फटी एड़ियों और पैरों में पानी लगने की समस्या से हैं परेशान? आजमाएं बिना खर्च वाले ये पारंपरिक घरेलू नुस्खे

पैरों की उंगलियों के बीच त्वचा गलने और एड़ियों के फटने की दर्दनाक समस्या से राहत पाने के लिए बीना देवी ने कुछ बेहद आसान और पारंपरिक घरेलू उपाय साझा किए हैं।

ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, अक्सर लोगों को पैरों से जुड़ी एक आम लेकिन बेहद दर्दनाक समस्या का सामना करना पड़ता है। खेतों में काम करने वाले किसान, घरों में साफ-सफाई करने वाली महिलाएं और कीचड़ या पानी में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के पैरों में अक्सर पानी लग जाता है। इसके अलावा पैरों की एड़ियां फटने लगती हैं, जिसे ग्रामीण इलाकों में बीमाय भी कहा जाता है। एड़ियों में होने वाली ये दरारें कभी-कभी इतनी गहरी और गंभीर हो जाती हैं कि इनमें तेज दर्द होने लगता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए बाजार की महंगी दवाइयों की जगह कुछ ऐसे पारंपरिक और घरेलू नुस्खे अपनाए जा सकते हैं जिनमें एक भी पैसा खर्च नहीं होता।

क्यों होती है पैरों में पानी लगने और फटने की समस्या?

आमतौर पर जब पैर बहुत देर तक पानी, कीचड़ या नमी के संपर्क में रहते हैं, तो पैरों की उंगलियों के बीच की नाजुक त्वचा गलने लगती है। इस स्थिति को बोलचाल की भाषा में पानी लगना कहते हैं। इसमें असहनीय खुजली, जलन और तेज दर्द होता है। इसी तरह, पैरों की त्वचा रूखी होने के कारण एड़ियां फटने लगती हैं। घरेलू कामकाज करने वाली महिलाएं और खेतों में काम करने वाले किसान इस परेशानी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

बीना देवी के बताए बेहद असरदार घरेलू नुस्खे

इस समस्या से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के राहत पाने के लिए बीना देवी ने कुछ बेहद पुराने और आजमाए हुए घरेलू उपाय साझा किए हैं। ये तरीके हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में सदियों से अपनाए जा रहे हैं और आज भी उतने ही प्रभावी हैं। आइए जानते हैं इन आसान और प्राकृतिक उपायों के बारे में:

  • मेहंदी के पत्तों का लेप: अगर आप ग्रामीण या अर्ध-शहरी क्षेत्र में रहते हैं, तो आपको आसानी से मेहंदी के पत्ते मिल जाएंगे। मेहंदी के ताजे पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और इसे प्रभावित जगह या फटी एड़ियों पर लगाएं। मेहंदी में प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाले और त्वचा को ठीक करने वाले गुण होते हैं, जिससे दर्द और जलन में तुरंत आराम मिलता है।
  • तुलसी की पत्तियां: तुलसी को आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना गया है। तुलसी की पत्तियों को पीसकर उसका लेप पैरों की उंगलियों के बीच लगाने से पानी लगने की समस्या तेजी से ठीक होती है। इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण संक्रमण को बढ़ने से रोकते हैं।
  • सरसों का तेल: सरसों का शुद्ध तेल लगभग हर भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाता है। रात को सोने से पहले पैरों को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर सरसों का तेल लगाने से त्वचा का रूखापन खत्म होता है और दरारें धीरे-धीरे भरने लगती हैं।
  • होली का रंग: यह एक बहुत ही अनोखा और पारंपरिक उपाय है। होली के त्योहार में इस्तेमाल होने वाले रंग को पानी में घोलकर पैरों के प्रभावित हिस्सों पर लगाया जाता है। पुराने समय से ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस नुस्खे का इस्तेमाल पैरों की जलन और सड़न को रोकने के लिए करते आ रहे हैं।
  • महावर या आलता का प्रयोग: पैरों के खुरदरेपन, दरारों और पानी लगने की समस्या का सबसे आसान और सुलभ उपाय महावर है, जिसे आलता भी कहा जाता है। आलता अमूमन हर घर में आसानी से मिल जाता है। महिलाएं इसे पैरों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाती हैं, लेकिन यह फटी त्वचा को भरने और संक्रमण को ठीक करने में भी बेहद मददगार साबित होता है।

पारंपरिक नुस्खे आज भी हैं बेहद लोकप्रिय

आज के समय में बाजार में फटी एड़ियों और पैरों के संक्रमण को ठीक करने के लिए तमाम तरह की क्रीम और दवाइयां उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, ये घरेलू और प्राकृतिक उपाय आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय हैं। लोग इन बिना खर्च वाले घरेलू नुस्खों पर ज्यादा भरोसा करते हैं क्योंकि इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और ये चीजें घर पर ही बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।

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