कर्नाटक-तेलंगाना सीमा पर स्थित यह दरगाह है मिनी ताजमहल, सफेद गुंबद और मीनारें जीत लेती हैं दिल

कर्नाटक और तेलंगाना की सीमा पर स्थित हजरत सैय्यद शाह मुर्तजा कादरी मुल्तानी की दरगाह अपनी भव्य वास्तुकला के कारण मिनी ताजमहल के नाम से प्रसिद्ध है। अपनी सुंदरता और शांति के लिए मशहूर यह स्थान बड़ी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

सीमा पर स्थित रूहानी और ऐतिहासिक धरोहर

तेलंगाना और कर्नाटक की सीमा पर एक ऐसा स्थान स्थित है जो अपनी ऐतिहासिक भव्यता और रूहानी सुकून के लिए इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह स्थान न केवल अपनी वास्तुकला बल्कि अपनी शांति के लिए भी प्रसिद्ध है। तेलंगाना के विकराबाद और तांडूर जैसे क्षेत्रों से कुछ ही दूरी पर कर्नाटक के कलबुर्गी-बीदर सीमा क्षेत्र में हजरत सैय्यद शाह मुर्तजा कादरी मुल्तानी (रह.) की दरगाह मौजूद है। इस दरगाह की बनावट इतनी आकर्षक है कि इसे लोग प्यार से मिनी ताजमहल के नाम से पुकारते हैं।

क्यों कहा जाता है इसे मिनी ताजमहल?

इस दरगाह की सबसे बड़ी विशेषता इसका बाहरी स्वरूप है। सफेद संगमरमर की तरह चमकने वाला इसका मुख्य गुंबद, इसके चारों कोनों पर बनी गगनचुंबी मीनारें और एक भव्य सफेद चारदीवारी इसे पहली नजर में देखने पर आगरा के ताजमहल की याद दिलाती है। इसी अद्भुत वास्तुकला और साम्य के कारण तेलंगाना के स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले पर्यटक इसे मिनी ताजमहल कहते हैं। हरे-भरे खेतों और वादियों के बीच दूर से ही चमकती यह सफेद इमारत किसी भी व्यक्ति का मन मोह लेने के लिए काफी है।

सफर के लिए बेहतरीन विकल्प

अगर आप तेलंगाना के हैदराबाद, विकराबाद, संगारेड्डी या तांडूर में रहते हैं, तो यह दरगाह एक दिन की यात्रा या वीकेंड ट्रिप के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। विशेष रूप से बारिश के मौसम या सुहावने दिनों में, जब आप तेलंगाना की हरी-भरी पहाड़ियों और घुमावदार सड़कों से होकर गुजरते हैं, तो यहां तक का सफर बेहद यादगार बन जाता है। शांति की तलाश में रहने वाले लोग अक्सर सुकून के कुछ पल बिताने के लिए इस जगह का रुख करते हैं।

मजार खुलने के विशेष नियम

इस दरगाह से जुड़ी एक अत्यंत अनूठी और दिलचस्प जानकारी यह है कि इसका मुख्य मजार हमेशा आम जनता के लिए नहीं खुला रहता है। इस्लामिक कैलेंडर के नियमों का पालन करते हुए, मुख्य मजार के दरवाजे केवल खास अवसरों पर ही खोले जाते हैं। विशेष रूप से हर नए चांद की पहली तारीख और नौचंदी जुमेरात यानी नए चांद के बाद आने वाले पहले गुरुवार को यहां मुख्य द्वार खोले जाते हैं। हालांकि दरगाह का बाहरी परिसर आम दिनों में भी श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है, लेकिन मुख्य जियारत के लिए हर महीने तेलंगाना और आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

दक्कन का यह सीमावर्ती इलाका अपनी मिली-जुली संस्कृति के लिए हमेशा से जाना गया है। कर्नाटक और तेलंगाना की सरहद पर स्थित होने के कारण, यहां दोनों राज्यों की मिली-जुली तहजीब देखने को मिलती है। इस दरगाह पर आने वाले लोगों में केवल एक समुदाय ही नहीं, बल्कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के लोग शामिल होते हैं। वे पूरी अकीदत के साथ यहां हाजिरी लगाने आते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं। यदि आप किसी ऐसी जगह की योजना बना रहे हैं जहां खूबसूरती, आध्यात्मिकता और संस्कृति का संगम हो, तो सरहद पर बसा यह सफेद अजूबा आपके लिए एक उत्तम स्थान हो सकता है।

https://hindi.news18.com/news/nation/mini-taj-mahal-dargah-karnataka-telangana-border-white-dome-minarets-local18-10813274.html