सिंगापुर के प्रधानमंत्री के वेतन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
दुनिया के सबसे धनी प्रधानमंत्री के रूप में पहचाने जाने वाले सिंगापुर के नेता लॉरेंस वॉन्ग की आय में हुई भारी बढ़ोतरी ने वैश्विक स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। उन्हें प्राप्त हुई 64 प्रतिशत की वेतन वृद्धि ने उन्हें दुनिया का सबसे अधिक वेतन लेने वाला सरकारी प्रमुख बना दिया है। इस फैसले की खबर सामने आते ही सिंगापुर की जनता के बीच नाराजगी और बहस का दौर शुरू हो गया। माहौल को बिगड़ता देख प्रधानमंत्री ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे आम जनता के बीच उनकी छवि में सुधार हुआ है और वे अब इस फैसले के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
वेतन वृद्धि का विवरण और दान का संकल्प
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग को मिली यह नई सैलरी किसी भी अन्य वैश्विक नेता की तुलना में बहुत अधिक है। सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव के बाद उनकी सालाना कमाई 2.2 मिलियन सिंगापुर डॉलर से बढ़कर सीधे 3.6 मिलियन सिंगापुर डॉलर तक पहुंच गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 26.9 करोड़ रुपये होती है। इस भारी-भरकम वृद्धि के विरोध में जनता द्वारा उठाए जा रहे सवालों का सामना करते हुए लॉरेंस वॉन्ग ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी बढ़ी हुई सैलरी के हिस्से का पूरा पैसा अगले 5 वर्षों तक किसी चैरिटी संस्था को दान करेंगे। उनके इस कदम से कम से कम अगले 5 सालों के लिए जनता का आक्रोश शांत होता नजर आ रहा है।
15 साल बाद हुआ वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव
सिंगापुर सरकार के आधिकारिक निर्णय के अनुसार, लॉरेंस वॉन्ग की सैलरी में यह वृद्धि 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। यदि इसे अमेरिकी डॉलर में देखा जाए, तो यह राशि लगभग 2.85 मिलियन डॉलर बनती है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री को हर महीने करीब 3 लाख सिंगापुर डॉलर मिलेंगे, जो भारतीय रुपये में लगभग 2.25 करोड़ रुपये मासिक होता है। यह 15 वर्षों के अंतराल के बाद हुआ सबसे बड़ा वेतन संशोधन है।
वैश्विक नेताओं के साथ तुलना
जब हम लॉरेंस वॉन्ग के वेतन की तुलना दुनिया के अन्य शक्तिशाली देशों के प्रमुखों से करते हैं, तो अंतर चौंकाने वाला होता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सालाना वेतन 4 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 3.3 करोड़ रुपये है। इस आंकड़े को देखें तो सिंगापुर के प्रधानमंत्री की आय अमेरिकी राष्ट्रपति से लगभग सात गुना अधिक हो गई है। इसी तरह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को सालाना 2 लाख 30 हजार डॉलर (लगभग 1.9 करोड़ रुपये) का वेतन मिलता है। वहीं, हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव की सालाना आय 7 लाख 19 हजार डॉलर और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति की 6 लाख 6 हजार डॉलर के करीब है। इन सभी आंकड़ों के मुकाबले लॉरेंस वॉन्ग अब वैश्विक राजनीति में सबसे अधिक वेतन पाने वाले व्यक्ति बन गए हैं।
सिंगापुर सरकार की अनूठी नीति
कई लोग यह प्रश्न पूछ सकते हैं कि एक छोटा सा देश अपने नेताओं को इतनी अधिक राशि क्यों देता है। सिंगापुर सरकार का तर्क अत्यंत स्पष्ट और व्यावहारिक है। उनका मानना है कि देश का कुशल संचालन करने के लिए प्राइवेट सेक्टर के सबसे होशियार, काबिल और अनुभवी लोगों को राजनीति और प्रशासनिक सेवाओं की ओर आकर्षित करना अनिवार्य है। यदि सरकारी पद पर मिलने वाला वेतन बाजार के अन्य बड़े पदों की तुलना में बहुत कम होगा, तो देश के नामी वकील, एक्सपर्ट और बड़े बिजनेसमैन सरकारी सेवा में आने से परहेज करेंगे। साथ ही, सिंगापुर का यह मानना भी है कि नेताओं को प्रतिस्पर्धी वेतन देने से रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की संभावना न्यूनतम हो जाती है, क्योंकि उन्हें अपने जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए गलत रास्ते अपनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सिंगापुर में नेताओं के वेतन का निर्धारण करने के लिए देश के टॉप 1000 सबसे ज्यादा कमाने वाले नागरिकों की औसत आय को बेंचमार्क बनाया जाता है।
जनता की आय और नेताओं के वेतन में भारी अंतर
सिंगापुर में प्रति व्यक्ति आय का स्तर काफी अच्छा है, लेकिन इसके बावजूद आम जनता की कमाई और राजनेताओं के वेतन के बीच बहुत बड़ा फासला है। साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, वहां के एक आम नागरिक की औसत मासिक आय (मीडियन सैलरी) करीब 5,775 सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 4.31 लाख रुपये है। इस आंकड़े की तुलना जब प्रधानमंत्री के 2.25 करोड़ रुपये प्रति माह के वेतन से की जाती है, तो स्पष्ट है कि यह असमानता जनता के लिए चिंता का विषय है। स्वयं लॉरेंस वॉन्ग ने स्वीकार किया है कि नेताओं की सैलरी एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि देश को भविष्य में बेहतर और योग्य नेतृत्व देने के लिए यह संशोधन करना आवश्यक था।
अन्य मंत्रियों के वेतन में भी बदलाव
सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि सरकार के अन्य मंत्रियों के वेतन ढांचे में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। एक जूनियर मंत्री की बेसिक बेंचमार्क सैलरी को 1.1 मिलियन सिंगापुर डॉलर से बढ़ाकर 1.8 मिलियन सिंगापुर डॉलर यानी करीब 13.4 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी मंत्रियों को तुरंत अधिकतम सैलरी नहीं मिलेगी। उनकी जिम्मेदारी और कार्य निष्पादन के आधार पर शुरुआत में 9 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ही लागू की जाएगी। अनुमान है कि इस कार्यकाल के अंत तक अधिकतर मंत्रियों की सालाना सैलरी 1.35 मिलियन सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 10.1 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगी।
ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियां
सिंगापुर में राजनेताओं के वेतन में पिछला बड़ा बदलाव साल 2012 में देखने को मिला था, जब जनता के भारी विरोध के बाद मंत्रियों की सैलरी में 36 प्रतिशत की कटौती कर दी गई थी। इसके बाद 2017 और 2023 में भी वेतन बढ़ाने की सिफारिशें आई थीं, लेकिन आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण इन फैसलों को टाल दिया गया था। दिसंबर 2025 में बनी एक इंडिपेंडेंट कमेटी की रिपोर्ट के बाद यह नया निर्णय लिया गया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इतनी अधिक सैलरी होने से नेताओं और आम जनता के बीच एक वैचारिक दूरी पैदा हो सकती है, जिससे नेता केवल अमीर वर्ग के प्रति समर्पित महसूस करने लग सकते हैं। हालांकि भ्रष्टाचार के मामले वहां बहुत कम हैं, लेकिन 2024 में पूर्व परिवहन मंत्री एस. ईश्वरन का भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाना इस बात का प्रमाण है कि कानून सबके लिए बराबर है।
कॉर्पोरेट स्टाइल में सरकार चलाने का मॉडल
सिंगापुर का प्रशासन दुनिया के बाकी देशों से अलग एक कॉर्पोरेट स्टाइल में काम करता है। जहाँ अन्य लोकतांत्रिक देशों में नेताओं की सैलरी को लेकर राजनीति होती है और उसे कम दिखाने का प्रयास किया जाता है, वहीं सिंगापुर अपनी नीतियों को स्पष्ट और व्यावहारिक रखता है। उनका मूल मंत्र यही है कि राष्ट्र की प्रगति के लिए सर्वोत्तम प्रतिभा को शासन में लाना है और उसके लिए उन्हें सही मूल्य चुकाना जरूरी है। लॉरेंस वॉन्ग का यह नया वेतन ढांचा फिलहाल पूरी दुनिया की चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
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