न‍िठारी कांड: सुरेंद्र कोली की मौत के बाद D-5 कोठी का अनसुलझा रहस्य, सिम कार्ड और कोली को लाने का सच

सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के साथ ही निठारी कांड के पुराने राज फिर से सुर्खियों में हैं। मोनिंदर सिंह पंढेर के दावों ने कोली के नोएडा आने और सिम कार्ड के विवाद पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुरेंद्र कोली की मौत और D-5 कोठी की वापसी

हरिद्वार में सुरेंद्र कोली के निधन ने नोएडा के कुख्यात निठारी कांड की यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है। करीब दो दशक तक चले कानूनी संघर्ष के बाद, यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस प्रकरण में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली मुख्य आरोपी थे, हालांकि लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद दोनों को विभिन्न मामलों में कानूनी राहत मिल चुकी थी। नवंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने कोली के खिलाफ लंबित अंतिम दोषसिद्धि को भी खारिज कर दिया था। अब जब कोली जीवित नहीं है, तो कोठी नंबर D-5 से जुड़े पुराने सवाल फिर से बहस का मुद्दा बन गए हैं।

कोली को नोएडा कौन लाया था

कोली की मौत के बाद सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर मोनिंदर सिंह पंढेर का एक पुराना साक्षात्कार प्रसारित हो रहा है। इस साक्षात्कार में पंढेर ने उस घटनाक्रम का विवरण दिया था कि आखिर कोली उनके नोएडा स्थित आवास तक कैसे पहुंचा। पंढेर के बयानों के अनुसार, सुरेंद्र कोली उनके अपने गांव का ही निवासी था। पंढेर ने स्पष्ट किया था कि उसे नोएडा बुलाने के लिए उन्होंने बाकायदा एक टैक्सी की व्यवस्था की थी, जिसके जरिए कोली को गांव से लाया गया था।

सिम कार्ड का अनसुलझा राज

इस हत्याकांड की जांच के दौरान सिम कार्ड का मुद्दा बेहद पेचीदा रहा था। साक्षात्कार में पंढेर ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि उस समय उनके घर पर एक परिचित व्यक्ति का बेटा रह रहा था, जो वहां रहकर अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। पंढेर का दावा है कि उसी युवक के नाम पर सिम कार्ड लिया गया था, जिसका इस्तेमाल कोली द्वारा किया गया। हालांकि, पंढेर ने यह नहीं बताया कि उस सिम कार्ड का वास्तविक उद्देश्य क्या था, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि जांच के दौरान सिम का यह मुद्दा मुख्य रूप से सामने आया था।

पुलिस हिरासत और पूछताछ के दावे

साक्षात्कार में जब पंढेर से यह पूछा गया कि क्या गिरफ्तारी के दौरान कोली ने उनके खिलाफ कोई बयान दिया था, तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। पंढेर का तर्क था कि इसका सही जवाब केवल कोली ही दे सकता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि सीबीआई और पुलिस की कस्टडी में उन्हें और कोली को पूरी तरह से अलग रखा गया था। पंढेर के मुताबिक, उन दोनों को एक दूसरे से बातचीत करने की कोई अनुमति नहीं थी, जिससे उनके बीच किसी प्रकार का संवाद संभव नहीं था।

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