पुरी के सरकारी अस्पताल में बड़ी चूक
ओडिशा के पुरी स्थित जिला मुख्यालय अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब इलाज के दौरान एक महिला मरीज को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया। ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही इस महिला मरीज का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था, लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही के चलते उसे बी-पॉजिटिव ब्लड दे दिया गया। इस चूक के कारण महिला की स्थिति काफी बिगड़ गई है और उसे आनन-फानन में बेहतर इलाज के लिए भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करना पड़ा है। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और रक्त चढ़ाने की सुरक्षा प्रक्रियाओं की पोल खोल दी है।
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित महिला के परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि गलत रक्त संचार के बाद से ही मरीज की सेहत अचानक और तेजी से खराब हुई। महिला को न केवल अत्यधिक परेशानी हुई, बल्कि उसने खून की उल्टी भी की। परिवार के सदस्यों ने इस बात पर गहरा रोष जताया है कि आखिर एक ए-पॉजिटिव रक्त समूह वाली महिला को ब्लड बैंक से बी-पॉजिटिव खून कैसे जारी कर दिया गया। परिजनों ने यह भी पूछा है कि क्या रक्त चढ़ाने से पहले मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत मरीज के ब्लड ग्रुप की अनिवार्य जांच और सत्यापन नहीं किया गया था। ल्यूकेमिया के उपचार के दौरान प्रदर्शिनी प्रधान नाम की यह महिला अपना हीमोग्लोबिन स्तर बनाए रखने के लिए नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर थी।
बेटे ने बताई आपबीती
मरीज प्रदर्शिनी प्रधान के बेटे मानस प्रधान ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी मां को 7 सितंबर को ब्लड की पहली यूनिट दी गई थी, जो सही थी। इसके बाद 8 सितंबर और 9 सितंबर को भी उन्हें सुचारू रूप से ब्लड चढ़ाया गया। हालांकि, संकट तब गहराया जब 11 सितंबर को ब्लड चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान परिवार को यह पता चला कि ब्लड बैंक से उन्हें बी-पॉजिटिव रक्त दिया गया है। मानस के अनुसार, जिस समय यह गंभीर गलती हुई, वे स्वयं वहां मौजूद नहीं थे लेकिन उनके पिता वार्ड में ही थे। जब परिवार ने अस्पताल में इस गलती पर सवाल उठाए, तो उन्हें यह कहकर टालने की कोशिश की गई कि इसमें अस्पताल की नहीं बल्कि ब्लड बैंक की गलती है।
मरीज की हालत गंभीर, जांच के आदेश
गलत खून चढ़ने के तुरंत बाद मरीज की स्थिति चिंताजनक हो गई और उसे खून की उल्टियां होने लगीं। मानस प्रधान के आरोपों के मुताबिक, अस्पताल प्रशासन ने हाथ खड़े करते हुए परिवार को मरीज को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी, क्योंकि वहां उसका उपचार करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। इस पूरी घटना के बाद पीड़ित परिवार ने जिले के सीडीएमओ को मामले की लिखित सूचना दी है। परिवार की ओर से की गई शिकायत के आधार पर सीडीएमओ ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अब जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि रक्त जारी करने वाली टीम और ट्रांसफ्यूजन करने वाले कर्मचारियों से यह बड़ी भूल आखिर कैसे हुई। फिलहाल पूरा परिवार प्रदर्शिनी प्रधान की नाजुक स्थिति को लेकर भुवनेश्वर में उनके उपचार में जुटा हुआ है।
https://www.indiatv.in/india/national/odisha-puri-allegation-of-b-positive-blood-being-transfused-to-an-a-positive-female-patient-during-hospital-treatment-2026-09-12-1242732