अमेरिकी डॉलर को मात देने की चीन की योजना को झटका, 'mBridge' पेमेंट सिस्टम से पीछे हटा सऊदी अरब

चीन द्वारा अमेरिकी डॉलर के दबदबे को चुनौती देने और अपनी निर्भरता घटाने के लिए तैयार किए गए 'mBridge' पेमेंट सिस्टम से सऊदी अरब ने अलग होने का फैसला कर लिया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की चीन की महत्वाकांक्षी योजना को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। चीन ने डॉलर पर अपनी वैश्विक निर्भरता को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक नया विकल्प खड़ा करने के लिए एक विशेष भुगतान प्रणाली तैयार की थी, जिसे mBridge नाम दिया गया था। इस हाई-टेक पेमेंट सिस्टम में खाड़ी का प्रमुख देश सऊदी अरब भी चीनी खेमे के साथ खड़ा दिखाई दे रहा था। लेकिन अब सऊदी अरब ने इस पूरे प्रोजेक्ट से अचानक पीछे हटने का फैसला कर लिया है।

सऊदी अरब के इस बड़े कदम को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिकी यात्रा से ठीक पहले चीन के लिए एक तगड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले के जरिए सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह स्पष्ट संकेत देने का प्रयास किया है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी इस आर्थिक और रणनीतिक महायुद्ध में वह किस तरफ खड़ा होना चाहता है।

क्या है mBridge पेमेंट सिस्टम और चीन का मकसद?

चीन ने अमेरिकी डॉलर के दबदबे को तोड़ने के लिए एक पूरी रणनीति के तहत इस नए भुगतान तंत्र का निर्माण किया था। mBridge एक ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित सीमा पार (क्रॉस-बॉर्डर) भुगतान प्रणाली है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सीधे डिजिटल करेंसी के जरिए लेनदेन को संभव बनाना है।

इस सिस्टम की मुख्य खूबियां निम्नलिखित हैं:

  • यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेनदेन की लागत को काफी कम कर देता है।
  • यह पारंपरिक व्यवस्था के मुकाबले कहीं अधिक तेज गति से भुगतान प्रक्रिया को पूरा करता है।
  • यह वर्तमान में लागू अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली SWIFT के एक मजबूत और स्वतंत्र विकल्प के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया था।

सऊदी अरब के बाहर जाने से चीन की योजना प्रभावित

शुरुआती दौर में इस बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में चीन के साथ कुल पांच भागीदार देश और क्षेत्र शामिल थे। इनमें चीन के अलावा हांगकांग, यूएई, थाईलैंड और सऊदी अरब शामिल थे। सऊदी अरब जैसे बड़े तेल निर्यातक और आर्थिक महाशक्ति का इस गठबंधन से बाहर निकलना चीन की डॉलर-विरोधी मुहिम के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक विफलता माना जा रहा है। हालांकि, सऊदी अरब के हटने के बाद भी इस पेमेंट सिस्टम का काम रुका नहीं है और प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहा है।

अब कौन से देश हैं इस प्रोजेक्ट का हिस्सा?

सऊदी अरब के इस पेमेंट नेटवर्क से अलग होने की घोषणा के बाद भी इस समूह में अब 4 अन्य भागीदार देश और क्षेत्र बचे हुए हैं, जिनमें प्रोजेक्ट पर काम अभी भी जारी है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बने रहने वाले देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • चीन (मुख्य प्रमोटर और विकासकर्ता)
  • हांगकांग
  • यूएई
  • थाईलैंड

हालांकि इन देशों के साथ यह परियोजना अभी भी आगे बढ़ रही है, लेकिन सऊदी अरब के बिना इस चीनी भुगतान प्रणाली का वह वैश्विक प्रभाव और वजन हासिल करना बेहद मुश्किल होगा, जिसकी योजना चीन ने शुरू में बनाई थी।

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