अमेरिका में नीम करोली बाबा की दिव्य उपस्थिति
जब हम नीम करोली बाबा का नाम सुनते हैं, तो सबसे पहले उत्तराखंड के कैंची धाम की याद आती है। हालांकि, बाबा जी की महिमा केवल भारत तक सीमित नहीं है। भारत से हजारों मील की दूरी पर स्थित अमेरिका के न्यू मेक्सिको राज्य में भी नीम करोली बाबा का एक भव्य और दिव्य धाम स्थित है। ताओस शहर की मनोरम और सुंदर पहाड़ियों के बीच बसा यह हनुमान मंदिर और आश्रम पिछले 5 दशकों से न केवल अमेरिका में, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय आस्था और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। यहाँ पहुंचने वाले भक्त अक्सर यह अनुभव करते हैं कि जैसे ही वे इस परिसर की दहलीज पार करते हैं, वे अमेरिका की भागदौड़ भरी दुनिया से निकलकर किसी बिल्कुल अलग और आध्यात्मिक लोक में प्रवेश कर गए हैं।
आश्रम की स्थापना का पांच दशक पुराना इतिहास
इस आश्रम के निर्माण के पीछे की कहानी अत्यंत प्रेरणादायक है। 1970 के दशक में जब बाबा नीम करोली के अमेरिकी शिष्य राम दास और अन्य विदेशी भक्त भारत आए, तो वे बाबा जी के व्यक्तित्व, उनकी करुणा और शिक्षाओं से गहरे प्रभावित हुए। बाबा जी के प्रति उनके हृदय में इतनी श्रद्धा उत्पन्न हुई कि उन्होंने अमेरिका की धरती पर भी एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र बनाने का संकल्प लिया, जहाँ लोग शांति और भक्ति का अनुभव कर सकें। अपने इसी सपने को साकार करते हुए भक्तों ने न्यू मेक्सिको के ताओस में इस आश्रम की नींव रखी। इसके बाद 1979 में भारत के जयपुर शहर से विशेष रूप से हनुमान जी की एक अलौकिक और सुंदर संगमरमर की मूर्ति मंगवाई गई और उसे यहां प्रतिष्ठापित किया गया। तब से लेकर आज तक, यहाँ भक्ति की अखंड ज्योति जल रही है और यह स्थान अमेरिका में आध्यात्मिक शांति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
मंदिर की वास्तुकला और वातावरण
जब कोई श्रद्धालु ताओस आश्रम के मुख्य द्वार पर पहुंचता है, तो उसे अपनी आंखों पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। मिट्टी और लकड़ी से बनी यह संरचना एक विशिष्ट भारतीय शैली का एहसास कराती है, जिस पर गर्व से लहराती भगवा ध्वजा दूर से ही आगंतुकों का स्वागत करती है। मुख्य द्वार पर हिंदी भाषा में बड़े अक्षरों में लिखा है, ‘श्री नीम करोली बाबा हनुमान मंदिर’। मंदिर के भीतर प्रवेश करते ही दीवारों पर बनी सुंदर और पारंपरिक नक्काशी, फर्श पर बिछे नरम कालीन, और हवा में घुली धूप-अगरबत्ती की सुगंध भक्तों को पूरी तरह भक्ति रस में डुबो देती है। यहां का पूरा परिवेश इतना भारतीय और शांत है कि आपको अहसास ही नहीं होता कि आप किसी विदेशी सरजमीं पर खड़े हैं।
बिना किसी जल्दबाजी के दर्शन
भारत के कई प्रसिद्ध और बड़े मंदिरों में अक्सर भारी भीड़ के कारण श्रद्धालुओं को कुछ ही सेकंड में दर्शन करके आगे बढ़ना पड़ता है, लेकिन ताओस के इस आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका शांत और सुव्यवस्थित वातावरण है। यहां आने वाले भक्त बिना किसी हड़बड़ी, धक्का-मुक्की या शोर-शराबे के आराम से बैठकर ध्यान लगा सकते हैं। यहां पुजारी भक्तों को भगवान के चरण स्पर्श करने से नहीं रोकते हैं, जिससे भक्तों को एक अलग ही अपनापन महसूस होता है। लोग यहां घंटों हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर ध्यान में लीन रहते हैं और अपने मन में गहरी शांति लेकर वापस लौटते हैं। आश्रम में आने वाले छोटे-छोटे बच्चों को पुजारी जी विशेष स्नेह देते हैं, उन्हें तिलक लगाते हैं और बाबा जी का आशीर्वाद देते हैं, जिससे लोगों को यह आभास होता है कि वे अपने घर के मंदिर में ही बैठे हैं।
फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की पूर्ण स्वतंत्रता
वर्तमान समय में दुनिया भर के लगभग सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मोबाइल फोन, कैमरे या वीडियो रिकॉर्डिंग पर सख्त पाबंदी लगा दी जाती है। इसके विपरीत, नीम करोली बाबा के इस अमेरिकी आश्रम का दृष्टिकोण अत्यंत उदार है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के भीतर फोटो खींचने और वीडियो बनाने की पूरी छूट दी जाती है। इस उदारता के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह है कि दूर-दराज के राज्यों और देशों से आए भक्त इस पावन यात्रा की स्मृतियों को हमेशा के लिए संजोकर रख सकें और अपने परिवार तथा मित्रों के साथ इस अनूठे आध्यात्मिक अनुभव को साझा कर सकें।
सात्विक प्रसाद और सेवा भाव की अनूठी परंपरा
बाबा नीम करोली जी का संदेश हमेशा से सरल रहा है, ‘सबको भोजन कराओ और ईश्वर को याद करो’। ताओस का यह आश्रम पिछले 5 दशकों से बाबा जी के इस महामंत्र का पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ पालन कर रहा है। यहां आने वाले हर व्यक्ति के लिए प्रतिदिन दोपहर और शाम के समय पूरी तरह सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। आश्रम में ‘सेल्फ सर्विस’ की व्यवस्था है, जहां भक्त स्वयं अपनी इच्छा और आवश्यकतानुसार प्लेटों में प्रसाद लेते हैं और सभी के साथ बैठकर भोजन का आनंद लेते हैं। भोजन के बाद अपनी प्लेट खुद साफ करने की परंपरा यहां आने वाले हर व्यक्ति को समानता, विनम्रता और सेवा का पाठ पढ़ाती है।
दिव्य तस्वीरें और ध्यान का केंद्र
मंदिर के मुख्य हॉल की दीवारों पर पूज्य बाबा नीम करोली जी की अनेक दुर्लभ, पुरानी और अलौकिक तस्वीरें सुसज्जित हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का यह मानना है कि इन चित्रों में बाबा जी की वही चिर-परिचित दिव्य मुस्कान दिखाई देती है, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो महाराज जी स्वयं सामने विराजमान हैं और अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि बरसा रहे हैं। मुख्य मंदिर भवन के अलावा, आश्रम के परिसर में बाबा जी का पुराना ऐतिहासिक आश्रम और एक शांत धूनी स्थल भी मौजूद है। आसपास फैली हरी-भरी पहाड़ियां और पक्षियों का कलरव इस वातावरण को इतना शांत बनाता है कि यहां घंटों तक बैठकर ध्यान साधना की जा सकती है।
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