शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के आधिकारिक दौरे पर थे। इस यात्रा के दौरान आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। लेकिन इस कूटनीतिक यात्रा के बीच एक बहुत ही अनोखा और सांस्कृतिक पहलू भी सामने आया, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यह विशेष आकर्षण था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खुद लिखी गई कविताएं, जिनका जादू उज्बेकिस्तान के युवाओं और छात्रों के सिर चढ़कर बोला।
शाही डिनर में सुरों के साथ गूंजी पीएम मोदी की रचना
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा कुकसरॉय पैलेस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक अनौपचारिक रात्रिभोज (डिनर) का भव्य आयोजन किया गया था। इस खास डिनर के दौरान मेहमानों के लिए एक बेहद अनोखा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता प्रधानमंत्री मोदी की प्रसिद्ध स्वलिखित कविता "अभी तो सूरज उगा है" पर आधारित एक विशेष संगीतमय प्रस्तुति थी। इस रचना के पाठ और संगीत के सुंदर मेल ने वहां मौजूद सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम को उपस्थित लोगों से बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिली और यह पूरी डिनर डिप्लोमेसी की सबसे यादगार और चर्चित घटनाओं में से एक बन गई।
ताशकंद यूनिवर्सिटी के छात्रों का शानदार प्रदर्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इस यात्रा के दौरान ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज का भी दौरा किया। वहां उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षाविदों के साथ एक बेहद आत्मीय बातचीत की। इसी संवाद के दौरान एक बेहद खूबसूरत सांस्कृतिक क्षण देखने को मिला। यूनिवर्सिटी के उज्बेक छात्र-छात्राओं ने एक समूह के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के सामने उनकी ही लिखी कुछ चुनिंदा कविताओं का पाठ किया और उन्हें गाकर सुनाया। इन विदेशी छात्रों द्वारा हिंदी शब्दों का बेहद स्पष्ट और मधुर उच्चारण वहां मौजूद हर व्यक्ति को प्रभावित कर गया। छात्रों ने कुल तीन कविताओं की प्रस्तुति दी, और खास बात यह रही कि हर कविता को पहले हिंदी में और फिर उसके उज्बेक अनुवाद के साथ पेश किया गया।
इन तीन कविताओं ने जीता सबका दिल
उज्बेक छात्रों द्वारा प्रस्तुत की गई कविताओं और उनके अनुवादकों का विवरण इस प्रकार है:
- पहली कविता (अभी तो सूरज उगा है): ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के चौथे वर्ष के छात्र मिस्टर केल्डियोरोव दिलहुशबेक ने इस कविता को बेहद प्रभावशाली ढंग से हिंदी में प्रस्तुत किया। इसके तुरंत बाद, विश्वविद्यालय की तीसरे वर्ष की छात्रा दिलशोदा जुराबोएवा ने इसका उज्बेक भाषा में अनुवादित रूप सुनाया।
- दूसरी कविता (नए भारत के नए संकल्प): नए भारत की महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास को दर्शाने वाली इस कविता को चौथे वर्ष के छात्र ओटाबेक अमीरोव ने अपनी बुलंद आवाज में हिंदी में प्रस्तुत किया। इस कविता का उज्बेक अनुवाद तीसरे वर्ष के छात्र मिस्टर इकरोमखुजा सादिल्लाएव ने सुनाया।
- तीसरी कविता (मानवता को कहीं न लग जाए दाग): दया, शांति और इंसानियत के संदेश पर आधारित इस संवेदनशील कविता को तीसरे वर्ष की छात्रा ओरज़ू कुलदोशेवा ने हिंदी में गाया। वहीं, इसका उज्बेक भाषा में अनुवाद तीसरे वर्ष की छात्रा फयोजा अब्दुरसुलोवा द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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