यदि आप वीकेंड पर शहर की व्यस्त जिंदगी और भीड़भाड़ से दूर किसी रोमांचक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए आंध्र प्रदेश की बेलम गुफाएं एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 320 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह गुफा भारतीय उपमहाद्वीप की दूसरी सबसे लंबी प्राकृतिक गुफा प्रणाली है। मैदानी इलाकों की बात करें, तो इसे भारत की सबसे लंबी भूमिगत गुफा होने का गौरव प्राप्त है।
बाहर से देखने पर यह गुफा किसी सामान्य खेत के बीच बने एक गहरे कुएं की तरह दिखाई देती है, लेकिन जैसे ही आप इसकी गहराई में उतरना शुरू करते हैं, आपका सामना एक अद्भुत और अविश्वसनीय दुनिया से होता है। जमीन से तकरीबन 65 फीट नीचे उतरते ही तापमान में बदलाव महसूस होने लगता है और चारों ओर फैली प्राकृतिक कलाकृतियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। चूना पत्थर से बनी यह रहस्यमयी गुफा कुल 3.2 किलोमीटर लंबी है। पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसके लगभग डेढ़ किलोमीटर के हिस्से को आम जनता के लिए खोला गया है। लाखों वर्षों के दौरान बहते पानी और चूने के प्राकृतिक कटाव ने यहां ऐसी आकृतियां बनाई हैं, जिन्हें देखकर मानव निर्मित वास्तुकला भी फीकी नजर आने लगती है।
बेलम गुफाओं के मुख्य और अनोखे आकर्षण
गुफा के भीतर कदम-कदम पर कुदरत का करिश्मा बिखरा हुआ है। यहां के अलग-अलग हिस्सों को उनकी खास बनावट के आधार पर विशेष नाम दिए गए हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं:
- सिम्हाद्वारम: गुफा के भीतर प्रवेश करते ही सबसे पहले एक विशाल प्राकृतिक मेहराब दिखाई देता है। इसकी बनावट ऐसी है जैसे कोई शेर अपना मुंह खोलकर दहाड़ रहा हो, इसीलिए इसे सिम्हाद्वारम कहा जाता है।
- कोटिलिंगलु: इस हिस्से में पानी की बूंदों के लगातार टपकने और खनिजों के जमाव से स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट की अद्भुत आकृतियां बन गई हैं। देखने में ये आकृतियां बिल्कुल हजारों शिवलिंगों जैसी प्रतीत होती हैं, जो पर्यटकों के मन में श्रद्धा और कौतूहल दोनों जगाती हैं।
- म्यूजिकल चैंबर: यह इस गुफा का सबसे जादुई हिस्सा माना जाता है। यहां की विशेष चट्टानों पर यदि आप उंगलियों या लकड़ी के टुकड़े से बेहद हल्का सा थपथपाते हैं, तो धातु जैसी गूंज सुनाई देती है। इन चट्टानों से संगीत के सात सुरों जैसी मधुर ध्वनियां निकलती हैं, जिसे सुनना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है।
- पाताल गंगा: रोमांच की पराकाष्ठा इस गुफा के सबसे गहरे बिंदु पर जाकर पूरी होती है। जमीन से करीब 150 फीट नीचे स्थित इस स्थान को पाताल गंगा नाम दिया गया है। यहां साल के बारह महीने एक रहस्यमयी भूमिगत जलधारा बहती रहती है, जिसके स्रोत का सटीक पता आज भी एक पहेली बना हुआ है।
ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्व
बेलम गुफाएं केवल भूवैज्ञानिक आश्चर्य ही नहीं हैं, बल्कि इनका एक अत्यंत समृद्ध इतिहास भी रहा है। प्राचीन काल में यह स्थान बौद्ध और जैन भिक्षुओं की साधना स्थली हुआ करता था। गुफा के भीतर कई जगहों पर सदियों पुराने बौद्ध और जैन धर्म से जुड़े अवशेष पाए गए हैं। भिक्षुओं द्वारा ध्यान लगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ध्यान केंद्र आज भी यहां सुरक्षित हैं, जो इस अंधेरी दुनिया को एक शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
सफर का माध्यम और घूमने का सबसे सही समय
हैदराबाद से बेलम गुफाओं तक की यात्रा बेहद सुगम और मनोरंजक है। यदि आप सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय राजमार्ग NH-44 के जरिए कुरनूल होते हुए लगभग 6 से 7 घंटे में आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। रेल यात्रा पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ताड़ीपत्री है, जो गुफा से सिर्फ 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ताड़ीपत्री स्टेशन से गुफा तक के लिए स्थानीय वाहन आसानी से मिल जाते हैं।
चूंकि गुफा के भीतर उमस और गर्मी अधिक होती है, इसलिए यहां जाने के लिए मौसम का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। बेलम गुफाओं की सैर करने के लिए अक्टूबर से फरवरी के बीच का समय सबसे अनुकूल और आरामदायक माना जाता है। इस अवधि में मौसम सुहावना रहता है, जिससे भूमिगत यात्रा का आनंद दोगुना हो जाता है।
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