सॉफ्टवेयर इंजीनियर से उद्यमी बनने का सफर
आज के दौर में बहुत से युवा एक स्थिर नौकरी की तलाश में रहते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो लीक से हटकर जोखिम उठाना पसंद करते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी खंडवा के रहने वाले शैलेश पटेल की है। शैलेश ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया था, लेकिन आज वह एक सफल व्यवसायी हैं। उन्होंने 8 लाख रुपये के निवेश से अपना खुद का कारोबार शुरू किया और आज वह न केवल खुद के मालिक हैं, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। उनका यह सफर साबित करता है कि सही समय पर लिया गया एक बड़ा निर्णय जीवन की पूरी दिशा बदलने की ताकत रखता है।
बिजनेस की ओर झुकाव और शुरुआत
शैलेश पटेल मूल रूप से खंडवा के पास स्थित कोरगला गांव के निवासी हैं। उन्होंने इंदौर से BE कंप्यूटर साइंस की डिग्री प्राप्त की और 2012 में पढ़ाई पूरी करने के बाद इंदौर में ही 4 वर्षों तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया। उस समय उनके मन में बिजनेस का कोई ख्याल नहीं था और वह अपनी तकनीकी नौकरी में ही आगे बढ़ना चाहते थे। हालांकि, उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उनके अंकल दिलीप पटेल ने उन्हें अपने स्वयं के काम की शुरुआत करने की सलाह दी। दिलीप पटेल पहले से ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में पावर मेन नाम से कार गैरेज और उससे संबंधित उपकरणों का कारोबार कर रहे थे। अंकल की प्रेरणा से शैलेश ने पहले छोटे स्तर पर काम का डेमो शुरू किया और ग्राहकों की बढ़ती मांग को देखकर उन्होंने पूर्णकालिक बिजनेस करने का मन बना लिया।
वर्ष 2016 से व्यावसायिक नींव
शैलेश ने अंततः अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़ दी और 2016 में लगभग 8 लाख रुपये की लागत से अपना व्यापार शुरू किया। आज उनका व्यवसाय काफी विस्तार ले चुका है। उनके गैरेज में कारों की सर्विसिंग, कार वॉश और व्हील अलाइनमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा, उनका ब्रांड पावर मेन ऑटोमोबाइल गैरेज में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की बिक्री और रिपेयरिंग के लिए भी पहचाना जाता है। उनके द्वारा बेची और रिपेयर की जाने वाली मशीनों में कंप्रेसर, हाइड्रोलिक लिफ्ट, कार वॉशर और व्हील अलाइनमेंट मशीनें शामिल हैं। आज पावर मेन एक रजिस्टर्ड ब्रांड के रूप में अपनी पहचान बना चुका है और मशीनों की सर्विसिंग का काम विभिन्न स्थानों पर फैला हुआ है।
नौकरी बनाम बिजनेस की संतुष्टि
अपने अनुभव साझा करते हुए शैलेश बताते हैं कि जब उन्होंने नौकरी छोड़ी थी, तब उन्हें भी यह अंदाजा नहीं था कि उनका बिजनेस इस स्तर तक पहुंचेगा। हालांकि, आज वह अपनी इस यात्रा से बेहद संतुष्ट हैं। वह कहते हैं कि कॉर्पोरेट नौकरी के मुकाबले अपने बिजनेस में काम करने का अनुभव और संतुष्टि बहुत अलग और अधिक है। भले ही पूरे दिन काम में व्यस्त रहना पड़ता है, लेकिन यह आत्म-संतुष्टि उन्हें प्रेरित करती है कि वह किसी और के लिए नहीं, बल्कि खुद के लिए काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह काम उनके लिए गर्व का विषय बन गया है।
सामाजिक योगदान और रोजगार
शैलेश की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत आय तक सीमित नहीं है। आज उनके द्वारा स्थापित बिजनेस से 8 से 9 परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। उन्होंने अपने साथ कई लोगों को रोजगार दिया है। वह गर्व के साथ कहते हैं कि उन्हें इस बात की सबसे अधिक खुशी है कि उनके उपक्रम से अन्य लोगों के घर भी चल रहे हैं। इसके साथ ही, वह अपने पैतृक काम यानी खेती को भी संभाले हुए हैं। जहां उनका परिवार गांव में रहता है, वहीं उनका मुख्य कार्यस्थल खंडवा का इंदौर नाका क्षेत्र है।
मार्गदर्शन का महत्व
शैलेश अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपने अंकल दिलीप पटेल को देते हैं। उनका मानना है कि यदि उस समय अंकल ने उन्हें प्रेरित नहीं किया होता, तो शायद वह आज भी एक साधारण कर्मचारी की तरह जीवन व्यतीत कर रहे होते। 2016 में लिए गए उस निर्णय ने उन्हें एक नई पहचान दी है। आज वह अपने परिवार के करीब रहकर, समाज में एक सम्मानजनक स्थान बनाकर और अन्य लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं, जो उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
युवाओं के लिए संदेश
युवाओं के नाम एक संदेश देते हुए शैलेश कहते हैं कि नौकरी करना बुरा नहीं है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति के भीतर उद्यमी बनने की क्षमता है और उसे सही अवसर मिलता है, तो उसे उस दिशा में प्रयास अवश्य करना चाहिए। वह युवाओं को सलाह देते हैं कि मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी छोटा व्यवसाय धीरे-धीरे एक बड़े साम्राज्य में बदला जा सकता है। सही योजना और निरंतरता सफलता की पहली सीढ़ी है।
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