वित्तीय कुप्रबंधन से खस्ताहाल हुआ बंगाल
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को एक गंभीर बयान देते हुए पिछली सरकारों पर राज्य की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि दशकों के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण आज बंगाल व्यावहारिक रूप से दिवालिया होने की कगार पर है। इस स्थिति से राज्य को पूरी तरह उबारने और पटरी पर लाने में कम से कम एक साल का समय लगेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की आर्थिक स्थिति फिलहाल अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
बीजेपी सरकार आने से खुलीं विकास की राहें
राज्य सचिवालय 'नबान्न' में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद बंगाल अब उन सभी केंद्रीय योजनाओं से जुड़ गया है, जो पहले लागू नहीं थीं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय फंड आने का सिलसिला शुरू हो चुका है और भविष्य में भी यह प्रवाह जारी रहेगा। इसके साथ ही सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन को 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया है।
राजस्व बढ़ाने पर सरकार का फोकस
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान राजस्व का भारी नुकसान हुआ, भ्रष्टाचार बढ़ा और केंद्रीय योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुँचाया गया। हालांकि, वर्तमान सरकार वित्तीय अनुशासन पर जोर दे रही है। उन्होंने दावा किया कि चालू वित्त वर्ष में राजकोष को पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। यदि राजस्व चोरी और नुकसान को पूरी तरह रोक लिया गया, तो राज्य की आय में और भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बाल विवाह के खिलाफ सरकार सख्त
आर्थिक मुद्दों के अलावा, मुख्यमंत्री ने बाल विवाह की कुप्रथा पर भी कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में बंगाल बाल विवाह के मामलों में शीर्ष पर पहुंच गया था। मुख्यमंत्री ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि लगभग 60 हज़ार किशोरियां गर्भवती हुई हैं, जो एक चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में इन अपराधियों को रखने के लिए इतनी जेलें भी नहीं हैं।
मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा मामले
सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की योजना बनाई है। इसके तहत न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा, बल्कि शादी कराने वाले बिचौलियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। पतियों को कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी। सबसे गंभीर स्थिति मुर्शिदाबाद जिले की है, जहाँ पिछले 6 महीनों में 12 हज़ार बाल विवाह के मामले दर्ज हुए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि बाल विवाह के आरोपियों को भविष्य में किसी भी सरकारी सामाजिक लाभ या भत्ते का लाभ नहीं मिलेगा।
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