घर की दीवारों में सीलन और छत से पानी रिसने से हैं परेशान? अपनाएं ये प्रभावी उपाय

बारिश के बाद भी अगर आपके घर की दीवारें नम हैं और छत से पानी टपक रहा है, तो केवल पेंट करना समाधान नहीं है। सिविल इंजीनियर शुभम त्रिपाठी ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए निर्माण के दौरान और बाद में अपनाए जाने वाले महत्वपूर्ण तरीकों की जानकारी दी है।

दीवारों की सीलन और छत की लीकेज से कैसे पाएं निजात

बारिश का मौसम बीत जाने के बाद भी यदि आपके घर की दीवारों में सीलन बरकरार है या छत से लगातार पानी टपक रहा है, तो इसे केवल मौसम का असर मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। विंध्य क्षेत्र में हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद कई घरों में ऐसी परेशानियां देखी गई हैं। अक्सर लोग इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए दीवारों पर केवल नया पेंट करवा लेते हैं, लेकिन कुछ समय बाद ही सीलन फिर से उभर आती है। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो इसे केवल ऊपरी सतह से ठीक करने के बजाय इसकी मूल वजह को समझकर उपचार करना आवश्यक है।

निर्माण के समय रखें इन बातों का ध्यान

सिविल इंजीनियर शुभम त्रिपाठी के अनुसार, अक्सर घर बनाते समय निर्माण के कुछ प्रमुख चरणों में लापरवाही बरतने के कारण भविष्य में सीलन और पानी के रिसाव की स्थिति पैदा होती है। निर्माण कार्य के दौरान बिल्डर, ठेकेदार या स्वयं मकान मालिक को कुछ जरूरी नियमों का पालन करना चाहिए। DPC यानी डैम्प प्रूफ कोर्स इसका सबसे अहम हिस्सा है। घर की नींव बनाते समय जमीन से कम से कम 150 मिलीमीटर ऊपर एक ऐसी परत डाली जानी चाहिए जो जमीन की नमी को दीवारों में ऊपर चढ़ने से रोके। यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही यह प्रक्रिया सही ढंग से पूरी हो जाए, तो बाद में होने वाली कई बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।

छत की ढलाई और कंक्रीट का प्रबंधन

छत और कंक्रीट के काम के दौरान गुणवत्ता से समझौता करना भारी पड़ सकता है। छत की ढलाई करते समय प्रमाणित वॉटरप्रूफिंग लिक्विड का उपयोग करने से कंक्रीट में पानी के प्रवेश को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके अलावा, छत का ढलान इस तरह से होना चाहिए कि बारिश का पानी कहीं भी जमा न हो। पानी को आसानी से ड्रेनेज पाइप की तरफ निकल जाना चाहिए। इसके साथ ही, किचन और बाथरूम में पाइपलाइन बिछाते समय हमेशा उच्च स्तरीय सामग्री का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि पाइप में मामूली सा रिसाव भी दीवारों के भीतर नमी फैलाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

बाहरी दीवारों की मजबूती

अक्सर बारिश का पानी सीधे बाहरी दीवारों से होकर घर के भीतर पहुंच जाता है। इसलिए, बाहरी हिस्से में प्लास्टर करते समय सीमेंट के घोल में अच्छे वॉटरप्रूफिंग केमिकल का मिश्रण करना चाहिए। यह परत दीवार के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। जिन दीवारों पर बारिश की सीधी बौछार पड़ती है, वहां इस कार्य को नजरअंदाज करना बिल्कुल उचित नहीं है।

पानी के स्रोत की पहचान और उसका उपचार

यदि घर में पहले से ही सीलन आ चुकी है, तो पेंटिंग की शुरुआत करने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि आखिर पानी रिस कहां से रहा है। इसके लिए छत पर मौजूद दरारें, पुरानी पाइपलाइन, बाथरूम की फिटिंग या बाहर की दीवारों की बारीकी से जांच करें। जब तक पानी का मुख्य स्रोत बंद नहीं किया जाएगा, तब तक दीवार पर किया गया कोई भी उपचार केवल अस्थायी होगा और समस्या बार-बार सामने आती रहेगी।

दीवारों की सफाई और मरम्मत की प्रक्रिया

लीकेज के स्रोत को ठीक करने के बाद अगला चरण दीवार को सही करना है। सबसे पहले सीलन वाली जगह से पेंट, पुट्टी और उखड़े हुए प्लास्टर को पूरी तरह हटा दें। पलटे या स्क्रैपर की मदद से खराब हिस्से को निकालकर दीवार को अच्छी तरह घिसकर साफ करें। इसके बाद, किसी भरोसेमंद ब्रांड के डैम्प प्रूफ या क्रैक फिलर पेस्ट का इस्तेमाल करके सभी दरारों को पूरी तरह बंद कर दें।

वॉटरप्रूफिंग कोटिंग का सही तरीका

दीवार तैयार हो जाने के बाद, उच्च गुणवत्ता वाले वॉटरप्रूफिंग केमिकल की पहली परत को ब्रश की मदद से लगाएं। इस दौरान केमिकल और पानी का मिश्रण कंपनी के निर्देशों के अनुसार ही रखें। आमतौर पर पहला कोट लगाने के बाद उसे करीब 4 से 5 घंटे तक सूखने का समय देना चाहिए। इसके बाद, लगभग 12 से 15 घंटे का अंतर देकर दूसरा कोट लगाना बेहतर रहता है। यदि स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर है, तो विशेषज्ञ की देखरेख में दीवार के निचले हिस्से में इंजेक्शन ग्राउटिंग का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

सावधानी के लिए छोटे बदलाव

घर में नमी के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों में बदलाव जरूरी है। दिन के कुछ घंटों में खिड़कियां खोलकर रखें ताकि ताजी हवा का आवागमन बना रहे और सीलन न पनपे। जिन स्थानों पर ज्यादा नमी रहती है, वहां एग्जॉस्ट फैन लगाना काफी मददगार साबित हो सकता है। बारिश के दौरान छत पर टूटे गमले, रेत, कबाड़ या अन्य ऐसी चीजें न रखें जो पानी को सोखकर उसे एक जगह जमा रखती हैं। यह भी नियमित रूप से देखते रहें कि छत का ढलान सही है और कहीं भी पानी का ठहराव नहीं हो रहा है। इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदमों को उठाकर आप अपने आशियाने को सुरक्षित और सीलन मुक्त रख सकते हैं।

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