स्वतंत्र भारद्वाज को कोर्ट से दोहरा झटका, 14 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे गए, CJP ने फैसले का किया स्वागत

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को कानूनी पेच में बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है और निचली अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

न्यायिक हिरासत का कड़ा आदेश

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्हें कानून की ओर से एक ही दिन में दो बड़े झटकों का सामना करना पड़ा है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है, जबकि दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अब स्वतंत्र भारद्वाज को 21 सितंबर तक जेल में ही रहना होगा। इस घटनाक्रम के बाद कॉकरोच जनता पार्टी और उसके प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत के इस फैसले पर अपनी संतुष्टि जाहिर की है।

कोर्ट में क्या हुआ बहस का दौर

सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल काफी गंभीर रहा। स्वतंत्र भारद्वाज के वकील ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही संबंधित मामलों की FIR रद्द की जा चुकी है, फिर भी दिल्ली पुलिस का उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जाना और वहां से भारद्वाज को गिरफ्तार करके दिल्ली लाना पूरी तरह से गलत और अनुचित है। वकील का कहना था कि पुलिस की यह कार्रवाई कानून की प्रक्रिया के खिलाफ है।

पुलिस का अदालत में पक्ष

वहीं, दिल्ली पुलिस ने बचाव पक्ष के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया कि स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी जिस FIR के आधार पर की गई है, उसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द नहीं किया है। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि क्या वह संबंधित FIR के कानूनी अस्तित्व के बारे में ठोस जानकारी दे सकती है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें और आवश्यकता पड़ने पर हलफनामा पेश करें या तत्काल अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराएं। हालांकि, कोर्ट ने भारद्वाज की हैबियस कॉर्पस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

बुलंदशहर से हुई थी गिरफ्तारी

स्वतंत्र भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से पुलिस हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिल्ली लाया गया, जहां 5 सितंबर को एक अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड पर पूछताछ के लिए भेजा था। पूछताछ की अवधि पूरी होने के बाद, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद उनकी न्यायिक हिरासत 14 दिनों तक के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया, जिससे वे अब 21 सितंबर तक जेल में रहेंगे।

CJP की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा

इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने अपने बयान में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने गुंडे की याचिका खारिज कर दी है और ट्रायल कोर्ट ने उसे 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया है। उनके अनुसार, यह शांति और न्याय पसंद करने वाले तमाम कॉकरोचों के लिए एक बड़ी जीत है।

जंतर-मंतर का विवादित मामला

यह पूरा कानूनी मामला जून में जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने एक छात्र कार्यकर्ता के पिता, संजय कुमार उर्फ संजय आजाद के साथ मारपीट की। यह विवाद तब और गहरा गया जब इंटरनेट पर एक वीडियो पॉडकास्ट की क्लिप वायरल हो गई। उस क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने पीड़ित की खोपड़ी फोड़ दी थी। बाद में अपने बचाव में भारद्वाज ने तर्क दिया कि उन्होंने यह सब आत्मरक्षा में किया था।

FIR में गंभीर धाराएं और पोक्सो (POCSO) एक्ट

दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला था कि पीड़ित को लगी चोटें साधारण प्रकृति की थीं, जो कथित तौर पर स्टील के कड़े से आई थीं। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर दिल्ली पुलिस ने FIR में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं को भी जोड़ दिया। इसके अलावा, उन पर आपराधिक धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एक अलग मामला पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत भी दर्ज किया गया है। यह मामला एक नाबालिग छात्र कार्यकर्ता की शिकायत पर दर्ज हुआ, जिसमें उसने आरोप लगाया कि अपने पिता पर हुए हमले के बारे में आवाज उठाने के बाद से उसे लगातार ऑनलाइन धमकी दी जा रही है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है।

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