विनय कुमार सक्सेना को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार, मनोज सिन्हा के छुट्टी पर रहने तक संभालेंगे जिम्मेदारी

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के छुट्टी पर जाने के कारण लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को केंद्र शासित प्रदेश का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।

जम्मू-कश्मीर का कार्यभार विनय कुमार सक्सेना को

जम्मू-कश्मीर प्रशासन के स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के छुट्टी पर रहने के दौरान, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को जम्मू-कश्मीर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी जब तक मनोज सिन्हा अपनी छुट्टी पूरी करके वापस नहीं लौट आते हैं।

दोहरी जिम्मेदारी संभालेंगे विनय कुमार सक्सेना

राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी निर्देश स्पष्ट करते हैं कि विनय कुमार सक्सेना अपनी मौजूदा भूमिकाओं के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के तौर पर भी कार्य करेंगे। वे लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को भी यथावत जारी रखेंगे। उनके पास अब दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के संचालन का दोहरा उत्तरदायित्व रहेगा। इस नियुक्ति को प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विनय कुमार सक्सेना का अब तक का सफर

विनय कुमार सक्सेना लद्दाख के चौथे उपराज्यपाल के रूप में तैनात हैं। उन्होंने 13 मार्च 2026 को लद्दाख के उपराज्यपाल का पदभार ग्रहण किया था, जहाँ वे कविंदर गुप्ता के उत्तराधिकारी बने। लद्दाख आने से पूर्व, सक्सेना दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, जहाँ उन्होंने 26 मई 2022 को अपना कार्यभार संभाला था। प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में उनका लंबा अनुभव अब जम्मू-कश्मीर के संचालन में काम आएगा।

मनोज सिन्हा का कार्यकाल और वर्तमान स्थिति

दूसरी ओर, मनोज सिन्हा 7 अगस्त 2020 से जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के तौर पर तैनात हैं। उन्होंने जी.सी. मुर्मू के इस्तीफे के बाद इस पद की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों का एक लंबा दौर देखा गया है। वर्तमान में वे निजी कारणों से छुट्टी पर हैं और विदेश दौरे पर गए हुए हैं।

शिकागो में बोले मनोज सिन्हा

मनोज सिन्हा फिलहाल शिकागो की यात्रा पर हैं, जहाँ वे आईआईटी-बीएचयू के ग्लोबल एलुमनी मीट कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारत के तकनीकी भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल तकनीक को अपनाया है, बल्कि वैश्विक मंच पर नए मानदंड भी स्थापित किए हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत को केवल एआई (AI) उत्पादों का उपभोक्ता या बाजार बनकर नहीं रहना चाहिए। इसके विपरीत, देश को विश्व के लिए किफायती और समावेशी एआई समाधान तैयार करने वाला अग्रणी निर्माता बनना होगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान का उपयोग हमेशा समाज के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

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