हरतालिका तीज व्रत का पारण कब और कैसे करें? जानें सही समय, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हरतालिका तीज व्रत के पारण को लेकर महिलाएं काफी उत्सुक रहती हैं। जानिए साल 2026 में व्रत खोलने का सही समय, शुभ मुहूर्त और पारण की पूरी विधि।

हरतालिका तीज व्रत का महत्व और पारण का समय

हिंदू धर्म संस्कृति में हरतालिका तीज के व्रत को बेहद पावन और महत्वपूर्ण माना गया है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस उपवास को करती हैं। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस साल 14 सितंबर को हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जा रहा है। इस व्रत की सबसे कठिन बात यह है कि इसमें निर्जला रहा जाता है, यानी व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करती हैं। इस कठिन साधना के बाद अगले दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष पारण का शुभ मुहूर्त और सही विधि क्या है।

हरतालिका तीज व्रत पारण की तिथि और शुभ मुहूर्त

धार्मिक नियमों के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत का पारण हमेशा अगले दिन सुबह सूर्योदय के पश्चात ही किया जाता है। इस बार व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इस विशेष दिन पर सूर्योदय का समय सुबह लगभग 5 बजकर 54 मिनट पर होगा। इसलिए सभी व्रती महिलाएं इस समय के बाद ही अपना व्रत खोल सकती हैं।

पारण की संपूर्ण और सही विधि

तीज के व्रत को खोलने की एक निश्चित और शास्त्रसम्मत विधि होती है, जिसका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस विधि के तहत निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

  • व्रत पारण के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई कर लें। इसके बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इस खास अवसर पर महिलाओं को लाल, पीले या हरे रंग के शुभ और सुंदर वस्त्र ही पहनने चाहिए। वस्त्र धारण करने के बाद पूरे 16 श्रृंगार करें।
  • इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल पर जाकर प्रथम पूज्य भगवान गणेश, देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती करें।
  • पूजा के दौरान माता पार्वती को सिंदूर अवश्य अर्पित करें। इसके बाद उसी थाली में से थोड़ा सा सिंदूर लेकर अपनी मांग में लगाएं।
  • पूजा संपन्न होने के बाद, चढ़ाए गए सभी सामानों और सामग्रियों को अपने हल्के हाथों से थोड़ा सा हिला दें।
  • इसके बाद रेत या मिट्टी से बनाई गई भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाओं का आदरपूर्वक और पूरी श्रद्धा के साथ विसर्जन करें।
  • व्रत खोलने से ठीक पहले अपने घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें।
  • अंत में, पूजा में भगवान को चढ़ाए गए भोग जैसे कि काले भीगे हुए चने, गुड़ और फल खाकर अपना व्रत खोलें।

हरतालिका तीज व्रत पारण के मुख्य नियम

व्रत खोलने के दौरान कुछ खास सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक होती हैं ताकि सेहत पर कोई विपरीत असर न पड़े। इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  • चूंकि यह एक निर्जला व्रत है, इसलिए पारण के दिन एकदम से भारी, तीखा, तला-भुना या बहुत अधिक मसालेदार भोजन खाने से बचना चाहिए।
  • व्रत खोलने के तुरंत बाद सबसे पहले पानी और हल्के फलों का ही सेवन करें। इसके कुछ समय बाद ही पूरा भोजन ग्रहण करें।
  • ध्यान रखें कि हरतालिका तीज के व्रत का पारण कभी भी नमकीन या नमक वाली चीजों से नहीं करना चाहिए।
  • इस व्रत का पारण मुख्य रूप से जल, फल और भगवान को चढ़ाए गए मीठे भोग से ही करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, कई क्षेत्रों में विशेष रूप से खीरा खाकर व्रत खोलने की प्राचीन और अनूठी परंपरा भी निभाई जाती है।

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