आजकल के दौर में जब बिजली की दरें और पारंपरिक ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, तब सौर ऊर्जा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए एक बड़ा वरदान साबित हो रही है। देश के ग्रामीण इलाकों में अब लोग पारंपरिक बिजली और डीजल इंजनों पर अपनी निर्भरता को खत्म कर सोलर सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीक को अपना रहे हैं। ऐसा ही एक बेहद सफल और प्रेरणादायक उदाहरण बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से सामने आया है, जहां एक स्थानीय ग्रामीण ने अपनी सूझबूझ से न केवल बिजली के भारी-भरकम मासिक बिल से हमेशा के लिए मुक्ति पा ली है, बल्कि अपने पिसाई के व्यवसाय को भी अधिक लाभदायक बना लिया है।
हरसिद्धि प्रखंड के घोघराहा गांव की प्रेरक कहानी
यह सफलता की कहानी पूर्वी चंपारण जिले के अंतर्गत आने वाले हरसिद्धि प्रखंड के घोघराहा गांव की है। यहां रहने वाले उद्यमी अरविंद कुमार ने सौर ऊर्जा का बेहतरीन इस्तेमाल करके अपनी आटा चक्की को नया रूप दिया है। अरविंद कुमार बताते हैं कि पहले वे अपनी चक्की को बिजली की मोटर से चलाते थे। लेकिन हर महीने आने वाले बिजली के भारी-भरकम बिल के कारण उन्हें नाममात्र का मुनाफा ही मिल पाता था। दिन-रात मेहनत करने के बाद भी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बिजली बिल का भुगतान करने में ही चला जाता था, जिसके बाद उन्होंने ऊर्जा के इस वैकल्पिक और पर्यावरण-अनुकूल मार्ग को चुनने का फैसला किया।
बिजली बिल की बड़ी समस्या और सोलर का अनोखा समाधान
अपनी पिछली आर्थिक परेशानियों को याद करते हुए अरविंद कुमार बताते हैं कि जब उनकी आटा चक्की ग्रिड बिजली से चलती थी, तो हर महीने उनका बिजली का बिल लगभग 15,000 रुपये से लेकर 18,000 रुपये तक आ जाता था। इस अत्यधिक खर्च के कारण चक्की से होने वाली आय से घर का खर्च चलाना और व्यवसाय को आगे बढ़ाना बहुत कठिन हो रहा था। इस समस्या से निजात पाने के लिए उन्होंने जब से सौर ऊर्जा यानी सोलर सिस्टम को अपनाया है, तब से उनके काम की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब वे बिना किसी बिजली बिल की चिंता के पहले से कहीं अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।
सुबह से शाम तक धकाधक चलती है चक्की
सौर ऊर्जा तकनीक अपनाने के बाद अरविंद कुमार की आटा चक्की का संचालन बेहद आसान और सुचारू हो गया है। इस समय चक्की की कार्यप्रणाली कुछ इस तरह चल रही है:
- कार्य का समय: धूप की उपलब्धता के अनुसार उनकी आटा चक्की सुबह 7 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक बिना किसी रुकावट के बेहद आसानी से संचालित होती है।
- दैनिक पिसाई की क्षमता: इस समयावधि के दौरान वे हर दिन लगभग 5 से 7 क्विंटल गेहूं की पिसाई करके आटा तैयार कर लेते हैं।
- विविध सेवाएं: गेहूं की पिसाई के साथ-साथ वे अपनी इस चक्की में चावल और विभिन्न प्रकार के मसालों की पिसाई का काम भी करते हैं, जिससे उनके ग्राहकों का दायरा और आय दोनों बढ़ गए हैं।
फेसबुक से मिली जानकारी और सेटअप की कुल लागत
अरविंद कुमार को सौर ऊर्जा की मदद से इतनी बड़ी आटा चक्की चलाने की प्रेरणा सोशल मीडिया से मिली थी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के बारे में उन्हें सबसे पहले फेसबुक के माध्यम से पता चला था। इसके बाद उन्होंने इस विषय में गहराई से जानकारी जुटाई और उन्हें बनारस की एक विश्वसनीय कंपनी, जिसका नाम अन्या ग्रीन एनर्जी है, के बारे में पता चला। यह कंपनी मोटर की क्षमता और चक्की के आकार के अनुसार विभिन्न प्रकार के सोलर पैनल और संबंधित उपकरण उपलब्ध कराती है।
इस पूरे सोलर सेटअप को लगवाने में आने वाले खर्च के बारे में अरविंद ने विस्तार से बताया है:
- नकद भुगतान पर कुल खर्च: यदि कोई ग्राहक सीधे नकद भुगतान करके इस पूरे सोलर सिस्टम को अपने यहां स्थापित करवाता है, तो इसका कुल खर्च लगभग 5,20,000 रुपये आता है।
- आसान किस्तों (EMI) पर कुल खर्च: यदि कोई इसे आसान मासिक किस्तों यानी ईएमआई की सुविधा पर लेना चाहता है, तो ब्याज और अन्य शुल्कों के साथ यह कुल खर्च लगभग 6,50,000 रुपये तक पहुंच जाता है।
मासिक किस्तों का लाभ और 25 वर्षों की लंबी गारंटी
शुरुआती निवेश अधिक होने के बावजूद लंबी अवधि में यह तकनीक बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। अरविंद कुमार वर्तमान में इस सोलर सिस्टम के लिए हर महीने 12,000 रुपये की ईएमआई (EMI) का भुगतान कर रहे हैं। यह राशि उनके पहले आने वाले 15,000 से 18,000 रुपये के भारी बिजली बिल से काफी कम है। सबसे बड़ी और भरोसेमंद बात यह है कि इस सोलर सिस्टम पर कंपनी की ओर से पूरे 25 साल की गारंटी दी गई है। इतनी लंबी गारंटी अवधि होने के कारण यह निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और सौर ऊर्जा से आटा चक्की चलाना आज के समय में हर ग्रामीण उद्यमी के लिए बेहद फायदे का सौदा बन गया है।
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