गाजियाबाद का 60 साल पुराना स्वाद: 75 पैसे से शुरू हुआ सफर आज भी बरकरार, हाथरस चाट भंडार की टिक्की के लोग हैं दीवाने

गाजियाबाद के चौपला मंदिर के पास स्थित हाथरस चाट भंडार छह दशकों से अपने विशेष स्वाद के लिए मशहूर है, जहां आज भी बड़ी संख्या में ग्राहक टिक्की का आनंद लेने आते हैं।

छह दशक का लंबा सफर

गाजियाबाद के व्यस्त बाजारों में चाट की अनगिनत दुकानें मौजूद हैं, लेकिन शहर के चौपला मंदिर के नजदीक स्थित हाथरस चाट भंडार की बात ही कुछ और है। पिछले 60 वर्षों से यह दुकान न केवल अपने इलाके में, बल्कि पूरे शहर में अपने कुरकुरे स्वाद के लिए जानी जाती है। वक्त की रफ्तार के साथ बहुत कुछ बदल गया है, महंगाई बढ़ी है और चाट के दाम भी बदल गए हैं, लेकिन इस दुकान की लोकप्रियता और स्वाद की गुणवत्ता आज भी वैसी ही है जैसे दशकों पहले हुआ करती थी।

75 पैसे से 60 रुपये तक का बदलाव

इस दुकान के मालिक वेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि इस प्रतिष्ठान की नींव उनके पिता ने छह दशक पहले रखी थी। उस दौर में खाने-पीने की चीजों के दाम काफी कम हुआ करते थे, और उस समय एक पत्ता चाट महज 75 पैसे से लेकर 1.25 रुपये तक में मिल जाता था। समय के साथ अर्थव्यवस्था बदली और लागत बढ़ी, जिसका असर कीमतों पर भी पड़ा। आज के समय में वही टिक्की 60 रुपये प्रति पत्ता और 40 रुपये की सिंगल प्लेट के रूप में ग्राहकों को परोसी जाती है। कीमतों में आया यह बदलाव दुकान की पुरानी यादों और ग्राहकों के प्रति समर्पण को नहीं मिटा पाया है।

खास तैयारी और चटपटा स्वाद

इस दुकान की टिक्की का सबसे खास हिस्सा इसे बनाने का तरीका है। टिक्की को तैयार करने के लिए अरारोट का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसमें एक विशेष कुरकुराहट आती है जो इसे अन्य दुकानों से अलग करती है। जब तवे पर सिक रही गर्मागर्म टिक्की को प्लेट में निकाला जाता है, तो उस पर गाढ़ा दही, घर की बनी मीठी सोंठ और ताजी धनिया की चटनी डाली जाती है। ऊपर से छिड़का गया चाट मसाला और मसालों की खुशबू इसे देखते ही मुंह में पानी लाने वाला बना देती है। दही की ठंडक और सोंठ की मिठास का मेल ही इस चाट का असली चटकारा है जो लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है।

हाथरस से गाजियाबाद तक की विरासत

वेश कुमार गुप्ता मूल रूप से हाथरस के रहने वाले हैं। वह याद करते हुए बताते हैं कि उनके पिता जब गाजियाबाद में अपना काम शुरू कर रहे थे, तब वह खुद काफी कम उम्र के थे। पिता के साथ रहकर ही उन्होंने चाट बनाने की बारीकियां सीखीं और समय के साथ इस पूरी जिम्मेदारी को अपने कंधों पर ले लिया। यह दुकान उनके लिए केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह परिवार की उन पीढ़ियों की मेहनत का प्रतीक है जिन्होंने स्वाद को ही अपनी पहचान बना लिया है।

दूर-दूर से आते हैं ग्राहक

दुकान की साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां आने वाले ग्राहकों में केवल स्थानीय लोग ही शामिल नहीं हैं। गाजियाबाद के विभिन्न इलाकों से लोग खास तौर पर टिक्की का लुत्फ उठाने के लिए यहां पहुंचते हैं। कई नियमित ग्राहक ऐसे हैं जो सालों से इस दुकान पर आ रहे हैं और उनके लिए गाजियाबाद के बाजार आने का मतलब ही हाथरस चाट भंडार की टिक्की खाना बन गया है। आज भी यहां ग्राहकों की भारी भीड़ इस बात का सबूत है कि शुद्धता और स्वाद का मेल हमेशा बना रहता है।

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