हिमाचल के चंबा मेडिकल कॉलेज में बड़ी लापरवाही: डेढ़ साल की मासूम की तड़पकर मौत, एक घंटे तक नहीं आए डॉक्टर; भड़के परिजनों का हंगामा, सरकार पर बरसे जयराम ठाकुर

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में इलाज में कथित लापरवाही के कारण डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत का बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल में भारी हंगामा किया और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधा है।

हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला चंबा जिले से सामने आया है, जहां पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रविवार रात को इलाज के दौरान एक डेढ़ वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद बच्ची के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।

पीड़ित पिता का दर्द: एक घंटे तक नहीं पहुंचे डॉक्टर, नर्स देती रही दिलासा

मृतक बच्ची की पहचान चंबा जिले के उपमंडल चुराह की ग्राम पंचायत सेईकोठी के नरवाड़ गांव की रहने वाली कृतिका के रूप में हुई है। कृतिका की उम्र महज डेढ़ वर्ष थी। कृतिका के पिता कुलदीप सिंह ने रोते हुए अस्पताल प्रशासन की पोल खोली। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे अपनी बीमार बेटी को लेकर अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे, तो वहां कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था।

कुलदीप सिंह के अनुसार, उनकी बच्ची लगभग एक घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन उसे देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं आया। जब भी उन्होंने वहां तैनात नर्स से डॉक्टर को बुलाने की गुहार लगाई, तो नर्स हर बार यही कहती रही कि डॉक्टर बस पांच मिनट में आ रहे हैं। काफी समय बीत जाने के बाद एक महिला डॉक्टर वहां पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

जांच और एक्स-रे के नाम पर भटकाने का आरोप

पीड़ित पिता ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने के बाद बच्ची को तुरंत और सही उपचार देने के बजाय उन्हें टेस्ट और एक्स-रे करवाने के लिए यहां-वहां भटकाया गया। उन्होंने बताया कि बच्ची को एक इंजेक्शन लगाया गया और भाप दी गई, जिसके ठीक बाद वह अचेत हो गई और उसने दम तोड़ दिया। कुलदीप सिंह ने गुस्से में कहा कि डॉक्टरों को किसी के जीवन की कोई परवाह नहीं है। उन्हें हर महीने दो लाख रुपये वेतन मिल रहा है, लेकिन वे मरीजों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन हो चुके हैं।

इस दौरान बच्ची की मां का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने सिसकते हुए कहा कि अब वह अपनी बेटी को कहां से वापस लाएंगी। उन्होंने रोते हुए मांग की कि इस अस्पताल पर ताला लगा दिया जाना चाहिए, ताकि मरीज यहां आने के बजाय कहीं और जाएं और कम से कम उनकी जान तो बच सके। सोशल मीडिया पर भी इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें लाचार पिता अपनी गोद में डेढ़ साल की बच्ची का शव लिए खड़ा है और मां रो-रोकर अपनी आपबीती सुना रही है।

अस्पताल प्रबंधन ने बैठाई जांच कमेटी

इस गंभीर मामले के तूल पकड़ने के बाद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. प्रदीप ने मामले में संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। मामले की निष्पक्ष और पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। डॉ. प्रदीप ने आश्वासन दिया है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में मचा बवाल, जयराम ठाकुर ने बोला हमला

इस दुखद घटना ने हिमाचल प्रदेश में एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि इलाज के अभाव में किसी मासूम बच्चे की मृत्यु हो जाना अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्तमान सुक्खू सरकार के कार्यकाल में इस तरह की दर्दनाक घटनाएं अब रोज की बात बन चुकी हैं। इलाज में घोर लापरवाही के कारण लगातार मरीजों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार इससे कोई सबक सीखने या व्यवस्था में सुधार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जवाबदेही तय करने के बजाय सरकार पूरे मामले पर लीपापोती करने में जुट जाती है।

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके झूठे दावों और बड़े-बड़े भाषणों की भारी कीमत अब प्रदेश की आम जनता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) द्वारा भेजी गई विकास और स्वास्थ्य संबंधी धनराशि को यह सरकार समय पर खर्च नहीं कर पा रही है, जिसके कारण वह पैसा वापस लौट रहा है। सरकार अपनी इस प्रशासनिक नाकामी को 'व्यवस्था परिवर्तन' का नाम देकर जनता को गुमराह कर रही है।

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