जर्सी के लिए छलक पड़े थे वैभव सूर्यवंशी के आंसू, फिर चंदन अंकल ने पूरी की 6 साल के बच्चे की ख्वाहिश

समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी का भारतीय टीम में चयन हुआ है। महज छह साल की उम्र में जर्सी पहनने की उनकी जिद और भावुक किस्सा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है।

भारतीय क्रिकेट टीम में चयन के बाद इन दिनों समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी का नाम पूरे देश में गूंज रहा है। उनकी बल्लेबाजी, रिकॉर्ड और कामयाबियों को लेकर हर कोई जिज्ञासु है। लेकिन इस चमकती सफलता के पीछे एक ऐसा भावुक प्रसंग भी छिपा हुआ है, जिसे जानकर लोग उनके संघर्ष को और गहराई से समझ पाते हैं। आज जब वे टीम इंडिया की जर्सी पहनने की दहलीज पर खड़े हैं, तब लोगों के मन में यह कौतूहल भी है कि आखिर उन्होंने पहली बार क्रिकेट की जर्सी कब पहनी थी। इसका जवाब उनकी जिंदगी के एक बेहद संवेदनशील पल से जुड़ा है।

छह साल की उम्र में जागी जर्सी की चाहत

वर्ष 2017 में 4 से 11 मार्च तक आयोजित प्रमंडल स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान वैभव पहली बार बड़े स्तर पर क्रिकेट के माहौल से रूबरू हुए थे। उस वक्त उनकी उम्र केवल छह वर्ष थी। मैदान पर अलग-अलग टीमों के खिलाड़ियों को रंग-बिरंगी जर्सी में देखकर उनके भीतर भी वैसी ही जर्सी पहनने की तमन्ना जाग उठी। बताया जाता है कि दूसरे खिलाड़ियों को जर्सी में खेलते देख नन्हे वैभव भावुक हो उठे, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और वे रोने लगे। बाल मन को लगा कि काश उनके पास भी ऐसी ही जर्सी होती, जिसमें वे खुद को एक खिलाड़ी की तरह महसूस कर पाते।

चंदन अंकल ने समझा बच्चे का सपना

वैभव को रोता देख क्रिकेटर और पत्रकार चंदन ने उनकी भावना को भांप लिया। उन्होंने बच्चे का हाथ थामा और पास की एक खेल सामग्री की दुकान पर ले गए, जहां से उनके लिए क्रिकेट जर्सी खरीदी गई। हालांकि जर्सी की कीमत वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी ने अदा की थी, लेकिन उस दिन चंदन शांडिल्य ने जिस तरह एक बच्चे के सपने को सहारा दिया, वह पल लोगों को आज भी याद है। कहा जाता है कि जिन आंखों में उस रोज जर्सी के लिए आंसू थे, उन्हीं आंखों में आगे चलकर देश के लिए खेलने का सपना भी पल रहा था। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह नन्हा बच्चा एक दिन भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बनेगा।

बचपन से ही क्रिकेट के प्रति समर्पण

स्थानीय लोगों के मुताबिक वैभव शुरुआत से ही क्रिकेट को लेकर बेहद समर्पित रहे। मैदान पर घंटों अभ्यास करना, बड़े खिलाड़ियों को ध्यान से देखना और उनसे सीखने की कोशिश करना उनकी आदत में शुमार हो गया था। धीरे-धीरे यही लगन उनकी पहचान बन गई। जिला स्तर से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और आज उनकी मेहनत का नतीजा पूरे देश के सामने है।

अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर परीक्षा

वैभव सूर्यवंशी के सामने अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की नई चुनौती है। 9 जून से श्रीलंका में होने वाले इंडिया ए टीम के कार्यक्रम में वे अपनी काबिलियत दिखाएंगे। इसके बाद आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भी उनके नाम की चर्चा है। 26 और 28 जून 2026 को होने वाले टी-20 मुकाबलों में क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें खास तौर पर वैभव पर टिकी रहेंगी। समस्तीपुर से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले इस युवा खिलाड़ी से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।

सपनों और संघर्ष की कहानी

वैभव सूर्यवंशी की कहानी केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सपनों, संघर्ष और भरोसे की कहानी है। छह साल की उम्र में जर्सी के लिए बहाए गए आंसू आज करोड़ों भारतीयों के चेहरे पर मुस्कान बनकर लौट रहे हैं। वह पहली जर्सी महज एक कपड़ा नहीं थी, बल्कि उस सपने की शुरुआत थी जिसने एक छोटे से बच्चे को भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मंच तक पहुंचा दिया। आज जब वैभव टीम इंडिया की जर्सी के करीब हैं, तब उनकी यह यात्रा हर उस बच्चे को प्रेरणा देती है जो छोटे शहर से बड़े सपने देखने का हौसला रखता है।

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