तृणमूल कांग्रेस का बदलेगा नाम और निशान, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को सौंपे नए विकल्प

पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच मचे घमासान के कारण चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया है। ऋतब्रत बनर्जी गुट ने आयोग को अपने नए नाम सुझा दिए हैं।

तृणमूल कांग्रेस के लिए नए नाम और चिन्ह की कवायद

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ी आपसी खींचतान अब चुनाव आयोग की दहलीज तक पहुंच चुकी है। पार्टी के दो गुटों के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई के कारण चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनावों के लिए टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह दोनों को फ्रीज कर दिया है। गुरुवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि अब आगामी उपचुनावों के लिए नए नाम और चिन्ह का उपयोग करना होगा। आयोग ने ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट, दोनों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तीन नए नाम और तीन चुनाव चिन्ह के विकल्प जमा करने का निर्देश दिया था। अब खबर आ रही है कि ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने अपने प्रस्तावित विकल्पों की सूची आयोग को भेज दी है।

ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा सुझाए गए नए नाम

सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने पूरी तत्परता दिखाते हुए चुनाव आयोग की समय-सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल कर दिया है। पार्टी दफ्तर में हुई एक महत्वपूर्ण ज़ूम मीटिंग के बाद उन्होंने आयोग को अपनी पसंद के तीन चिन्ह और नाम भेजे हैं। जानकारी के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पार्टी के नए नाम के तौर पर 'नेशनलाइज्ड तृणमूल कांग्रेस' और 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' जैसे विकल्पों का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, उनके द्वारा सुझाए गए चुनाव चिन्हों की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

चुनाव आयोग की बैठक और अंतरिम आदेश

चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में यह साफ कर दिया है कि जब तक यह विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों ही गुट पार्टी के पुराने नाम और निशान का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह व्यवस्था वर्तमान में केवल उपचुनावों के लिए प्रभावी रहेगी। गुरुवार को आयोजित बैठक में आयोग की फुल बेंच के समक्ष दोनों गुटों ने अपना पक्ष रखा। सबसे पहले ऋतब्रत गुट के अरुप रॉय ने आयोग के सामने उपस्थित होकर अपने दावे से जुड़े दस्तावेज सौंपे। इसके बाद कल्याण बनर्जी के नेतृत्व में ममता बनर्जी के गुट ने भी आयोग से मुलाकात की। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में ममता गुट ने पुरजोर तरीके से दावा पेश किया कि असली तृणमूल कांग्रेस वही है।

उपचुनाव में उम्मीदवारों की टक्कर

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। इन दोनों सीटों का इतिहास देखें तो नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी और रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। अब इन सीटों पर दोनों गुटों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। नंदीग्राम विधानसभा सीट से ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट ने मोहम्मद एतेशामुल हक को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि ममता बनर्जी गुट ने संचिता प्रधान को मैदान में उतारा है। वहीं, रेजीनगर उपचुनाव के लिए ऋतब्रत गुट की ओर से सफीउद्दीन शेख और ममता गुट की ओर से रबीउल आलम चौधरी उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस राजनीतिक उठापटक के बीच अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।

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