गहरे संकट में फंसा नन्हा हाथी
असम के काजीरंगा में एक दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 4 से 6 हफ्ते के नन्हे हाथी को मौत के मुंह से खींच लिया गया। यह मासूम हाथी चाय बागान के इलाके में मौजूद कीचड़ से भरे एक गहरे गड्ढे में अनजाने में गिर गया था। कीचड़ इतना दलदली और गहरा था कि उसके लिए बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो गया था। नन्हे हाथी की दर्दभरी चीखों से जंगल का इलाका गूंज उठा, जिसे सुनकर उसका पूरा झुंड वहां पहुंच गया।
झुंड की नाकाम कोशिशें
हाथियों के झुंड ने अपने छोटे सदस्य को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। वे उसे बाहर खींचने के लिए हर संभव जतन करते रहे, लेकिन कीचड़ की पकड़ इतनी मजबूत थी कि हाथियों की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। काफी देर तक संघर्ष करने के बाद, जब हाथियों का पूरा झुंड पूरी तरह बेबस हो गया, तो उन्हें भारी मन से वहां से आगे बढ़ना पड़ा। उस वक्त ऐसा लग रहा था कि शायद नन्हे हाथी को बचाना अब संभव नहीं होगा, लेकिन तभी वहां के सतर्क ग्रामीणों ने एक साहसी कदम उठाया।
गांववालों की सतर्कता और रेस्क्यू का आगाज
जैसे ही झुंड वहां से हटा, चाय बागान में काम कर रहे मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए वन विभाग और वन्यजीव अधिकारियों को सूचना दी। लोगों की इसी सजगता ने इस नन्हे हाथी के लिए जीवनदान का काम किया। सूचना मिलते ही 'सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड कंजर्वेशन' (CWRC) की टीम तुरंत घटना स्थल पर पहुंच गई। वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. भास्कर चौधरी के नेतृत्व में यह ऑपरेशन शुरू किया गया। टीम ने बेहद सावधानी बरतते हुए नन्हे हाथी को दलदल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
आपातकालीन चिकित्सा और देखभाल
बाहर निकाले जाने के दौरान हाथी का बच्चा काफी थका हुआ था और डिहाइड्रेशन का शिकार हो चुका था। उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत नजदीकी बीट ऑफिस ले जाया गया। वहां वेटेरिनरी टीम ने उसे तत्काल इमरजेंसी केयर दी और शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए जरूरी तरल पदार्थ दिए गए। विशेषज्ञों की टीम लगातार उसकी सेहत पर नजर बनाए हुए थी ताकि उसे जल्द से जल्द स्थिर किया जा सके।
परिवार से मिलन की कोशिश और नया ठिकाना
रेस्क्यू के बाद फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की सबसे पहली प्राथमिकता यह थी कि इस बच्चे को वापस उसके परिवार और झुंड से मिला दिया जाए। वन अधिकारी और विशेषज्ञ दिनभर उस पूरे इलाके में तैनात रहे और हाथियों के झुंड के लौटने का इंतजार करते रहे। हालांकि, उम्मीद के मुताबिक हाथियों का झुंड वापस नहीं लौटा। जब यह स्पष्ट हो गया कि बच्चा अब झुंड से बिछड़ चुका है और उसकी सुरक्षा सबसे जरूरी है, तो अधिकारियों ने उसे सीडब्ल्यूआरसी सेंटर शिफ्ट करने का निर्णय लिया।
मंत्री ने की सराहना
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी असम के वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि अब यह छोटा सा हाथी पूरी तरह सुरक्षित है और केंद्र में अन्य हाथियों के साथ घुल-मिल रहा है। मंत्री ने स्थानीय लोगों और चाय बागान के श्रमिकों की विशेष रूप से तारीफ की, जिनकी सूझबूझ और तत्परता ने एक बेजुबान की जान बचाई। यह घटना दर्शाती है कि जब इंसान और वन्यजीव विभाग आपसी सहयोग से काम करते हैं, तो मुश्किल से मुश्किल हालात में भी जान बचाई जा सकती है। फिलहाल, यह नन्हा हाथी तेजी से रिकवरी कर रहा है और अब पूरी तरह स्वस्थ है।
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