तमिलनाडु विधानसभा में मचे हंगामे के बाद मुख्यमंत्री विजय ने दी सफाई, टूटे जबड़े वाले इशारे पर दी ये दलील

तमिलनाडु विधानसभा में एम.के. स्टालिन को लेकर की गई एक टिप्पणी और मुख्यमंत्री विजय के इशारों पर राजनीतिक घमासान मच गया है। विपक्षी दलों ने इसे बॉडी-शेमिंग करार दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री को अपनी सफाई देनी पड़ी।

तमिलनाडु विधानसभा में छिड़ा सियासी संग्राम

तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक अलग ही तरह का विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है। विधानसभा के भीतर सत्ताधारी दल टीवीके और प्रमुख विपक्षी दल डीएमके के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस पूरे विवाद की जड़ में इमरजेंसी के दौरान एमआईएसए यानी मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट, 1971 के तहत पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की गिरफ्तारी का मुद्दा रहा। सदन के भीतर इस मुद्दे पर इतना जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ कि स्थिति बिगड़ गई और स्पीकर के साथ भी गतिरोध पैदा हो गया। एम.के. स्टालिन ने इस दौरान सदन की कार्यवाही संचालित करने के तौर-तरीकों पर कड़ा ऐतराज जताया। विवाद की शुरुआत मुख्यमंत्री विजय द्वारा सोमवार को सदन में दिए गए एक बयान से हुई, जिसमें उन्होंने एम.के. स्टालिन की ओर एक खास इशारा किया, जिसे विपक्षी दलों ने बॉडी-शेमिंग करार दिया है।

मुख्यमंत्री विजय का स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने बचाव में कहा कि सदन में उनके द्वारा किए गए हाव-भाव पूरी तरह अनजाने में थे और उनका इरादा किसी की भी भावनाओं को आहत करना नहीं था। अपने आधिकारिक बयान में विजय ने स्पष्ट किया कि 7.9.2026 को विधानसभा में पुलिस विभाग के अनुदान अनुरोध पर जवाब देते समय उनसे जो शारीरिक हाव-भाव हुए, वे जानबूझकर नहीं किए गए थे। उन्होंने कहा कि उनके इन इशारों को व्यक्तिगत स्तर पर किसी को नीचा दिखाने या ठेस पहुंचाने की कोशिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विधानसभा के भीतर क्या हुआ था वाकया?

विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने एम.के. स्टालिन की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए उन पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके साथी हर छोटी-बड़ी बात पर एमआईएसए का नाम ले आते हैं। मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर हर बात के लिए एमआईएसए का ही हवाला दिया जाएगा, तो क्या होगा। उन्होंने वहां मौजूद बुजुर्गों को संबोधित करते हुए एमआईएसए के इतिहास की याद दिलाई। जिस समय मुख्यमंत्री यह बात कह रहे थे, उसी दौरान उन्होंने अपने दाहिने हाथ की हथेली को अपने जबड़े पर रखा। सदन में मौजूद लोगों और विपक्षी नेताओं ने इसे एम.के. स्टालिन के टूटे हुए जबड़े की ओर एक अपमानजनक इशारा माना। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने एक सुर में इसे बॉडी-शेमिंग बताते हुए तीखी निंदा की।

विपक्ष का कड़ा रुख और विरोध प्रदर्शन

मुख्यमंत्री के इस हाव-भाव को लेकर विपक्ष काफी आक्रामक हो गया। डीएमके विधायकों ने इस कृत्य के विरोध में स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के चैंबर के बाहर जमकर धरना दिया। उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री विजय की इस टिप्पणी और उनके व्यवहार को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से पूरी तरह हटा दिया जाना चाहिए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मार्शल को बुलाकर विपक्षी विधायकों को सदन से बाहर निकालना पड़ा। सीपीआई (एम) के पी. षणमुगम ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए हुए संघर्ष और पुलिसिया दमन के दौरान एम.के. स्टालिन का जबड़ा टूटा था, जो कि एक ऐतिहासिक तथ्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस व्यवहार को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि किसी के शारीरिक रूप-रंग का मजाक उड़ाना बेहद निंदनीय है।

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