नेपाल आपदा: 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता, 323 को किया गया रेस्क्यू

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़े स्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी है। अब तक 323 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 39 देशों के 590 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल आपदा में बचाव अभियान और विदेशी नागरिकों की स्थिति

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 323 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 39 देशों के करीब 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता हैं। इन लोगों की तलाश के लिए सरकार ने युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नेपाल सरकार पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ निरंतर संपर्क में है। लापता विदेशी नागरिकों के परिवारों की चिंता को देखते हुए मंत्रालय ने एक विशेष इमरजेंसी कंट्रोल रूम का गठन किया है। यह कंट्रोल रूम संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर काम कर रहा है और परिवारों को पल पल की जानकारी उपलब्ध करा रहा है। विदेशी राजनयिक मिशनों के माध्यम से सत्यापित डेटा साझा किया जा रहा है ताकि लापता लोगों की पहचान और उनके शवों को स्वदेश वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग किया जा सके।

भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें बचाव कार्य में जुटीं

बाढ़ के दौरान सुरंगों में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता की मदद ली जा रही है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत और चीन की तकनीकी टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं और राहत कार्यों में तेजी ला रही हैं। भारत से आई 11 सदस्यों की टीम और चीन से आए 9 विशेषज्ञ स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू में लगे हैं। वर्तमान में, भारतीय टीम मेलुंग यानी चिलिमे और स्याफ्रुबेसी में काम कर रही है, जबकि चीन की टीम अपर त्रिशूली-3ए में सुरंग के अंदर बचाव अभियान को अंजाम दे रही है। इन टीमों के अलावा दक्षिण कोरिया की एक विशेषज्ञ टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है। साथ ही, 29 अगस्त से भारत से आए 18 फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी नेपाल में है, जो डीएनए विश्लेषण के जरिए मृतकों की पहचान करने में मदद कर रही है।

विभिन्न देशों और संस्थाओं से मिल रही मदद

नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरपूर समर्थन मिल रहा है। भारत, चीन, जापान, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने राहत सामग्री भेजी है। इस सहायता में ब्रिज यूनिट, जनरेटर, फ्रीजर, सोलर लैंप, टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, डीएनए टेस्टिंग किट, दवाइयां और खाद्य सामग्री प्रमुख हैं। इसके अलावा म्यांमार, कतर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देश भी निरंतर मदद पहुंचा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र यानी UN, विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO, विश्व खाद्य कार्यक्रम यानी WFP और यूनिसेफ यानी UNICEF जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थान भी नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

पुनर्निर्माण और नुकसान का आकलन

आपदा के कारण नेपाल के बुनियादी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचा है। घरों, सड़कों, पुलों और कई जलविद्युत परियोजनाओं के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। नेपाल सरकार अब इसके व्यापक नुकसान का आकलन कर रही है। भविष्य में पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट यानी PDNA के माध्यम से नुकसान की सटीक गणना की जाएगी। आने वाले समय में इन ढांचों के पुनर्निर्माण के लिए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय सहायता की भारी आवश्यकता होगी। जैसे-जैसे आकलन पूरा होगा, सरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी विशिष्ट जरूरतों के बारे में सूचित करेगी।

शवों की पहचान के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया

बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के शवों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सावधानी बरती है। जो शव पहचान की स्थिति में नहीं हैं या पानी में अधिक समय रहने के कारण खराब हो रहे हैं, उन्हें प्रोटोकॉल के तहत दफनाया जा रहा है। हालांकि, दफनाने से पहले मेडिकल टीमों ने हर शव का डीएनए सैंपल सुरक्षित रख लिया है। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में परिवार वालों के डीएनए से मिलान कर मृतकों की पहचान सुनिश्चित की जा सके। यदि भविष्य में परिवारजन धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए शव वापस चाहते हैं, तो इसके लिए प्रक्रिया निर्धारित है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

उच्च स्तरीय निगरानी

पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन पर नेपाल सरकार की पैनी नजर है। प्रधानमंत्री स्वयं राहत कार्यों, बचाव अभियानों और अंतरराष्ट्रीय समन्वय की समीक्षा कर रहे हैं। सरकार का मुख्य ध्यान फंसे हुए लोगों को निकालने और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं बहाल करने पर केंद्रित है।

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