ऋषिकेश के झरनों पर जाने से पहले सावधान, मानसून में जरा सी लापरवाही और रील बनाने का शौक पड़ सकता है भारी

ऋषिकेश में मानसून के दौरान खूबसूरत झरनों को देखने के लिए पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन पहाड़ों में अचानक होने वाली बारिश और चट्टानों की फिसलन बड़े हादसों को न्यौता दे सकती है।

उत्तराखंड के ऋषिकेश में मानसून की दस्तक के साथ ही प्राकृतिक खूबसूरती अपने चरम पर पहुंच चुकी है। पहाड़ों से गिरते झरने, चारों तरफ फैली हरियाली और हवा में तैरती ठंडी फुहारें सैलानियों को बेहद आकर्षित कर रही हैं। इस सुहावने मौसम का आनंद लेने के लिए स्थानीय निवासियों के साथ-साथ देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां के झरनों का रुख कर रहे हैं। हालांकि, प्रकृति का यही खूबसूरत नजारा बारिश के इस मौसम में अचानक बेहद जानलेवा भी साबित हो सकता है।

अचानक बढ़ जाता है पानी का रौद्र रूप

बारिश के दिनों में पहाड़ी इलाकों के झरने जितने सुहावने लगते हैं, उतने ही वे अप्रत्याशित भी होते हैं। पहाड़ों के ऊपरी हिस्सों में होने वाली भारी बारिश की वजह से निचले इलाकों में बहने वाले झरनों में अचानक पानी का बहाव बेहद तेज हो जाता है। शांत दिखने वाला पानी कुछ ही मिनटों में इतना विकराल रूप ले लेता है कि वहां मौजूद लोगों को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिलता।

रील और सेल्फी का बढ़ता क्रेज बढ़ा रहा खतरा

आजकल पर्यटकों में झरनों के बेहद नजदीक जाकर तस्वीरें खींचने और सोशल मीडिया के लिए वीडियो या रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। रोमांच और लाइक पाने की होड़ में लोग अक्सर सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। मानसून के दौरान लगातार पानी बहने के कारण झरनों के आसपास की चट्टानों पर काई जमा हो जाती है, जिससे वहां फिसलन बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में थोड़ा सा भी असंतुलन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

सुरक्षित सैर के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान

अगर आप भी इस मानसूनी सीजन में ऋषिकेश के खूबसूरत झरनों की सैर करने की योजना बना रहे हैं, तो सुरक्षित रहने के लिए निम्नलिखित बातों को जरूर अमल में लाएं:

  • सुरक्षित दूरी बनाए रखें: झरने के मुख्य बहाव क्षेत्र के ज्यादा करीब जाने की कोशिश बिल्कुल न करें। दूर से ही इसकी सुंदरता का लुत्फ उठाएं।
  • फिसलन भरी चट्टानों से बचें: पानी के आसपास मौजूद गीली और काई जमी चट्टानों पर पैर रखने से बचें, क्योंकि इन पर पैर फिसलने का जोखिम सबसे अधिक होता है।
  • मौसम के मिजाज को समझें: यदि ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में घने बादल छाए हों या तेज बारिश हो रही हो, तो झरनों के आसपास जाने का विचार तुरंत छोड़ दें।
  • जान जोखिम में डालकर न बनाएं रील: सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करने के चक्कर में खतरनाक किनारों पर खड़े होकर पोज देने की गलती कभी न करें।

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