शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले चीन का बड़ा संदेश, कहा- हम रहेंगे अच्छे पड़ोसी

ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत आगमन से ठीक पहले चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है और दोनों देशों के बीच सहयोग व आपसी सफलता की वकालत की है।

चीन की ओर से रिश्तों को लेकर नई पहल

ब्रिक्स समिट 2026 में भाग लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज शनिवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनके भारत दौरे के मद्देनजर बीजिंग की ओर से एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है। चीनी राजनयिकों के माध्यम से आए इस बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि चीन भारत के साथ एक अच्छे पड़ोसी के रूप में रहने का इच्छुक है। चीन का कहना है कि दोनों देश एक-दूसरे की सफलता के मार्ग में मददगार साबित होंगे और साझेदार बनकर भविष्य की ओर कदम बढ़ाएंगे। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत होने वाली है।

मोदी और जिनपिंग का रणनीतिक मार्गदर्शन

चीनी पक्ष ने जोर देकर कहा है कि भारत और चीन के संबंधों को नई ऊंचाई देने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में संपन्न होगा। दोनों देशों की कोशिश संबंधों को रणनीतिक स्तर पर अधिक सुदृढ़ बनाने और इसे दीर्घकालिक नजरिए से विकसित करने की है। यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब दोनों शीर्ष नेता आमने-सामने होंगे। इससे पहले रूस के कज़ान और चीन के तियानजिन में दोनों नेताओं की सफल वार्ताएं हो चुकी हैं। अब 7 साल बाद शी जिनपिंग का यह भारत दौरा वैश्विक राजनीति के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।

सहयोग और स्थिरता पर चीन का जोर

चीन ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि वह भारत के साथ संचार माध्यमों को बढ़ाने और आपसी सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है। चीनी राजदूत के मुताबिक, दोनों पक्षों की प्राथमिकता अपने मतभेदों को उचित तरीके से प्रबंधित करने और द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता बनाए रखने की होगी। चीन ने साफ संकेत दिया है कि सीमा संबंधी विवाद अपनी जगह हैं, लेकिन उन्हें द्विपक्षीय संबंधों के अन्य बड़े आयामों को प्रभावित नहीं करने देना चाहिए। दोनों देशों का लक्ष्य एक ऐसे स्थिर वातावरण का निर्माण करना है, जहाँ आर्थिक और सामरिक हितों को प्राथमिकता मिल सके।

सीमा विवाद और द्विपक्षीय तनाव का परिप्रेक्ष्य

पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत और चीन के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। विशेष रूप से सीमा पर व्याप्त तनाव और विवादों ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को चुनौतीपूर्ण बना दिया था। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में चीन की ओर से आई इस तरह की सकारात्मक बयानबाजी काफी महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि बीजिंग अब कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह संदेश संकेत देता है कि चीन अब द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से गतिरोध कम करने का इच्छुक है।

वैश्विक पटल पर भारत-चीन वार्ता का महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर केवल भारत और चीन की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। इसका बड़ा कारण दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति है। एशिया की दो प्रमुख महाशक्तियों के रूप में भारत और चीन का एक साथ आना वैश्विक स्थिरता और आर्थिक भविष्य के लिए अत्यंत मायने रखता है। व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर इन दोनों नेताओं की चर्चा का असर न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया के बाजार पर पड़ने वाला है।

क्या बदलेगी रिश्तों की नई तस्वीर

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या शी जिनपिंग के इस दौरे के बाद भारत और चीन के संबंधों की दिशा वास्तव में बदलेगी। हालांकि चीन ने सहयोग और अच्छे पड़ोसी होने की बात कही है, लेकिन इसके वास्तविक परिणाम दोनों नेताओं के बीच होने वाली जमीन स्तर की चर्चा और फैसलों पर निर्भर करेंगे। भारत की ओर से हमेशा से यह स्पष्ट किया गया है कि द्विपक्षीय मजबूती के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता का होना अनिवार्य है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों नेता इन पुरानी चुनौतियों को पार करते हुए भविष्य के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तैयार कर पाते हैं या नहीं।

https://hindi.news18.com/world/china-brics-summit-2026-china-message-ahead-of-xi-jinping-pm-modi-meet-10826976.html