ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद
आज के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं सिर्फ घर की जिम्मेदारी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित भेलवाटांड़ गांव की निवासी मनीषा मेहता ने साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा में कदम उठाए जाएं, तो छोटे स्तर पर शुरू किया गया व्यवसाय भी बड़ी सफलता दिला सकता है। मनीषा ने मुर्गी पालन के जरिए न केवल रोजगार के नए रास्ते खोले हैं, बल्कि अपने परिवार की माली हालत में भी बड़ा बदलाव लाया है।
वर्ष 2025 में रखी गई नींव
मनीषा ने इस व्यवसाय की शुरुआत वर्ष 2025 में की थी। उन्होंने अपने घर के पास करीब 1000 वर्गफीट की जगह का चयन किया और मुर्गी पालन की बागडोर अपने हाथों में ली। इस व्यवसाय को खड़ा करने में उन्हें झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से काफी सहयोग मिला। दरअसल, एक मानक केज सेटअप की कुल लागत लगभग 1 लाख 8 हजार 560 रुपये आती है, लेकिन सरकारी अनुदान के तौर पर 80 प्रतिशत राशि मिलने के कारण मनीषा को महज 20 हजार रुपये के छोटे निवेश से अपना काम शुरू करने का मौका मिल गया। यह सरकारी सहायता ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक बेहतरीन आधार साबित हो रही है।
बीवी 300 प्रजाति का चुनाव और रोजाना कमाई
मनीषा ने अपने मुर्गी फार्म में बीवी 300 प्रजाति की मुर्गियों को पाला है। जानकारों के अनुसार, यह प्रजाति विशेष रूप से अंडा उत्पादन के लिए जानी जाती है। फिलहाल उनके एक केज में 100 मुर्गियां मौजूद हैं। मनीषा बताती हैं कि इन मुर्गियों से उन्हें प्रतिदिन औसतन 80 से 100 अंडों की प्राप्ति हो रही है। अंडों की बिक्री से होने वाली कुल आमदनी में से जब मुर्गियों के चारे, दवाओं और अन्य देखरेख के खर्चों को निकाल दिया जाता है, तब भी उनके पास प्रतिदिन करीब 400 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है।
घर के कामकाज के साथ आत्मनिर्भरता
इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे करने के लिए घर से दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मनीषा का अनुभव है कि ग्रामीण महिलाएं अपने घर के जरूरी कार्यों को पूरा करने के साथ-साथ दिन में कुछ घंटे मुर्गी फार्म को देकर आसानी से महीने में 10 से 12 हजार रुपये तक की बचत कर सकती हैं। यह राशि उनकी छोटी-मोटी जरूरतों और शौक को पूरा करने के लिए काफी मददगार है।
अन्य महिलाओं को दी प्रेरणा
मनीषा अन्य महिलाओं से भी आह्वान करती हैं कि वे मुर्गी पालन जैसे स्वरोजगार से जुड़ें। उनका मानना है कि यदि महिलाएं समूह बनाकर सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाएं, तो यह क्षेत्र उनके लिए नियमित आय का एक बड़ा जरिया बन सकता है। कम जगह और कम निवेश में परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए यह एक आदर्श व्यवसाय है, जो गांवों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।
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