कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि देश को अपनी दैनिक जरूरतों और सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों के कारण उत्पन्न हुए संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को बेहद सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। देश में ईंधन, बिजली और गैस की भारी किल्लत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ने कई बड़े और कड़े फैसलों की घोषणा की है, जिनका सीधा असर आम जनता से लेकर मंत्रियों और बड़े अधिकारियों की जीवनशैली पर पड़ेगा।
वैश्विक संकट और पाकिस्तान की बदहाली
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और विशेष रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र को संकट में डाल दिया है। तेल की आपूर्ति बाधित होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। पाकिस्तान खुद को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF से 8 अरब डॉलर का भारी-भरकम कर्ज लेकर अपना गुजारा कर रहा है। देश में महंगाई की दर 11 प्रतिशत से भी ऊपर निकल चुकी है, जिससे आम नागरिकों का जीना दूभर हो गया है।
ऐसी स्थिति में भी पाकिस्तान द्वारा खुद को क्षेत्र में एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में दिखाने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। मक्का पैक्ट के तहत सऊदी अरब को लड़ाकू विमानों और मिसाइलों के जरिए सुरक्षा देने के बड़े-बड़े दावे करने वाला पाकिस्तान आज खुद दाने-दाने को मोहताज है। अपनी इसी वास्तविक स्थिति को स्वीकार करते हुए सरकार ने देश में तीन महीने के लिए आपातकालीन मितव्ययिता उपायों को लागू करने की मंजूरी दे दी है।
बजट और सरकारी खर्चों में कटौती के पांच बड़े फैसले
मंत्रिमंडल की हरी झंडी मिलने के बाद सरकार ने तत्काल प्रभाव से आगामी तीन महीनों के लिए कई पाबंदियां लागू कर दी हैं। इन फैसलों के तहत सरकारी स्तर पर होने वाली फिजूलखर्ची और लग्जरी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सरकार द्वारा घोषित किए गए मुख्य पांच उपाय इस प्रकार हैं:
- सरकारी वाहनों के ईंधन में पचास प्रतिशत की कटौती: सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों को मिलने वाले ईंधन को आधा यानी 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह नियम अगले तीन महीनों तक सख्ती से लागू रहेगा।
- बजट में पांच प्रतिशत की कमी: वित्त वर्ष 2026-27 के Non-ERE बजट में सीधे 5 प्रतिशत की कटौती की गई है ताकि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके।
- नई गाड़ियों की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध: किसी भी सरकारी विभाग या अधिकारी के लिए नए वाहनों की खरीद पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
- विदेशी दौरों पर पाबंदी: अगले तीन महीनों तक सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के विदेश दौरों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यदि कोई बेहद जरूरी सरकारी यात्रा करनी भी पड़ती है, तो मंत्रियों और उच्च अधिकारियों को केवल किफायती श्रेणी में ही यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी।
- सरकारी भोज और वीआईपी आयोजनों पर रोक: सरकारी फंड से होने वाले किसी भी प्रकार के रात्रिभोज, सेमिनार, प्रशिक्षण सत्र और सम्मेलनों के आयोजन पर पाबंदी लगा दी गई है। इसके साथ ही, सामाजिक स्तर पर शादी समारोहों के लिए सिंगल डिश की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है।
बाजारों और रेस्टोरेंट के समय में बदलाव
ईंधन और बिजली की भारी बचत के लिए पाकिस्तान की सरकार ने व्यापारिक प्रतिष्ठानों के संचालन के समय में भी कड़े बदलाव किए हैं। गुरुवार, 17 सितंबर को जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, देश के सभी बाजारों को रात 9 बजे तक अनिवार्य रूप से बंद करना होगा। इसी तरह, मैरिज हॉल और विवाह स्थलों को रात 10 बजे तक और सभी रेस्टोरेंट व होटल को रात 11 बजे तक ही संचालित करने की अनुमति होगी। इस कड़े कानून से केवल दवा दुकानों, अस्पतालों और मेडिकल प्रयोगशालाओं जैसी आवश्यक सेवाओं को ही बाहर रखा गया है।
इसके अतिरिक्त, सरकारी अधिकारियों को अब भौतिक बैठकों के स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और इंटरनेट के माध्यम से वर्चुअल बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यात्रा खर्च और ईंधन की बचत की जा सके। मंत्रियों को स्पष्ट आदेश दिया गया है कि वे किसी भी तरह के भव्य भोज का आयोजन सरकारी खर्चे पर नहीं करेंगे, हालांकि विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और मेहमानों के सम्मान में आयोजित होने वाले औपचारिक रात्रिभोज को इस नियम से छूट दी गई है।
ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इस मितव्ययिता अभियान से ठीक पहले, 15 सितंबर को शहबाज शरीफ सरकार ने जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका दिया था। सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 4.10 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 6.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की थी। इस बढ़ोतरी के बाद देश में पेट्रोल की कीमत 384.34 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 415.83 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।
वैश्विक तेल बाजार में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हुए हवाई हमलों के बाद आपूर्ति को लेकर गहराए संकट ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस पाइपलाइन को हमले के बाद कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। विदेशी मुद्रा की कमी का सामना कर रहा पाकिस्तान इस वैश्विक मूल्य वृद्धि का बोझ उठाने में असमर्थ है, जिसके कारण उसे अपने घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ानी पड़ीं और अब देश को चलाने के लिए ऐसे कड़े प्रतिबंधात्मक कदम उठाने पड़ रहे हैं।
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