सत्य निकेतन पीजी हादसा: दिल्ली की व्यवस्था में सड़न या सिर्फ सियासत का शोर? जानें जमीनी हकीकत

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई दर्दनाक इमारत ढहने की घटना ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां छात्रों की जान सिर्फ किराए की लालच और प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गई।

दिल्ली का सिस्टम और हादसों का अंतहीन चक्र

राजधानी दिल्ली देश का पावर सेंटर है, लेकिन जिस तरह से यहां का प्रशासनिक तंत्र काम कर रहा है, वह किसी के भी मन में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। सत्य निकेतन पीजी हादसे को बीते हुए 30 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन सवाल अब भी वही हैं जो पहले थे। क्या दिल्ली की जनता और उनके बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है? यह हादसा इकलौता नहीं है, बल्कि यह उस जर्जर और लाचार सिस्टम का एक और चेहरा है जहां कभी कोचिंग सेंटरों में आग लगने से बच्चे अपनी जान गंवाते हैं, तो कभी बेसमेंट में पानी भरने से मासूम डूबकर मर जाते हैं। आज यह हादसा हो गया, कल कोई और होगा और हम फिर से उसी पुरानी चक्र में फंस जाएंगे।

कौन है असली गुनहगार?

सत्य निकेतन की जिस बिल्डिंग का जिक्र हो रहा है, उसकी नींव में ही भ्रष्टाचार की परतें जमी थीं। 55 गज की जमीन पर बनी यह 40 से 50 साल पुरानी इमारत थी। नियम के अनुसार यहां मुश्किल से दो मंजिल बननी चाहिए थी, लेकिन लालच ने इसे 5 मंजिला (ग्राउंड प्लस चार मंजिल) बना दिया। इसके अलावा, अवैध तरीके से बेसमेंट की खुदाई की गई, जिससे पूरी इमारत की नींव हिल गई और पिलर इतने कमजोर हो गए कि वह भार सहन नहीं कर सकी। सवाल यह है कि क्या ये 5 फ्लोर रातों-रात खड़े हुए? नहीं, लेकिन प्रशासन की नींद तभी टूटती है जब कोई बड़ी त्रासदी हो जाती है। कांग्रेस हो, आम आदमी पार्टी हो या फिर बीजेपी, दिल्ली की सत्ता किसी भी दल के पास रही हो, हादसे नहीं रुके हैं।

आंकड़े जो प्रशासन की पोल खोलते हैं

दिल्ली अग्निशमन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति और भी भयावह नजर आती है। अप्रैल 2022 से जनवरी 2025 के बीच, यानी करीब तीन साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने या धंसने की कुल 1,133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन हादसों में 98 लोगों की असामयिक मृत्यु हुई है। वर्षवार देखें तो:

  • अप्रैल 2022 से 2023 के दौरान 349 घटनाएं हुईं, जिनमें 43 लोगों ने दम तोड़ा।
  • 2023-24 के दौरान 371 घटनाएं रिकॉर्ड की गईं, जिनमें 23 जानें गईं।
  • 1 अप्रैल 2024 से 27 जनवरी 2025 के बीच 413 घटनाएं हुईं, जिनमें 32 लोगों की मृत्यु हुई।

यह तीन साल का कार्यकाल बताता है कि सत्ता के बदलने से दिल्ली के बुनियादी ढांचे में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।

अधिकारियों पर कार्रवाई और दावों का सच

हादसे के बाद एमसीडी के साउथ जोन के 5 अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जिनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। हालांकि, जनता का आक्रोश इस बात पर है कि निलंबन महज एक औपचारिकता है। जब तक दोषियों पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा, तब तक यह सब एक रस्म अदायगी ही रहेगी। वहीं, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद का दावा है कि उनकी सरकार ने इतिहास का सबसे कड़ा कदम उठाया है और वे पिछली सरकारों की विरासत को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश और सुरक्षा ऑडिट

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल घटनास्थल तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने सभी विधायकों को अपने क्षेत्रों में सर्वे करने और अवैध निर्माणों को सील करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रियल जांच के भी आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि 17.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों पर कड़ी नजर रखी जाएगी, विशेष रूप से मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर और साकेत जैसे स्टूडेंट हब वाले इलाकों में। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि आने वाले समय में अवैध निर्माणों की निगरानी के लिए एक ठोस सिस्टम तैयार किया जाएगा।

किराए का लालच और छात्रों की मजबूरी

सत्य निकेतन के इस पीजी में छात्रों से भारी-भरकम किराया वसूला जाता था। एक मोटे अनुमान के अनुसार, 4 मंजिलों पर 4 कमरों के हिसाब से कुल 16 कमरे थे, जिनमें 48 छात्र रह रहे थे। हर बेड का किराया 12 से 17 हजार रुपये था। इस तरह हर महीने लाखों की कमाई करने वाला पीजी मालिक सुरक्षा के मानकों को ताक पर रखे हुए था। दिल्ली में हर साल 50 हजार से 1 लाख यूपीएससी अभ्यर्थी आते हैं, और उन्हें रहने के लिए मजबूरन ऐसी असुरक्षित इमारतों में शरण लेनी पड़ती है क्योंकि दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल ही नहीं हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2,51,474 छात्रों में से सिर्फ 7,000 को ही हॉस्टल मिल पाता है, जो कुल छात्रों का मात्र 3 फीसदी है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए एमसीडी, दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि छात्रों की सुरक्षा सिर्फ बिल्डिंग मालिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सरकारी अधिकारियों की भी है। हाईकोर्ट ने एक हफ्ते के भीतर ऑडिट रिपोर्ट और आगे की योजना पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को भी आड़े हाथों लिया है कि वह अपने छात्रों के लिए पर्याप्त आवास व्यवस्था करने में विफल रही है।

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