सागर में पर्यटकों के लिए नया डेस्टिनेशन
अगर आप मानसून के सुहाने मौसम में अपने परिवार या दोस्तों के साथ किसी बेहद खूबसूरत और कम बजट वाली जगह पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित राहतगढ़ वॉटरफॉल एक शानदार विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। यहां की हरियाली, खुली वादियां और नीला आसमान हर किसी का मन मोह लेता है। सबसे खास दृश्य तब देखने को मिलता है जब बीना नदी का दूधिया सफेद पानी करीब 50 फीट की ऊंचाई से नीचे एक गहरे कुंड में गिरता है। बीते 10 से 15 दिनों के दौरान सागर और इसके आसपास के ऊंचाई वाले जिलों में हुई जोरदार बारिश ने बीना नदी को लबालब भर दिया है, जिससे इस जलप्रपात की सुंदरता कई गुना बढ़ गई है।
अब साल के 12 महीने दिखेगा अद्भुत नजारा
आमतौर पर राहतगढ़ वॉटरफॉल केवल बरसाती दिनों में ही पूरे वेग के साथ बहता था, लेकिन इस बार स्थिति बदलने वाली है। स्थानीय लोगों और प्रशासन का मानना है कि इस साल के बाद से यह जलप्रपात केवल मानसून तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साल के 12 महीने पर्यटकों का स्वागत करेगा। इसके पीछे का मुख्य कारण इसी नदी पर निर्मित मडिया डैम है, जो अब बनकर लगभग तैयार हो चुका है। इस बांध से सिंचाई और पीने के लिए पानी नदी में छोड़ा जाएगा, जो वॉटरफॉल से होकर ही गुजरेगा। अब इस अद्भुत नजारे का आनंद लेने के लिए पर्यटकों को प्रति व्यक्ति ₹10 का प्रवेश शुल्क देना होगा।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और हादसों पर लगाम
पिछले कुछ वर्षों में राहतगढ़ वॉटरफॉल पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ ही कई दुखद घटनाएं भी सामने आ रही थीं, विशेषकर सेल्फी लेने के चक्कर में होने वाले हादसे प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गए थे। हालांकि, इस साल प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। वॉटरफॉल के जोखिम वाले हिस्सों को लोहे की मजबूत जालियों से घेरकर पूरी तरह कवर कर दिया गया है। इसके साथ ही, पर्यटकों के लिए सुरक्षित सेल्फी प्वाइंट भी तैयार किए गए हैं। ग्यारसपुर से आए पर्यटक दीपक लोधी ने बताया कि इस बार बच्चों के खेलने और सुरक्षा के इंतजाम काफी सराहनीय हैं। स्थानीय निवासी धर्मेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि पहले यहां हर साल दुर्घटनाओं के कारण दो से चार लोगों की जान चली जाती थी, लेकिन बेहतर सुरक्षा प्रबंधों के चलते इस बार एक भी अप्रिय घटना नहीं हुई है।
पर्यटकों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं
मंत्री गोविंद राजपूत के विशेष प्रयासों और मार्गदर्शन में इस पर्यटन स्थल का बड़े पैमाने पर सौंदर्यकरण किया गया है। पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर के भीतर एक रेस्टोरेंट शुरू किया गया है, जहां खाने-पीने की व्यवस्था मौजूद है। इसके अलावा, यहां छोटी-छोटी दुकानें और बच्चों के मनोरंजन के लिए एक विशेष गेम जोन भी बनाया गया है। पर्यटकों के आराम के लिए वहां सीमेंट की पक्की कुर्सियां और सुरक्षा के लिए छतरियां लगाई गई हैं। इन नई व्यवस्थाओं के कारण पर्यटकों का यहां का अनुभव पहले से काफी बेहतर और यादगार हो गया है।
भालकुंड का इतिहास और पाटन बाजार की यादें
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, इस प्रसिद्ध वॉटरफॉल का पुराना नाम भालकुंड है। धर्मेंद्र सिंह राजपूत बताते हैं कि इस नदी के किनारे सदियों पहले एक बड़ी बसाहट हुआ करती थी, जिसे इतिहास में पाटन के नाम से जाना जाता था। उस दौरान यहां सोना, चांदी, हीरे और जवाहरात का एक समृद्ध बाजार लगता था, जिसकी रौनक दूर-दूर तक मशहूर थी। हालांकि, समय के साथ वह गौरवशाली दौर समाप्त हो गया और अब यह इलाका केवल एक प्रमुख जलप्रपात और पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बनाए हुए है।
कैसे पहुंचें राहतगढ़ वॉटरफॉल?
राहतगढ़ वॉटरफॉल सागर से भोपाल जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह सागर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है। यात्री अपने निजी दोपहिया या चार पहिया वाहनों से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने के कारण पर्यटकों के लिए यहां आना-जाना काफी सुविधाजनक हो गया है।
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