लिए बकायदा व्याख्यान आयोजित किए गए और लाइव प्रदर्शन के जरिए तोप की तैनाती की पूरी प्रक्रिया को समझाया गया।

इस दौरान सैनिकों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण कौशलों की ट्रेनिंग दी गई और अभ्यास कराया गया:

  • सैन्य कर्मियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारियां: युद्ध के दौरान प्रत्येक सैनिक की भूमिका और उसकी जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से तय करना।
  • त्वरित तोप तैनाती प्रक्रिया: अत्यंत कम समय में तोप को मोर्चे पर तैनात करने की बारीकियां।
  • स्थानीय रक्षा का समन्वय: अपनी तोप टुकड़ी को दुश्मन के हमलों से सुरक्षित रखने की रणनीतियां।
  • जवाबी कार्रवाई से बचाव: दुश्मन की तरफ से होने वाली गोलाबारी की स्थिति में अपनी तोपों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की कला।

अभ्यास के दौरान सबसे अधिक ध्यान 'शूट एंड स्कूट' यानी गोला दागो और भागो की रणनीति पर दिया गया। इस खास प्रक्रिया में तोपची निर्धारित लक्ष्य पर तेजी से हमला करते हैं और दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से पहले अपनी तोप को वहां से हटाकर दूसरी सुरक्षित जगह पर ले जाते हैं। इस अभ्यास ने भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यशैली को गहराई से समझने और अपनी सैन्य रणनीतियों को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर दिया है।

औली की बर्फ से लेकर महाजन के तपते धोरों तक फैला अभ्यास

भारत और अमेरिका के बीच चल रहे इस संयुक्त युद्धाभ्यास का यह 22वां संस्करण है। इस बार का यह सैन्य अभ्यास अपनी भौगोलिक विविधताओं के कारण बेहद खास माना जा रहा है। एक तरफ जहां उत्तराखंड के अत्यधिक ठंडे और बर्फीले पहाड़ी इलाके औली में सेनाएं खुद को तैयार कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के बेहद गर्म और रेतीले महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी यह अभ्यास समानांतर रूप से चल रहा है।

इस युद्धाभ्यास के मुख्य आंकड़े और महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं:

  • इस युद्धाभ्यास में भारत और अमेरिका, दोनों देशों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं, यानी कुल मिलाकर 1200 से अधिक सैनिक अभ्यास में शामिल हैं।
  • पहाड़ी क्षेत्रों और मरुस्थलीय क्षेत्रों में एक साथ अभ्यास करके दोनों सेनाएं हर तरह के मौसम और दुर्गम रास्तों पर मुकाबला करने की तैयारी कर रही हैं।
  • इस अभ्यास में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आधुनिक और उन्नत तकनीकों का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रखने और सटीक टोह लेने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है।

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा यह अभ्यास इस बात का प्रमाण है कि भारत और अमेरिका की सेनाएं आधुनिक युग के किसी भी युद्ध का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। विषम परिस्थितियों में आधुनिक हथियार प्रणालियों के इस प्रदर्शन ने दोनों देशों के सैन्य सहयोग को एक नए और मजबूत स्तर पर पहुंचा दिया है।

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