नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले मजबूर पिता का दुखद अंत
पंजाब में नशे के गहरे जाल और सरकारी दावों की पोल खोलती एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। संगरूर जिले के रहने वाले एक लाचार पिता को अपनी आवाज उठाने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। राज्य में सिंथेटिक ड्रग्स यानी चिट्टे की सरेआम बिक्री पर सवाल उठाने वाले गुलजार सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। व्यवस्था की अनदेखी और प्रशासनिक दबाव के कारण उन्होंने खुदकुशी जैसा घातक कदम उठाया।
वित्त मंत्री के सामने उठाया था बेटे की बर्बादी का मुद्दा
संगरूर जिले के दिरबा के रहने वाले गुलजार सिंह अपने बेटे की नशे की लत से बेहद परेशान थे। अपने इकलौते बेटे का इलाज करवाने और उसकी लत छुड़वाने के चक्कर में वे अपनी पूरी जमीन और जायदाद गंवा चुके थे। जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने सीधे सरकार के नुमाइंदों से गुहार लगाने का फैसला किया। उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में खुले मंच से इलाके में खुलेआम बिक रहे नशे पर गंभीर सवाल पूछे थे। वे उम्मीद कर रहे थे कि सरकार उनकी पीड़ा को समझेगी और मदद करेगी।
मदद की बजाय मिला माफी मांगने का दबाव
उम्मीदों के विपरीत, गुलजार सिंह के सवालों से गुस्साए कुछ तत्वों और स्थानीय नेताओं ने उन पर ही चौतरफा दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन पर वित्त मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मानसिक प्रताड़ना दी जाने लगी। इस बेइज्जती और लाचारी से टूटकर गुलजार सिंह ने जहर खा लिया। इसके बाद उन्हें नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 7 सितंबर को तड़प-तड़पकर उनकी मौत हो गई।
भाजपा ने आम आदमी पार्टी सरकार को घेरा
इस दुखद घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर तीखा निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में 'उड़ता पंजाब' की जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग नशे के सौदागरों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, सरकार उनकी मदद करने के बजाय उन्हें ही प्रताड़ित कर रही है। इस घटना ने पंजाब में नशे के कारोबार और सरकार के दावों की पोल पूरी तरह से खोलकर रख दी है।
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