कर्नाटक सरकार अपनी बेहद लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी योजना 'गृह लक्ष्मी' के लाभार्थियों की सूची को पूरी तरह से दुरुस्त करने की तैयारी कर रही है। इस योजना का लाभ ले रहे लोगों के सत्यापन के लिए राज्य सरकार एक व्यापक री-वेरिफिकेशन (दोबारा जांच) अभियान शुरू करने जा रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस पूरी सूची को छानना है ताकि जो लोग इस योजना के पात्र नहीं हैं, उन्हें बाहर किया जा सके और आर्थिक मदद केवल उन वास्तविक महिलाओं तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इस सिलसिले में गारंटी कमेटी के अध्यक्ष एच.एम. रेवन्ना इस मुद्दे पर रणनीति तय करने के लिए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात करेंगे।
ऐप के जरिए घर-घर जाकर होगा सत्यापन
इस जांच प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए सरकार ने विशेष तैयारी की है। सत्यापन करने वाले अधिकारी और कर्मचारी खुद लाभार्थियों के घर-घर जाएंगे। इसके लिए एक खास मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया गया है जिसकी मदद से मौके पर ही लाभार्थियों की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी और उसकी पुष्टि की जाएगी।
इस डिजिटल सत्यापन में सुरक्षा और प्रामाणिकता के कड़े इंतजाम किए गए हैं:
- फर्जी लाभार्थियों को पकड़ने के लिए चेहरा पहचानने (फेस ऑथेंटिकेशन) वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
- इसके साथ ही लाभार्थियों की बायोमेट्रिक जांच भी की जाएगी ताकि किसी भी तरह के धोखे की गुंजाइश न बचे।
- शहरी क्षेत्रों में इस बड़े काम को पूरा करने के लिए स्थानीय रेवेन्यू इंस्पेक्टर और बिल कलेक्टरों की भी सेवाएं ली जा सकती हैं।
एक महीने की समय-सीमा और 20 करोड़ का बजट
राज्य सरकार इस काम को बहुत अधिक समय तक लटकाना नहीं चाहती। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग को इस पूरी प्रक्रिया को निपटाने के लिए सिर्फ एक महीने की सख्त समय-सीमा दी है। जिला और तालुक स्तर पर लाभार्थियों की बहुत ही बारीकी से जांच की जाएगी।
इस काम में स्थानीय गारंटी कमेटियों के सदस्यों को भी लगाया जाएगा ताकि वे वास्तविक हकदारों की सही पहचान कर सकें। सरकार ने इस पूरे री-वेरिफिकेशन अभियान को चलाने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का बजट अलग से निर्धारित किया है।
इन लाभार्थियों की छंटनी पर रहेगा विशेष ध्यान
इस सत्यापन अभियान के दौरान सरकार उन लोगों की सूची तैयार करेगी जो योजना की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। विशेष रूप से निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
- जो लाभार्थी नियमित रूप से GST का भुगतान कर रहे हैं, उनकी पात्रता रद्द की जाएगी।
- ऐसे लोग जो हर साल IT रिटर्न फाइल करते हैं, उन्हें भी योजना से बाहर किया जाएगा।
- इसके अलावा, उन मृत लाभार्थियों की भी पहचान की जाएगी जिनकी मृत्यु के बावजूद सरकारी खजाने से लगातार सहायता राशि जारी हो रही है।
इस पूरी प्रक्रिया को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा समन्वित किया जाएगा ताकि काम बिना किसी गड़बड़ी के सुचारू रूप से पूरा हो सके।
योजना का विशाल बजट और अब तक का खर्च
गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान जिन पांच मुख्य गारंटियों की घोषणा की थी, 'गृह लक्ष्मी' योजना उनमें से एक है। इस योजना की शुरुआत अगस्त 2023 में की गई थी। इसके तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है।
योजना शुरू होने के बाद से लाभार्थियों की संख्या तेजी से बढ़कर लगभग 1.23 करोड़ हो गई है। इतने बड़े पैमाने पर चल रही योजना के लिए सरकार हर साल करीब 32,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करती है। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक सरकार कुल मिलाकर 74,000 करोड़ रुपये से लेकर 76,500 करोड़ रुपये तक खर्च कर चुकी है। इतनी बड़ी राशि के सही इस्तेमाल के लिए ही सरकार अब यह री-वेरिफिकेशन अभियान चला रही है।
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