ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच दिल्ली में चर्चा का विषय बनी यह यात्रा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन दिनों न्यायिक जगत के बड़े दिग्गजों का जमावड़ा लगा हुआ है। ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम के सिलसिले में दुनिया के 22 देशों के शीर्ष न्यायिक अधिकारी भारत की राजधानी में मौजूद हैं और न्याय व्यवस्था के भविष्य को लेकर मंथन कर रहे हैं। हालांकि, इन आधिकारिक बैठकों से इतर एक ऐसी घटना ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसने कूटनीतिक गलियारों से निकलकर आम लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है। यह घटना ईरान के चीफ जस्टिस अयातुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसिनी-एजेई की दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की यात्रा से जुड़ी है।
शुक्रवार को जब ईरान के शीर्ष न्यायिक अधिकारी जामा मस्जिद पहुंचे, तो वहां का माहौल बेहद खास हो गया। उनका स्वागत वहां मौजूद नमाजियों द्वारा बेहद उत्साह के साथ किया गया। जामा मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने पहुंचे अयातुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसिनी-एजेई का वहां मौजूद लोगों ने जिस तरह इस्तकबाल किया, वह किसी के भी लिए देखने लायक था।
शिया-सुन्नी एकता और धार्मिक सद्भाव की झलक
यह दौरा इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि ईरान एक शिया बहुल राष्ट्र है, जबकि दिल्ली की जामा मस्जिद सुन्नी इस्लामी परंपरा का एक प्रमुख और ऐतिहासिक केंद्र है। ऐसे में ईरान के इतने बड़े न्यायिक पदाधिकारी का मस्जिद में पहुंचना, शाही इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी से मुलाकात करना और वहां मौजूद सभी लोगों के साथ एक ही कतार में खड़े होकर नमाज अदा करना, शिया-सुन्नी सद्भाव के एक बड़े उदाहरण के रूप में सामने आया है।
नमाज की समाप्ति के बाद का दृश्य भी भावुक कर देने वाला था। मस्जिद में मौजूद नमाजियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। हर व्यक्ति उनका अभिवादन करने के लिए आतुर था। लोग अपने मोबाइल फोन निकालकर उनकी झलक को अपने कैमरों में कैद करने की होड़ में लगे थे। यह आपसी भाईचारे की एक ऐसी तस्वीर थी जो ब्रिक्स सम्मेलन की तकनीकी चर्चाओं से अलग एक मानवीय संवेदना को दर्शाती है।
शाही इमाम के साथ हुई अहम बातचीत
अपनी यात्रा के दौरान, अयातुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसिनी-एजेई ने जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी के साथ संवाद किया। इस बातचीत में उन्होंने भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें बहुत गहरी हैं जो संस्कृति, भाषा, साहित्य और धार्मिक संपर्कों से जुड़ी हुई हैं।
वैश्विक दबाव और कूटनीति पर रुख
ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान भारतीय धार्मिक विद्वानों और अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में आयोजित एक विशेष बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में अपना पक्ष रखा। इजरायल और अमेरिका के खिलाफ चल रहे संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान ने कभी भी किसी भी बाहरी दबाव या जबरदस्ती के आगे अपना सिर नहीं झुकाया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास हमें यह सिखाता है कि वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए बीते समय से सबक लेना कितना आवश्यक है।
ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम का उद्देश्य
अगर हम मुख्य कार्यक्रम की बात करें, तो 4 से 6 सितंबर तक चलने वाले इस फोरम की मेजबानी भारत का सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ-साथ कई सहयोगी देशों के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी भी भाग ले रहे हैं। इस मंच का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों की न्यायपालिकाओं के बीच आपसी संवाद को मजबूत करना और आज के चुनौतीपूर्ण दौर में न्याय से जुड़े जटिल विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।
- अंतरराष्ट्रीय विवादों का प्रभावी समाधान करना।
- वाणिज्यिक और व्यापारिक मामलों में मध्यस्थता की प्रक्रिया को सुधारना।
- न्यायपालिका में तकनीक और AI का सुरक्षित एवं प्रभावी इस्तेमाल।
- सतत विकास और उससे जुड़े न्यायिक पहलुओं पर विचार।
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत इस कार्यक्रम के दौरान काफी सक्रिय रहे हैं। वे लगातार विभिन्न देशों के शीर्ष न्यायिक अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं। इस सूची में रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, बेलारूस, कजाखस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण देशों के न्यायिक प्रतिनिधि शामिल हैं। इन बैठकों का जोर न्यायिक सहयोग को बढ़ाने और अलग-अलग देशों की न्याय प्रणालियों के अनुभव साझा करने पर है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो जहां एक तरफ दिल्ली में न्यायिक प्रणाली के भविष्य, तकनीक और कानूनों को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के चीफ जस्टिस की यह धार्मिक यात्रा इस पूरे आयोजन को एक अलग मानवीय और सौहार्दपूर्ण रंग दे गई है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।
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