कांकेर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 25 लाख के इनामी नक्सली प्रभाकर और उसकी पत्नी को मिली 7-7 साल की कड़ी सजा, तीन अन्य को भी जेल

छत्तीसगढ़ के कांकेर कोर्ट ने साल 2015 के बेसगांव मुठभेड़ मामले में कुख्यात नक्सली दंपती प्रभाकर और राजे कांगे को सात-सात साल की सजा सुनाई है। इस मामले में तीन अन्य नक्सलियों को भी पांच-पांच साल के कारावास की सजा मिली है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लाल आतंक के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई के बाद अब न्यायिक मोर्चे पर भी एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। कांकेर जिले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नक्सलवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने क्षेत्र के सबसे खूंखार और बड़े नक्सली कमांडरों में शुमार प्रभाकर और उसकी पत्नी राजे कांगे को सलाखों के पीछे भेज दिया है। अदालत ने इन दोनों को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही इस पूरे मामले में संलिप्त तीन अन्य नक्सलियों को भी कोर्ट ने 5-5 साल की जेल की सजा दी है। इस फैसले को बस्तर क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क को ध्वस्त करने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

जानिए क्या था साल 2015 का बेसगांव मुठभेड़ मामला

यह पूरा मामला आज से करीब ग्यारह साल पुराना है। साल 2015 में कांकेर जिले के ग्राम बेसगांव के पहाड़ी जंगली इलाके में सुरक्षाबलों और सशस्त्र नक्सलियों के बीच एक भीषण मुठभेड़ हुई थी। इस हिंसक वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोरर थाने में अपराध क्रमांक 108/2015 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में नक्सलियों के खिलाफ कानून की बेहद सख्त धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धाराएं, हत्या के प्रयास की धारा 307 और आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) की धाराएं शामिल थीं। इसी मामले में लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब जाकर कोर्ट ने यह अंतिम फैसला सुनाया है।

बस्तर में चार दशक तक सक्रिय रहा नक्सली प्रभाकर

कांकेर के पुलिस अधीक्षक (SP) निखिल राखेचा ने इस ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि करते हुए दोषियों के आपराधिक इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सजा पाने वाला नक्सली प्रभाकर कोई साधारण सदस्य नहीं है, बल्कि वह पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से पूरे बस्तर संभाग में नक्सली गतिविधियों को संचालित करने वाला एक बेहद मुख्य और क्रूर चेहरा रहा है। प्रभाकर नक्सली संगठन के भीतर SGCM और DKSZC जैसे शीर्ष स्तर के पदों पर कार्यरत था। बस्तर के अलग-अलग जिलों के विभिन्न थानों में प्रभाकर के खिलाफ हत्या, लूट और पुलिस टीम पर हमलों जैसे 60 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। सरकार ने इस पर 25 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम भी घोषित कर रखा था।

सप्लाई चेन की कमान संभालने वाली पत्नी राजे पर था 8 लाख का इनाम

प्रभाकर की पत्नी राजे कांगे भी नक्सली संगठन में एक बेहद प्रभावशाली और खतरनाक ओहदे पर थी। वह नक्सली संगठन की DVCM रैंक की सदस्य थी। राजे मुख्य रूप से रावघाट क्षेत्र में सक्रिय थी और नक्सलियों के लिए रसद, हथियारों व अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति करने वाली सप्लाई टीम का नेतृत्व कर रही थी। राजे कांगे के खिलाफ भी छत्तीसगढ़ के कई थानों में हत्या के प्रयास और देशद्रोह सहित 30 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 8 लाख रुपये का इनाम रखा हुआ था। इतने बड़े इनामी नक्सली जोड़े को सजा मिलना पुलिस प्रशासन के लिए एक अभूतपूर्व कानूनी जीत है।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मजबूत चार्जशीट ने दिलाई सफलता

इस बेहद संवेदनशील और पुराने मामले में नक्सलियों को सजा दिलाने के पीछे पुलिस की उत्कृष्ट जांच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बहुत बड़ा हाथ रहा है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले की जांच के दौरान विवेचक ने बेहद बारीकी से काम किया और अदालत के समक्ष एक अत्यंत मजबूत चार्जशीट पेश की। अभियोजन पक्ष ने नक्सलियों के खिलाफ केवल मौखिक गवाहों पर निर्भर न रहकर कई अहम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी अदालत के सामने साक्ष्य के रूप में रखा। पुलिस और सरकारी अभियोजक की इस प्रभावी और बेहतरीन पैरवी का ही नतीजा है कि कोर्ट ने कुल पांचों आरोपियों को दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई है। बस्तर में बड़े नक्सली नेताओं के खिलाफ इस तरह का सख्त फैसला आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल काफी ऊंचा हुआ है।

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