सालाना 13 लाख की कॉर्पोरेट नौकरी को दी मात, एनआईटी कालीकट की छात्रा आथिरा सुरेश बनीं सेना में लेफ्टिनेंट

केरल की रहने वाली आथिरा सुरेश ने एक्सॉनमोबिल की शानदार नौकरी को छोड़कर भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया, और गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से प्रशिक्षण पूरा कर लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त किया।

कॉर्पोरेट करियर को अलविदा कह चुनी देशसेवा

आज के समय में जब युवा मोटी सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं, केरल की रहने वाली आथिरा सुरेश ने एक मिसाल कायम की है। आथिरा ने दुनिया की दिग्गज तेल और ऊर्जा कंपनी एक्सॉनमोबिल में मिल रहे सालाना 1300000 रुपये के पैकेज को ठुकराकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का गौरवपूर्ण रास्ता चुना है। उनका यह फैसला न केवल उनके लिए बल्कि देश की तमाम युवा लड़कियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो राष्ट्र की सेवा में अपना करियर तलाशना चाहती हैं। आथिरा ने साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो कोई भी सपना हासिल करना नामुमकिन नहीं है।

पिता से मिली प्रेरणा और बचपन का जुनून

आथिरा की सफलता की कहानी उनके बचपन से जुड़ी है। उनके पिता सुरेश भारतीय सेना में कोर ऑफ सिग्नल में नाइक के पद पर तैनात हैं। बचपन से ही अपने पिता को देश की रक्षा करते देख आथिरा के मन में भी सेना के प्रति गहरा लगाव पैदा हो गया था। उन्होंने अपना शैक्षणिक सफर एनआईटी कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करके तय किया। आईआईटी-जेईई जैसी कठिन परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और जल्द ही उन्हें एक्सॉनमोबिल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में काम करने का अवसर मिला। लेकिन कॉर्पोरेट की चकाचौंध के बीच भी उनका मन अपने बचपन के उस सपने में अटका हुआ था, जो वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का था।

कड़ी मेहनत और पहले प्रयास में मिली सफलता

आथिरा ने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का साहसी निर्णय लिया और पूरी तरह से भारतीय सेना में जाने की तैयारी में जुट गईं। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में एसएसबी के कठिन इंटरव्यू को सफलतापूर्वक पार कर लिया। इसके बाद उन्होंने गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में प्रशिक्षण लिया। 5 सितंबर को वे सफलतापूर्वक पास आउट हुईं और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त कीं। यह क्षण उनके परिवार के लिए गौरव का पल था।

शिक्षित परिवार और भविष्य की राह

आथिरा ने अपने जीवन और करियर को लेकर साझा किया कि उनके परिवार में शिक्षा को हमेशा महत्व दिया गया है। उनकी माताजी एक किंडर गार्डन स्कूल में शिक्षिका हैं, जो बच्चों को शिक्षा देने का कार्य करती हैं। वहीं, उनके छोटे भाई भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं, जो परिवार की तकनीकी शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। आथिरा ने लोकल 18 के साथ हुई बातचीत में बताया कि एक्सॉनमोबिल में करीब 1 साल तक काम करने के दौरान उन्हें जो अनुभव मिला, वह उनके लिए एक सीख थी, लेकिन सेना में जाने का जुनून इससे कहीं अधिक बड़ा था।

युवाओं के लिए संदेश

भारतीय सेना में बतौर महिला अधिकारी शामिल होने के बाद, आथिरा ने देश की अन्य लड़कियों और युवाओं को एक खास संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सेना में करियर बनाने के लिए सबसे पहले अपने आप को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि अनुशासन और दृढ़ संकल्प ही वे रास्ते हैं जो एक युवा को सफलता की सीढ़ी तक ले जाते हैं। आथिरा की यह यात्रा इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि जब देश सेवा का जज्बा हो, तो सुख-सुविधाओं से भरी नौकरी को भी आसानी से छोड़ा जा सकता है।

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