तमिलनाडु के सलेम जिले से कृषि और सिंचाई क्षेत्र से जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। कावेरी डेल्टा के कृषि क्षेत्रों में पानी की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने मेट्टूर बांध से जल प्रवाह में भारी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद बांध से पानी का डिस्चार्ज बढ़ाकर अब 12,000 क्यूसेक (घन फीट प्रति सेकंड) कर दिया गया है। सांबा की खेती के लिए 1 सितंबर को जलाशय के गेट खोले जाने के बाद से पानी छोड़ने की मात्रा में यह अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण इजाफा माना जा रहा है। अपने खेतों को बुवाई के लिए तैयार करने और शुरुआती खेती के कामों में जुटे हजारों किसानों के लिए सरकार का यह निर्णय किसी वरदान से कम नहीं है और इसे किसानों के लिए एक बड़ी जीवनरेखा के रूप में देखा जा रहा है।
सिंचाई की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया कदम
कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सोमवार की सुबह मेट्टूर बांध से पानी के बहाव को बढ़ाने का फैसला अमल में लाया गया। अधिकारियों ने सोमवार सुबह 6:00 बजे से ही जलाशय से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। सांबा धान की फसल के लिए इस महीने की पहली तारीख को बांध के गेट खोले जाने के बाद से यह पानी की निकासी में की गई क्रमिक बढ़ोतरी की श्रृंखला का सबसे ताजा हिस्सा है। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले से उन सभी कृषि क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति में सुधार होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है जहां किसान वर्तमान में खेतों की तैयारी और बुवाई के शुरुआती चरणों में व्यस्त हैं।
अगर हम इस महीने की शुरुआत में जलाशय से पानी छोड़े जाने के इतिहास पर नजर डालें, तो 1 सितंबर को जब पहली बार बांध के गेट खोले गए थे, तब शुरुआती तौर पर केवल 3,000 क्यूसेक की दर से पानी छोड़ा जा रहा था। हालांकि, इसके तुरंत बाद ही सिंचाई की तात्कालिक जरूरत को समझते हुए कुछ ही घंटों के भीतर जल प्रवाह को तेजी से बढ़ाकर 7,000 क्यूसेक कर दिया गया। इसके बाद अगले लगातार छह दिनों तक पानी की इस निकासी को इसी स्तर पर बनाए रखा गया ताकि डेल्टा के खेतों को शुरुआती पानी मिल सके।
कावेरी डेल्टा में खेती की गतिविधियों में तेजी आने के बाद रविवार को सिंचाई के पानी की मांग और अधिक बढ़ गई। इसे देखते हुए अधिकारियों ने रविवार शाम 6:00 बजे पानी के बहाव को बढ़ाकर 10,000 क्यूसेक करने का निर्णय लिया। इसके ठीक अगले दिन, यानी सोमवार की सुबह इसमें एक और बड़ा संशोधन किया गया, जिसके तहत पानी छोड़ने की कुल मात्रा को बढ़ाकर 12,000 क्यूसेक के स्तर पर पहुंचा दिया गया।
मेट्टूर जलाशय में पानी की स्थिति और आंकड़े
रविवार शाम को दर्ज किए गए आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से मेट्टूर जलाशय की वर्तमान स्थिति का पता चलता है। इस समय बांध में जलस्तर 92.39 फीट मापा गया था। इसके साथ ही, बांध में आने वाले पानी का कुल प्रवाह यानी अंतर्वाह (इनफ्लो) 9,709 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि जलाशय में वर्तमान में उपलब्ध कुल जल भंडारण लगभग 55.35 हजार मिलियन घन फीट (टीएमसी) के स्तर पर था।
जल विभाग के अनुसार, पानी की इस निकासी को बढ़ाने का एकमात्र उद्देश्य डेल्टा के जिलों तक अधिक से अधिक मात्रा में पानी पहुंचाना है। इन क्षेत्रों में सांबा धान की सफल खेती के लिए एक भरोसेमंद और सतत सिंचाई व्यवस्था का होना बेहद आवश्यक माना जाता है। इस क्षेत्र के किसानों को अब पूरा भरोसा है कि पानी की इस बढ़ी हुई आपूर्ति से उनकी सिंचाई की तत्काल मांग पूरी हो जाएगी और बिना किसी बाधा के उनकी खेती का काम लगातार जारी रह सकेगा।
पानी की आवक और निकासी में संतुलन बनाने की चुनौती
पानी छोड़ने की दर में की गई यह ताजा वृद्धि एक ऐसे समय में हुई है जब बांध का प्रबंधन करने वाले अधिकारियों को जलाशय में पानी की आवक और बचे हुए भंडारण के बीच एक बहुत ही नाजुक संतुलन बनाना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि बांध से पानी की निकासी (12,000 क्यूसेक) वहां होने वाली पानी की आवक (9,709 क्यूसेक) से काफी अधिक हो चुकी है। इसका मतलब है कि जलाशय का जलस्तर धीरे-धीरे प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में पानी छोड़ने के किसी भी निर्णय के लिए आवक की दर एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारक बन जाएगी।
आने वाले दिनों में पानी की निकासी से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले संबंधित अधिकारी लगातार जलाशय के वर्तमान जलस्तर, नए जल प्रवाह, कुल उपलब्ध भंडारण क्षमता और विभिन्न कृषि क्षेत्रों से आने वाली सिंचाई की वास्तविक मांग पर कड़ी नजर रखेंगे। फिलहाल के लिए, प्रशासन द्वारा बढ़ाई गई इस जल आपूर्ति ने डेल्टा क्षेत्र के उन सभी किसानों को एक बहुत बड़ी राहत दी है जिनकी आजीविका और सांबा फसल पूरी तरह से कावेरी नदी के पानी पर टिकी हुई है।
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