सर्दियों की खेती के लिए नर्सरी की तैयारी का सही समय
आने वाले कुछ ही हफ्तों में सर्दी का मौसम दस्तक देने वाला है और इसके साथ ही बाजार में ताजी हरी सब्जियों की मांग में तेजी देखने को मिलेगी। सर्दियों के दौरान टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और मिर्च जैसी सब्जियों की खेती किसानों के लिए कमाई का एक बेहतरीन जरिया साबित हो सकती है। हालांकि, अच्छी फसल और बंपर पैदावार हासिल करने के लिए किसानों को अभी से कमर कसनी होगी। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, सितंबर का महीना सब्जियों की नर्सरी लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।
नर्सरी में होने वाली सामान्य गलतियां
देवघर समेत कई क्षेत्रों के किसान सर्दियों की फसल के लिए नर्सरी तैयार करने में जुट गए हैं। लेकिन एक बड़ी समस्या यह देखी जाती है कि किसान बाजार से महंगे और अच्छी गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीज तो ले आते हैं, लेकिन नर्सरी तैयार करने की प्रक्रिया में छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं। इन गलतियों का असर पौधों की सेहत पर पड़ता है। अक्सर देखने में आता है कि कई बीज अंकुरित नहीं हो पाते, या फिर अंकुरित होने के बाद शुरुआती अवस्था में ही पौधे गलकर नष्ट हो जाते हैं। इससे न केवल किसानों के महंगे बीजों का नुकसान होता है, बल्कि बाद में मुख्य फसल की पैदावार भी काफी प्रभावित होती है।
स्वस्थ पौधे ही देते हैं बेहतर परिणाम
देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव का कहना है कि यदि किसान सब्जियों की खेती से अधिकतम मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी नर्सरी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। एक मजबूत और स्वस्थ पौधा ही आगे चलकर बेहतर फसल देने में सक्षम होता है। कई बार किसान केवल बीज खरीदने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन नर्सरी प्रबंधन की तकनीकी बारीकियों को अनदेखा कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर उनके लिए बड़े नुकसान का कारण बनती है। यदि नर्सरी में ही पौधे मजबूत तैयार किए जाएं, तो खेत में रोपाई के बाद उनकी विकास दर काफी तेज हो जाती है और फसल के बीमार होने का खतरा भी कम हो जाता है।
प्रो-ट्रे विधि के फायदे
विशेषज्ञों ने बताया कि सब्जियों की नर्सरी मुख्य रूप से दो तरीके से तैयार की जाती है। पहला तरीका है रेज्ड बेड यानी उठी हुई क्यारी में नर्सरी लगाना, जबकि दूसरा आधुनिक तरीका प्रो-ट्रे का इस्तेमाल करना है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को प्रो-ट्रे विधि अपनाने पर अधिक जोर देना चाहिए क्योंकि यह काफी फायदेमंद है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी पोर्टेबिलिटी है। इसे जरूरत के अनुसार एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि अचानक तेज बारिश हो जाए और जलभराव के कारण पौधों के खराब होने का डर हो, तो किसान इन ट्रे को आसानी से किसी सुरक्षित या छायादार स्थान पर स्थानांतरित कर सकते हैं। इससे पौधों को मौसम की मार से बचाया जा सकता है।
रोपाई में आसानी और पौधों का बेहतर विकास
पारंपरिक रेज्ड बेड विधि में एक बड़ी समस्या यह आती है कि पौधों को निकालते समय उनकी जड़ों को काफी नुकसान पहुँचता है। जब क्यारी से मिट्टी हटाकर पौधे निकाले जाते हैं, तो जड़ें टूट जाती हैं या मिट्टी से अलग होने पर पौधे को जोरदार झटका लगता है, जिससे उनकी रिकवरी में समय लगता है। वहीं, प्रो-ट्रे में तैयार किए गए पौधे मिट्टी के साथ सुरक्षित निकल आते हैं। इससे जड़ों को कोई नुकसान नहीं होता और खेत में रोपाई के बाद ये पौधे तुरंत अपनी वृद्धि की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। इसका सीधा सकारात्मक असर फसल की कुल पैदावार और उसकी गुणवत्ता पर पड़ता है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने किसानों को स्पष्ट सलाह दी है कि यदि वे सर्दियों के मौसम में अपनी सब्जियों की बिक्री से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो नींव मजबूत होनी चाहिए। एक बेहतर फसल का आधार सही ढंग से तैयार की गई नर्सरी है। इसलिए सितंबर में नर्सरी तैयार करते समय किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या लापरवाही न बरतें। यदि संभव हो तो प्रो-ट्रे विधि का ही चुनाव करें। थोड़ी सी सावधानी और सही तकनीकी जानकारी अपनाकर किसान कमजोर पौधों से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं और सर्दियों की सब्जियों की बंपर पैदावार के जरिए अच्छी कमाई का रास्ता साफ कर सकते हैं। सही तकनीक अपनाना ही सफल खेती की पहली सीढ़ी है।
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